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Bareilly News: भारतीय नौ सेना ने समुद्र में बना दी थी दुश्मनों की जल समाधि
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बरेली। वर्ष 1971 में भारत-पाक युद्ध चंद दिनों तक ही चला। भारतीय थल और नौ सेना के जांबाजाें के आगे दुश्मन देश के 95 हजार सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया। भारतीय नौ सेना ने सैकड़ों पाक सैनिकों की समुद्र में जल समाधि बना दी थी। सियासत आड़े न आती तो आज पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) हमारा होता। ये बातें वर्ष 1971 के ऐतिहासिक युद्ध में शामिल रहे सेवानिवृत्त सैनिकों ने कही।
फोटो : आईएनएस विक्रांत को नष्ट करना चाहते थे दुश्मन
जनकपुरी निवासी भारतीय नौ सेना के इंजीनियर मैकेनिक राकेश चंद्रा ने बताया कि युद्ध से साल भर पहले ही उन्होंने सर्विस ज्वॉइन की थी। उन्हें विशाखापट्टनम में तैनाती मिली थी। तीन दिसंबर को युद्ध का विगुल बजा। बताया कि दुश्मन देश समुद्र के रास्ते प्रवेश कर भारतीय युद्धपोत आईएनएस विक्रांत को नष्ट करना चाहते थे। पाकिस्तानी सेना जिस रास्ते से प्रवेश करना चाहती थी, वहां समुद्र में माइंस बिछा दी गई थीं। जैसे ही पाक एटॉमिक सबमरीन गाजी ने प्रवेश किया, धमाके के साथ वह ध्वस्त हो गई। सैकड़ों पाक सैनिक समुद्र में डूब गए। डूबे जहाज की जांच की गई तो कैप्टन की डायरी मिली। लिखा था- आईएनएस विक्रांत को खत्म करुंगा, नहीं तो खुद ही खत्म हो जाऊंगा।
नवा पिंड में भटक गए थे रास्ता, नहीं लौटे 15 सैनिक
भरतौल निवासी पूर्व सैनिक केएस रावत के मुताबिक वर्ष 1971 में वे सिक्स गढ़वाल राइफल्स में तैनात थे। युद्ध के दौरान उन्हें ऑपरेशन क्लर्क की जिम्मेदारी दी गई थी। कितने सैनिक कहां गए, कितनी जीवित हैं या मृत, उनके पास क्या संसाधन हैं? आदि जानकारियां वे सैन्य मुख्यालय को भेजते थे। नवा पिंड जगह पर पोस्टिंग थी। बताया कि एक कंपनी ऑपरेशन के दौरान भटक गई थी। उसमें कंपनी कमांडर भी शामिल थे। करीब 15 लोग इस ऑपरेशन में गायब हो गए थे, जिन्हें बाद में मृत घोषित किया गया। इसके लिए सभी को सम्मान भी मिला था।
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अमर उजाला ब्यूरो
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फोटो : आईएनएस विक्रांत को नष्ट करना चाहते थे दुश्मन
जनकपुरी निवासी भारतीय नौ सेना के इंजीनियर मैकेनिक राकेश चंद्रा ने बताया कि युद्ध से साल भर पहले ही उन्होंने सर्विस ज्वॉइन की थी। उन्हें विशाखापट्टनम में तैनाती मिली थी। तीन दिसंबर को युद्ध का विगुल बजा। बताया कि दुश्मन देश समुद्र के रास्ते प्रवेश कर भारतीय युद्धपोत आईएनएस विक्रांत को नष्ट करना चाहते थे। पाकिस्तानी सेना जिस रास्ते से प्रवेश करना चाहती थी, वहां समुद्र में माइंस बिछा दी गई थीं। जैसे ही पाक एटॉमिक सबमरीन गाजी ने प्रवेश किया, धमाके के साथ वह ध्वस्त हो गई। सैकड़ों पाक सैनिक समुद्र में डूब गए। डूबे जहाज की जांच की गई तो कैप्टन की डायरी मिली। लिखा था- आईएनएस विक्रांत को खत्म करुंगा, नहीं तो खुद ही खत्म हो जाऊंगा।
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नवा पिंड में भटक गए थे रास्ता, नहीं लौटे 15 सैनिक
भरतौल निवासी पूर्व सैनिक केएस रावत के मुताबिक वर्ष 1971 में वे सिक्स गढ़वाल राइफल्स में तैनात थे। युद्ध के दौरान उन्हें ऑपरेशन क्लर्क की जिम्मेदारी दी गई थी। कितने सैनिक कहां गए, कितनी जीवित हैं या मृत, उनके पास क्या संसाधन हैं? आदि जानकारियां वे सैन्य मुख्यालय को भेजते थे। नवा पिंड जगह पर पोस्टिंग थी। बताया कि एक कंपनी ऑपरेशन के दौरान भटक गई थी। उसमें कंपनी कमांडर भी शामिल थे। करीब 15 लोग इस ऑपरेशन में गायब हो गए थे, जिन्हें बाद में मृत घोषित किया गया। इसके लिए सभी को सम्मान भी मिला था।
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अमर उजाला ब्यूरो