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Bareilly News: सूने आंगन में गूंज रही तकनीक की किलकारी

Sat, 25 Jul 2026 12:08 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jul 2026 12:08 AM IST
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The joyful sounds of technology echoing in the empty courtyard.
बरेली। बदलती जीवनशैली और विवाह में देरी से प्रजनन क्षमता घट रही है और बांझपन की समस्या बढ़ रही है। ऐसे में दंपती आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) का सहारा ले रहे हैं। इसके आंकड़ों में लगातार वृद्धि हो रही है। जिले में प्रतिवर्ष करीब पांच सौ बच्चों का जन्म आईवीएफ तकनीक से हो रहा है।
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आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. लतिका अग्रवाल के मुताबिक, दो दशक पूर्व जिले में महज एक-दो आईवीएफ सेंटर थे। अब यह संख्या बढ़कर 30 पहुंच गई है। पहले 40 वर्ष से अधिक आयु वाले दंपती आते थे। अब 30-35 वर्ष के दंपतियों में भी प्रेग्नेसी संबंधी समस्याएं आ रही हैं।
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डॉ. लतिका के मुताबिक प्रत्येक निसंतान दंपती को आईवीएफ की जरूरत नहीं होती। कई मामलों में दवा, हार्मोनल उपचार या आईयूआई जैसी तकनीकों से भी गर्भधारण संभव है। जांच के बाद ही आईवीएफ की सलाह दी जाती है। कई मामलाें में सामान्य गर्भधारण भी हो जाता है।
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परामर्श के अनुसार दवा और खानपान जरूरी
डॉ. रुचि श्रीवास्तव के मुताबिक, आईवीएफ जटिल प्रक्रिया है। इसमें महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। आधुनिक तकनीक से अब सफलता दर 60 फीसदी से अधिक हो गई है। अगर महिलाएं चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार दवा, खानपान आदि का ध्यान दें तो गर्भधारण और सुरक्षित प्रसव की उम्मीद बढ़ती है।


इसलिए पड़ रही आईवीएफ की जरूरत
डॉ. लतिका के मुताबिक, देर से शादी, तनाव और अनियमित जीवनशैली, हार्मोनल समस्याएं, पुरुषों में शुक्राणुओं की गुणवत्ता में कमी आदि के कारण आईवीएफ की जरूरत पड़ रही है। अगर माह में 15 केस आते हैं तो दस में महिलाएं और पांच में पुरुष निसंतानता की वजह होते हैं।
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