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Bareilly News: ओपीडी में बढ़ती जा रही कतार, एक डॉक्टर पर सवा सौ मरीजों का भार
Thu, 23 Apr 2026 01:38 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Thu, 23 Apr 2026 01:38 AM IST
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जिला अस्पताल में मरीजों की कतार साल दर साल बढ़ रही है, लेकिन डॉक्टरों की संख्या सीमित होने से एक डॉक्टर पर सौ से ज्यादा मरीजों का भार है। एक डॉक्टर अधिकतम एक मिनट में मरीज से उनकी समस्या पूछकर परामर्श देते हुए पर्चे पर दवा और जांच लिखते हैं।
ओपीडी में रोजाना तीन फिजिशियन और एक-एक स्किन, बाल रोग, ऑर्थो, डेंटिस्ट, ईएनटी विशेषज्ञ होते हैं। आठ डॉक्टरों को रोजाना एक हजार मरीज देखने पड़ते हैं। सोमवार को मरीजों की संख्या दोगुनी हो जाती है। तब एक डॉक्टर महज 25-30 सेकंड में मरीज को देखकर दवा और जांच लिखते हैं। डाक्टरों की ड्यूटी सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक यानी छह घंटे की होती है। इसमें भर्ती किए गए मरीजों का हाल जानने के लिए ऑर्थो, बाल रोग विशेषज्ञ और एक फिजिशियन को राउंड भी करना होता है। इसलिए घंटेभर की देरी से ये विशेषज्ञ ओपीडी में पहुंचते हैं।
इस लिहाज से इन डॉक्टरों के पास और भी कम वक्त होता है। अधिकतम चार-पांच घंटे ही ओपीडी को दे पाते हैं। इससे व्यवस्था पर सवाल उठते रहते हैं। इमरजेंसी के मरीजों को देखने के दौरान जूनियर डॉक्टर ओपीडी संभालते हैं।
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मानक से तीन गुना ज्यादा एक्सरे और अल्ट्रासाउंड जांच
शासनादेश के अनुसार ओपीडी में एक डॉक्टर को रोजाना 40 मरीज देखने का मानक हैं, लेकिन डॉक्टरों की कमी के चलते कतार में खड़े सभी मरीजों को देखकर ही ओपीडी से निकलते हैं। रेडियोलॉजिस्ट को रोजाना 20 अल्ट्रासाउंड और 40 एक्सरे करना होता है, लेकिन अस्पताल में 60 से 70 अल्ट्रासाउंड और सौ से ज्यादा एक्सरे हो रहे हैं। इससे इलाज और जांच के लिए पहुंचे मरीज इंतजार करने को विवश हैं।
स्वीकृत 42 पदों में से 16 रिक्त
फिजिशियन के स्वीकृत तीन पदों के सापेक्ष दो की तैनाती है। इनमें से एक जल्द सेवानिवृत्त हो जाएंगे। रेडियोलॉजिस्ट के तीन पद के सापेक्ष एक की ही तैनात है। जनरल सर्जन, एनेस्थेसिया, नेत्र रोग विशेषज्ञ के तीन-तीन पद स्वीकृत हैं और सभी पर तैनाती है। ऑर्थोपेडिक के स्वीकृत तीन पदों के सापेक्ष दो की तैनाती है। ईएनटी के दो पद, एक तैनात, चर्म रोग का एक पद रिक्त, चेस्ट फिजिशियन के दोनों पद रिक्त, प्लास्टिक सर्जन का एक पद रिक्त, मनोरोग का एक पद रिक्त, डेंटल सर्जन के दो पदों पर एक तैनाती, फॉरेंसिक विशेषज्ञ का एक मात्र पद रिक्त है।
वर्जन
