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Bareilly News: घोटाले की जांच अधूरी, आरोपियों के बयान तक नहीं हो सके दर्ज
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बरेली। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के लिए परिसंपत्तियों के मूल्यांकन का सत्यापन करने में फंसे पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं पर लगे आरोपों की जांच छह माह बाद भी अधूरी है। मामले में अब तक दो अभियंताओं और अमीन के बयान दर्ज नहीं हो सके हैं।
बरेली-सितारगंज हाईवे और बरेली में रिंग रोड के लिए भू अधिग्रहण से पूर्व एनएचएआई ने निजी एजेंसी से परिसंपत्तियों का मूल्यांकन कराया था। पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं ने इसका सत्यापन किया था।
शिकायत पर एनएचएआई के अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच की। इसमें त्रुटिपूर्ण मूल्यांकन की पुष्टि हुई। मंडलायुक्त और डीएम ने जांच कराई तो मूल्यांकन करने वाली निजी एजेंसी के साथ ही उसका सत्यापन करने वाले पीडब्ल्यूडी के अभियंता और विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएलएओ) भी फंस गए।
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पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं और एसएलएओ को निलंबित किया गया। इसमें अधिकतर अभियंता बहाल हो चुके हैं, लेकिन आरोपों से मुक्त नहीं हुए हैं।
शासन ने नवंबर 2024 में मुख्य अभियंता अजय कुमार को मामले की जांच सौंपी थी। इसके लिए दी गई छह महीने की अवधि मई में पूरी हो गई, पर जांच अधूरी है।
तत्कालीन अधिशासी अभियंता नारायण सिंह (अब सेबानिवृत्त), सहायक अभियंता स्नेहलता श्रीवास्तव, अवर अभियंता अंकित सक्सेना, राकेश कुमार और सुरेंद्र सिंह के साथ विभागीय अमीन शिवशंकर के खिलाफ आरोपपत्र जारी हुए हैं। मुख्य अभियंता ने सभी से जवाब मांगा है।
नारायण सिंह, स्नेहलता श्रीवास्तव व राकेश कुमार जवाब दाखिल कर अपने बयान भी दर्ज करा चुके हैं। अवर अभियंता सुरेंद्र कुमार व अंकित सक्सेना और अमीन शिव शंकर के बयान अभी दर्ज किए जाने हैं। ब्यूरो
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बरेली-सितारगंज हाईवे और बरेली में रिंग रोड के लिए भू अधिग्रहण से पूर्व एनएचएआई ने निजी एजेंसी से परिसंपत्तियों का मूल्यांकन कराया था। पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं ने इसका सत्यापन किया था।
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शिकायत पर एनएचएआई के अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच की। इसमें त्रुटिपूर्ण मूल्यांकन की पुष्टि हुई। मंडलायुक्त और डीएम ने जांच कराई तो मूल्यांकन करने वाली निजी एजेंसी के साथ ही उसका सत्यापन करने वाले पीडब्ल्यूडी के अभियंता और विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएलएओ) भी फंस गए।
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पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं और एसएलएओ को निलंबित किया गया। इसमें अधिकतर अभियंता बहाल हो चुके हैं, लेकिन आरोपों से मुक्त नहीं हुए हैं।
शासन ने नवंबर 2024 में मुख्य अभियंता अजय कुमार को मामले की जांच सौंपी थी। इसके लिए दी गई छह महीने की अवधि मई में पूरी हो गई, पर जांच अधूरी है।
तत्कालीन अधिशासी अभियंता नारायण सिंह (अब सेबानिवृत्त), सहायक अभियंता स्नेहलता श्रीवास्तव, अवर अभियंता अंकित सक्सेना, राकेश कुमार और सुरेंद्र सिंह के साथ विभागीय अमीन शिवशंकर के खिलाफ आरोपपत्र जारी हुए हैं। मुख्य अभियंता ने सभी से जवाब मांगा है।
नारायण सिंह, स्नेहलता श्रीवास्तव व राकेश कुमार जवाब दाखिल कर अपने बयान भी दर्ज करा चुके हैं। अवर अभियंता सुरेंद्र कुमार व अंकित सक्सेना और अमीन शिव शंकर के बयान अभी दर्ज किए जाने हैं। ब्यूरो