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खुशहाली का ढांढस मगर खुशी के नाम पर सिर्फ टैक्स में छूट
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अमर उजाला कार्यालय में बजट की बारीकियां बताते वक्ता।
- फोटो : अमर उजाला, बरेली
बरेली। वैसे तो सेंसेक्स के एक हजार अंक टूटने से बजट की काफी कुछ कहानी खुद ही साफ हो गई लेकिन यह भी जाहिर हुआ कि केंद्र सरकार ने आम देशवासियों की भावनाओं को भी महसूस किया है और कम से कम उस ओर एक कदम बढ़ाने की भी कोशिश की है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण में विभिन्न क्षेत्रों के लिए हजारों करोड़ के पैकेज की घोषणा के साथ एक दीर्घकालीन प्रक्रिया के तहत आम लोगों की खुशहाली और संपन्नता पर जोर देना इसी का एक प्रमाण माना जा सकता है। दूसरा पहलू यह है कि बजट 2020 में की गई कई घोषणाओं ने तो शहरवासियों को लुभाया लेकिन यह असमंजस भी पैदा किया कि जिन योजनाओं की उनका स्वरूप बताए बगैर घोषणा की गई है, उनका क्रियान्वयन आखिर कैसे होगा। खुशहाली और संपन्नता की बात करने के बावजूद सामाजिक सुरक्षा की योजनाओं की कमी भी लोगों को खली। हालांकि इनकम टैक्स स्लैब में बढ़ोत्तरी की घोषणा को छोटे करदाताओं के लिए राहत भरा कदम माना गया। शिक्षा, कृषि, सोलर एनर्जी, एमएसएमई और बड़े उद्योगों के ढांचागत विकास की योजनाओं से फायदे की उम्मीद जताई गई। विशेषज्ञों ने यह भी आशा की कि लोगों पर ज्यादा पैसे होंगे तो बाजार में डिमांड बढ़ेगी और इससे सप्लाई चेन में सुधार आएगा तो देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में शनिवार को विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने बजट- 2020 पर जो राय पेश की, उसका लब्बोलुआब कुछ यही था।
इनकम टैक्स स्लैब बढ़ा दिया गया है। पांच लाख तक शून्य, पांच से साढ़े सात लाख तक पांच प्रतिशत, साढ़े सात से दस लाख स्लैब में दस प्रतिशत और इसी तरह आगे। अब तक लोग टैक्स बचाने को एफडी, रेकरिंग, इंश्योरेंस और बांड खरीदते थे, इससे उनकी बचत भी होती थी मगर अब वे इन पचड़ों में नही पड़ेंगे। उनके हाथ में पैसा ज्यादा होगा तो उपभोग बढ़ेगा। इससे देश में सुस्त अर्थव्यवस्था को तो सहारा मिलेगा लेकिन बचत की प्रवृत्ति कम होने से लोगोें का भविष्य दांव पर लगेगा। - मनोज मंगल, चार्टर्ड अकाउंटेंट
सरकार अप्रत्यक्ष कर पर ज्यादा जोर दे रही है। यह बजट छोटे करदाताओं के लिए ज्यादा मुफीद है। आने वाले दिनों में बजट में किए गए प्रावधान खासकर किसान रेल जैसी योजनाएं और इन्फ्रास्ट्रक्चर से संबंधित योजनाओं के ठीक तरह क्रियान्वित होने से देश में अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकती है। खास तौर पर रेफ्रिजरेटर ट्रेन चलाने से मछली उद्योग को काफी मदद मिलेगी और सब्जियाें जैसी वस्तुएं भी भी एक स्थान से दूसरे स्थान तक सुरक्षित पहुंचाई जा सकेंगी। इससे रोजगार बढ़ेगा। - डॉ. अनूप कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर, बरेली कॉलेज
