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Bareilly News: जिस जमीन को बीडीए ने बताया था अपना, वह उसकी थी ही नहीं
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बरेली। इज्जतनगर थाना क्षेत्र के बिहारमान नगला स्थित जमीन को बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) का बता कर एलायंस बिल्डर्स के एमडी व पांच निदेशकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। दरअसल, वह जमीन बीडीए की थी ही नहीं। आनन-फानन में सीलिंग की जमीन बताकर धोखाधड़ी और फर्जीवाड़ा कर खरीद-फरोख्त करने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद एलायंस बिल्डर्स के साझीदारों को भू माफिया घोषित कर दिया गया। इसके बाद इज्जतनगर थाने में सभी के खिलाफ गैंगस्टर का मामला भी दर्ज कर लिया गया था।
एलायंस बिल्डर्स के निदेशक अरविंदर सिंह ने बताया कि गैंगस्टर के तहत कार्रवाई से लेकर हाईकोर्ट से राहत मिलने तक उनके समेत सभी के परिवार काफी पीड़ा से गुजरे। उनकी संपत्तियों को जब्त कर लिया गया। परिवार फुटपाथ पर आ गए। इसी दौरान फरवरी 2023 में उनकी मां का निधन हो गया। वह अपने घर से मां का अंतिम संस्कार तक नहीं कर सके। जिस भूमि को बीडीए सीलिंग की बता रहा था, वह वास्तव में उनकी थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी उस भूमि पर बीडीए के दावे पर रोक लगाई थी। शहर में उन्होंने महानगर, रेजीडेंसी गार्डन समेत कई कॉलोनियां विकसित कीं, लेकिन बीडीए और पुलिस प्रशासन ने उनको रातों-रात अपराधी साबित कर दिया।
उन्होंने बताया कि गैंगस्टर लगाकर पुलिस-प्रशासन ने आवास, कार्यालय, होटल समेत 150 करोड़ से ज्यादा की संपत्तियों को जब्त कर लिया। साझीदार सफाई देते रहे, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। उनको न्याय पालिका से पूरी उम्मीद थी। आखिर ढाई साल बाद हाईकोर्ट से उनको न्याय मिला ही गया। संवाद
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एलायंस बिल्डर्स के निदेशक अरविंदर सिंह ने बताया कि गैंगस्टर के तहत कार्रवाई से लेकर हाईकोर्ट से राहत मिलने तक उनके समेत सभी के परिवार काफी पीड़ा से गुजरे। उनकी संपत्तियों को जब्त कर लिया गया। परिवार फुटपाथ पर आ गए। इसी दौरान फरवरी 2023 में उनकी मां का निधन हो गया। वह अपने घर से मां का अंतिम संस्कार तक नहीं कर सके। जिस भूमि को बीडीए सीलिंग की बता रहा था, वह वास्तव में उनकी थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी उस भूमि पर बीडीए के दावे पर रोक लगाई थी। शहर में उन्होंने महानगर, रेजीडेंसी गार्डन समेत कई कॉलोनियां विकसित कीं, लेकिन बीडीए और पुलिस प्रशासन ने उनको रातों-रात अपराधी साबित कर दिया।
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उन्होंने बताया कि गैंगस्टर लगाकर पुलिस-प्रशासन ने आवास, कार्यालय, होटल समेत 150 करोड़ से ज्यादा की संपत्तियों को जब्त कर लिया। साझीदार सफाई देते रहे, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। उनको न्याय पालिका से पूरी उम्मीद थी। आखिर ढाई साल बाद हाईकोर्ट से उनको न्याय मिला ही गया। संवाद
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