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कैमरे में फिर कैद हुई बाघिन, कमरों को पिंजड़ा बनाकर पकड़ने की प्लानिंग
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रबर फैक्टरी में घूम रही बाघिन।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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चार कमरों को पिंजड़ा बनाकर बाघिन के रेस्क्यु की तैयारी
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विशेषज्ञों के बगैर ही वन विभाग ने बाघिन को पकड़ने की बनाई है योजना
फतेहगंज पश्चिमी। वन विभाग की टीमों के साथ लुकाछुपी का खेल खेल रही बाघिन एक फिर से कैमरों में नजर आई है। वन विभाग ने अब विशेषज्ञों के बगैर ही बाघिन को पकड़ने की कोशिश शुरू कर दी है। योजना के मुताबिक फैक्टरी के जंगल मे बाघिन के चहलकदमी वाले इलाके में चार कमरों को ही पिजड़ा बनाया गया है। जिसमें प्रवेश करते ही बाघिन खुद ही उसमें कैद हो जाएगी। इससे पहले शुक्रवार को कैमरे चेक करने पर रबर और कोयला प्लांट, रेलवे इंजन के पास लगे कैमरे में बाघिन दिखी है।
चार महीने से बाघिन वन विभाग की टीम के साथ लुकाछुपी खेल रही है। देहरादून, पीटीआर, कानपुर और आगरा के विशेषज्ञ की टीम बाघिन की पैंतरेबाजी और बारिश होने के कारण वापस चली गयी है। लिहाजा, अफसर अब विशेषज्ञों के बगैर ही उसे दबोचने की कोशिश करेंगे। मुख्य वन सरंक्षक ललित वर्मा और वन संरक्षक जावेद अख्तर ने फैक्टरी के जंगल का दौरा किया था। उन्होंने बाघिन के चहलकदमी वाले इलाके में चार कमरों को ही पिंजड़ा बनाकर उसमें शिकार बांधने की योजना बनाई है। शिकार को पकड़ने के लिए बाघिन जैसे ही हमला करेगी तो कमरे का शटर नुमा गेट गिर जाएगा और बाघिन कैद हो जाएगी। फिर विशेषज्ञ बुलाकर बाघिन को कमरे में ही ट्रेंक्यूलाइज कर लिया जाएगा। बता दें कि बीते दिनों भी वन विभाग ने कोयला प्लांट में एक कमरे को पिजड़ा बनाकर रेस्क्यु की योजना बनाई थी लेकिन बाघिन गेट पर 20 मिनट बैठी रही और फिर चली गई। अबकी बार चार कमरे बनाकर वहां शिकार रखा जाएगा। डीएफओ भरतलाल ने बताया कि शुक्रवार को रबर और कोयला प्लान्ट में लगे दो कैमरो में बाघिन की फुटेज दिखी है। बाघिन को पकड़ने के लिए चार कमरों को ही पिजड़ा बनाया गया है। शनिवार को शिकार बांधकर बाघिन के चहलकदमी क्षेत्र को एकान्त करके छोड़ दिया जाएगा।
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विशेषज्ञों के बगैर ही वन विभाग ने बाघिन को पकड़ने की बनाई है योजना फतेहगंज पश्चिमी। वन विभाग की टीमों के साथ लुकाछुपी का खेल खेल रही बाघिन एक फिर से कैमरों में नजर आई है। वन विभाग ने अब विशेषज्ञों के बगैर ही बाघिन को पकड़ने की कोशिश शुरू कर दी है। योजना के मुताबिक फैक्टरी के जंगल मे बाघिन के चहलकदमी वाले इलाके में चार कमरों को ही पिजड़ा बनाया गया है। जिसमें प्रवेश करते ही बाघिन खुद ही उसमें कैद हो जाएगी। इससे पहले शुक्रवार को कैमरे चेक करने पर रबर और कोयला प्लांट, रेलवे इंजन के पास लगे कैमरे में बाघिन दिखी है।
चार महीने से बाघिन वन विभाग की टीम के साथ लुकाछुपी खेल रही है। देहरादून, पीटीआर, कानपुर और आगरा के विशेषज्ञ की टीम बाघिन की पैंतरेबाजी और बारिश होने के कारण वापस चली गयी है। लिहाजा, अफसर अब विशेषज्ञों के बगैर ही उसे दबोचने की कोशिश करेंगे। मुख्य वन सरंक्षक ललित वर्मा और वन संरक्षक जावेद अख्तर ने फैक्टरी के जंगल का दौरा किया था। उन्होंने बाघिन के चहलकदमी वाले इलाके में चार कमरों को ही पिंजड़ा बनाकर उसमें शिकार बांधने की योजना बनाई है। शिकार को पकड़ने के लिए बाघिन जैसे ही हमला करेगी तो कमरे का शटर नुमा गेट गिर जाएगा और बाघिन कैद हो जाएगी। फिर विशेषज्ञ बुलाकर बाघिन को कमरे में ही ट्रेंक्यूलाइज कर लिया जाएगा। बता दें कि बीते दिनों भी वन विभाग ने कोयला प्लांट में एक कमरे को पिजड़ा बनाकर रेस्क्यु की योजना बनाई थी लेकिन बाघिन गेट पर 20 मिनट बैठी रही और फिर चली गई। अबकी बार चार कमरे बनाकर वहां शिकार रखा जाएगा। डीएफओ भरतलाल ने बताया कि शुक्रवार को रबर और कोयला प्लान्ट में लगे दो कैमरो में बाघिन की फुटेज दिखी है। बाघिन को पकड़ने के लिए चार कमरों को ही पिजड़ा बनाया गया है। शनिवार को शिकार बांधकर बाघिन के चहलकदमी क्षेत्र को एकान्त करके छोड़ दिया जाएगा।
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