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Bareilly News: गर्मी ने पकड़ी तेजी...फसलों को कीड़ों से बचाना जरूरी
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बरेली। गर्मी का असर फसलों पर दिखाई देने लगा है। जमीन की नमी कम होने से फसलों में कीड़े लगने की संभावना बढ़ गई है। ऐसे मेंं किसानों के माथे पर परेशानी झलकने लगी है। उन्होंने फसलों को गर्मी और रोगों से बचाने के लिए कीटनाशक दवाएं बेचने वाली दुकानों के चक्कर लगाने शुरू कर दिए हैं। हालांकि सही जानकारी न होने की वजह से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कृषि विभाग ने मौसम को ध्यान में रखते हुए किसानों को फसल सही करने के सुझाव दिए हैं। विशेषज्ञों ने कहा है कि, जो खेत खाली हैं, उनमें गहरी जुताई व मेड़ों की साफ-सफाई करें। गन्ने में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार नियंत्रण के लिए 2, 4 डी सोडियम सॉल्ट 80 प्रतिशत, 1.25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से लगाएं। अंकुर बेधक व चोटी बेधक कीट के अंडे दिखने पर गन्ने की पत्तियों को तोड़कर नष्ट कर दें, जिससे कीट के आगे की पीढ़ी समाप्त हो जाए।
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मक्खी से बचाए कद्दू वर्गीय फसल
- ककड़ी, पेठा, परवल, तरबूज, खरबूजा, खीरा, लौकी, कद्दू, करेला, तोरई और टिंडा जैसी बेल वाली सब्जियों की फसल को कीटों से बचाना होगा। इसके लिए क्यू ल्योर फेरोमोन टैंप 8-10 ट्रैप प्रति हेक्टेयर की दर से लगाएं। वहीं सब्जियों की फसल को कीटों से बचाव के लिए ब्यूवेरिया बेसियाना (फफूंद) तीन से पांच ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर लगाएं। या फिर नीम आधारित कीटनाशकों का प्रयोग करें। संवाद
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बागों में बनाए रखें नमी
-अभी गर्मी ने अपना प्रकोप दिखाना शुरू कर दिया है। इसकी वजह से भूमि में नमी कम होने लगी है। ऐसे में कृषि विभाग ने किसानों को सचेत करते हुए कहा है कि जो लोग आम, केला या लीची की बागवानी कर रहे हैं, वे बागों में नमी बनाए रखें। केले की फसल में एक किलोग्राम गोबर की खाद के साथ में चार ग्राम ट्राइकोडर्मा मिलाकर नमी की दशा में गुड़ाई करके मिलाकर लगाएं।
वहीं आम के फलों को गिरने से बचाने के लिए नैप्थलीन एसिटिक एसिड (एनएए) 20 पीपीएम या प्लानोफिक्स 90 मिली/200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। आम को भुनगा कीट से बचाने के लिए इमिडाक्लोप्रिड 30.5 प्रतिशत, एससी (3.0 मिली /10 लीटर) व प्रोफेनोफाॅस 50 प्रतिशत ईसी (एक मिली/लीटर) का पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
लीची में पत्ती मरोड़क (लीफ फोल्डर) की रोकथाम के लिए बाईफेनथ्रिन कीटनाशी 10 प्रतिशत ईसी 1.0 मिलीलीटर मात्रा को प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। साथ ही आवश्यकतानुसार 10 से 15 दिन बाद फिर से छिड़काव करें।
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गर्मी का सीजन शुरू हो चुका है। फसलों में कीड़े लगने की संभावना अधिक है। ऐसे में किसानों को अपनी फसलों पर ध्यान देना चाहिए। पानी और दवाएं समय से लगाएं।
अर्चना प्रकाश वर्मा, जिला कृषि रक्षा अधिकारी
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कृषि विभाग ने मौसम को ध्यान में रखते हुए किसानों को फसल सही करने के सुझाव दिए हैं। विशेषज्ञों ने कहा है कि, जो खेत खाली हैं, उनमें गहरी जुताई व मेड़ों की साफ-सफाई करें। गन्ने में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार नियंत्रण के लिए 2, 4 डी सोडियम सॉल्ट 80 प्रतिशत, 1.25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से लगाएं। अंकुर बेधक व चोटी बेधक कीट के अंडे दिखने पर गन्ने की पत्तियों को तोड़कर नष्ट कर दें, जिससे कीट के आगे की पीढ़ी समाप्त हो जाए।
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मक्खी से बचाए कद्दू वर्गीय फसल
- ककड़ी, पेठा, परवल, तरबूज, खरबूजा, खीरा, लौकी, कद्दू, करेला, तोरई और टिंडा जैसी बेल वाली सब्जियों की फसल को कीटों से बचाना होगा। इसके लिए क्यू ल्योर फेरोमोन टैंप 8-10 ट्रैप प्रति हेक्टेयर की दर से लगाएं। वहीं सब्जियों की फसल को कीटों से बचाव के लिए ब्यूवेरिया बेसियाना (फफूंद) तीन से पांच ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर लगाएं। या फिर नीम आधारित कीटनाशकों का प्रयोग करें। संवाद
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बागों में बनाए रखें नमी
-अभी गर्मी ने अपना प्रकोप दिखाना शुरू कर दिया है। इसकी वजह से भूमि में नमी कम होने लगी है। ऐसे में कृषि विभाग ने किसानों को सचेत करते हुए कहा है कि जो लोग आम, केला या लीची की बागवानी कर रहे हैं, वे बागों में नमी बनाए रखें। केले की फसल में एक किलोग्राम गोबर की खाद के साथ में चार ग्राम ट्राइकोडर्मा मिलाकर नमी की दशा में गुड़ाई करके मिलाकर लगाएं।
वहीं आम के फलों को गिरने से बचाने के लिए नैप्थलीन एसिटिक एसिड (एनएए) 20 पीपीएम या प्लानोफिक्स 90 मिली/200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। आम को भुनगा कीट से बचाने के लिए इमिडाक्लोप्रिड 30.5 प्रतिशत, एससी (3.0 मिली /10 लीटर) व प्रोफेनोफाॅस 50 प्रतिशत ईसी (एक मिली/लीटर) का पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
लीची में पत्ती मरोड़क (लीफ फोल्डर) की रोकथाम के लिए बाईफेनथ्रिन कीटनाशी 10 प्रतिशत ईसी 1.0 मिलीलीटर मात्रा को प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। साथ ही आवश्यकतानुसार 10 से 15 दिन बाद फिर से छिड़काव करें।
गर्मी का सीजन शुरू हो चुका है। फसलों में कीड़े लगने की संभावना अधिक है। ऐसे में किसानों को अपनी फसलों पर ध्यान देना चाहिए। पानी और दवाएं समय से लगाएं।
अर्चना प्रकाश वर्मा, जिला कृषि रक्षा अधिकारी