विशेषज्ञ चिकित्सकों के रिक्त पदों पर तैनाती के लिए समय-समय पर शासन को रिपोर्ट भेजते हैं। कार्डियोलॉजिस्ट, नेफ्रोलॉजिस्ट, गैस्ट्रोलॉजिस्ट व अन्य विशेषज्ञ के पद स्वीकृत नहीं हैं। इन मरीजों को प्राथमिक इलाज देकर हायर सेंटर भेजते हैं। - डॉ. आरसी दीक्षित, प्रभारी एडी एसआईसी
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ओपीडी में रोजाना तीन फिजिशियन और एक-एक स्किन, बाल रोग, ऑर्थो, डेंटिस्ट, ईएनटी विशेषज्ञ होते हैं। आठ डॉक्टरों को रोजाना एक हजार मरीज देखने पड़ते हैं। सोमवार को मरीजों की संख्या दोगुनी हो जाती है। तब एक डॉक्टर महज 25-30 सेकंड में मरीज को देखकर दवा और जांच लिखते हैं। डाक्टरों की ड्यूटी सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक यानी छह घंटे की होती है। इसमें भर्ती किए गए मरीजों का हाल जानने के लिए ऑर्थो, बाल रोग विशेषज्ञ और एक फिजिशियन को राउंड भी करना होता है। इसलिए घंटेभर की देरी से ये विशेषज्ञ ओपीडी में पहुंचते हैं।
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इस लिहाज से इन डॉक्टरों के पास और भी कम वक्त होता है। अधिकतम चार-पांच घंटे ही ओपीडी को दे पाते हैं। इससे व्यवस्था पर सवाल उठते रहते हैं। इमरजेंसी के मरीजों को देखने के दौरान जूनियर डॉक्टर ओपीडी संभालते हैं।
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मानक से तीन गुना ज्यादा एक्सरे और अल्ट्रासाउंड जांच
शासनादेश के अनुसार ओपीडी में एक डॉक्टर को रोजाना 40 मरीज देखने का मानक हैं, लेकिन डॉक्टरों की कमी के चलते कतार में खड़े सभी मरीजों को देखकर ही ओपीडी से निकलते हैं। रेडियोलॉजिस्ट को रोजाना 20 अल्ट्रासाउंड और 40 एक्सरे करना होता है, लेकिन अस्पताल में 60 से 70 अल्ट्रासाउंड और सौ से ज्यादा एक्सरे हो रहे हैं। इससे इलाज और जांच के लिए पहुंचे मरीज इंतजार करने को विवश हैं।
स्वीकृत 42 पदों में से 16 रिक्त
फिजिशियन के स्वीकृत तीन पदों के सापेक्ष दो की तैनाती है। इनमें से एक जल्द सेवानिवृत्त हो जाएंगे। रेडियोलॉजिस्ट के तीन पद के सापेक्ष एक की ही तैनात है। जनरल सर्जन, एनेस्थेसिया, नेत्र रोग विशेषज्ञ के तीन-तीन पद स्वीकृत हैं और सभी पर तैनाती है। ऑर्थोपेडिक के स्वीकृत तीन पदों के सापेक्ष दो की तैनाती है। ईएनटी के दो पद, एक तैनात, चर्म रोग का एक पद रिक्त, चेस्ट फिजिशियन के दोनों पद रिक्त, प्लास्टिक सर्जन का एक पद रिक्त, मनोरोग का एक पद रिक्त, डेंटल सर्जन के दो पदों पर एक तैनाती, फॉरेंसिक विशेषज्ञ का एक मात्र पद रिक्त है।
वर्जन
विशेषज्ञ चिकित्सकों के रिक्त पदों पर तैनाती के लिए समय-समय पर शासन को रिपोर्ट भेजते हैं। कार्डियोलॉजिस्ट, नेफ्रोलॉजिस्ट, गैस्ट्रोलॉजिस्ट व अन्य विशेषज्ञ के पद स्वीकृत नहीं हैं। इन मरीजों को प्राथमिक इलाज देकर हायर सेंटर भेजते हैं। - डॉ. आरसी दीक्षित, प्रभारी एडी एसआईसी