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कम आमदनी के व्यक्ति का टैक्स स्लैब बढ़ाकर उसकी क्रय शक्ति को बढ़ाने का जो आधार दिया गया है, वह उन लोगों के खिलाफ है जो टैक्स बचाने के लिए एलआईसी के साथ ऐसे ही दूसरे तरीके अपनाते हैं। उनकी बचत की भावना को हतोत्साहित किया गया है। सरकार ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की नीतियों को अपनाने की कोशिश की है जबकि अमेरिका की तरह यहां सामाजिक सुरक्षा प्रावधान न के बराबर हैं। वहीं, शिक्षा क्षेत्र में एफडीआई आने से यहां शिक्षा भी महंगी हो जाएगी। - मोहित टंडन, चार्टर्ड अकाउंटेंट
सरकार ढांचागत विकास के लिए छह हजार प्रोजेक्ट लाएगी मगर इनका क्रियान्वयन कैसे होगा, इस बारे में कुछ नहीं बताया गया। हालांकि तकनीकी और मेडिकल के छात्रों को लोकल बॉडी से जोड़कर ट्रेनिंग देने की बात अच्छी है। स्टडी इन इंडिया स्लोगन से शुरू की गई योजना से हमारी शिक्षा की कमियां दूर होंगी, हम विश्व स्तर पर स्थापित होंगे। एमएसएमई में एक करोड़ के लोन बिना सिक्योरिटी देने की बात की गई है। इसका भी लाभकारी परिणाम होगा। - सुरेश सुंदरानी, वाइस प्रेसिडेंट इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
बजट में 20 लाख किसानों को तीन किलोवाट के सोलर पंप देने का प्रावधान किया गया है। इससे उनका पंपिंग सेट ही नहीं चल पाएगा तो वह ग्रिड में बिजली कैसे देगा। ग्रामीण क्षेत्रों में अन्न के स्टोरेज की योजना भी कागजी है। ऑनलाइन आर्गेनिक मार्केट की वजह से आर्गेनिक खेती करने वाले किसानों को नुकसान हो रहा है। फिर भी सरकार इसे बढ़ावा देने पर तुली है। किसान ट्रेन और रेफ्रिजरेटर ट्रेन की बात काल्पनिक महसूस होता है।
- अनिल साहनी, प्रगतिशील किसान
सरकार किसानों की आय दुगुनी करने के लिए कई फसलों के उत्पादन पर जोर दे रही है। वन डिस्ट्रिक्ट वन फ्रूट जैसी नई योजनाएं हैं। खेती के साथ मछली पालन पर भी जोर है। जहां तक रेफ्रिजरेटर ट्रेन की बात है तो यह मैदानी और समुद्री इलाके में मछली उत्पादन और विपणन के साथ सब्जियों के विपणन में भी सहायक होगा। इससे एक बड़ा बाजार सामने आएगा और लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा।
- डॉ. विकास वर्मा, होम्योपैथिक चिकित्सक
अर्थव्यवस्था को सुस्ती से निकालने के लिए उपभोग और क्रय शक्ति को बढ़ाने पर सरकार का जोर है। इसके लिए टैक्स स्लैब को बढ़ाया गया है। हालांकि पुराने टैक्स स्लैब और नए टैक्स स्लैब को अपनी सुविधा के अनुरूप चुनने की आजादी भी दी गई है। इसके बारे में आम लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। - डॉ. रीना अग्रवाल, असिस्टेंट प्रोफेसर, बरेली कॉलेज
नया बजट अमेरिकी बजट की तरह है। इसका भारतीयकरण होना चाहिए था। टैक्स में छूट के साथ सामाजिक सुरक्षा योजना भी लानी चाहिए थी क्योंकि अमेरिका में पहले सामाजिक सुरक्षा पर जोर दिया गया फिर लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाई गई। सरकार ने 150 हायर एजूकेशन सेंटराें में अप्रेंटिस बेस्ड रिसर्च कराने की बात कही गई है जो स्वागत योग्य है। डिग्री लेवल पर ऑनलाइन एजूकेशन, जिला अस्पताल के साथ मेडिकल कॉलेज बनाने पुलिस और राष्ट्रीय न्यायिक विश्वविद्यालय बनाने जैसे कदम सरकार के शिक्षा के क्षेत्र को मजबूत करने की ओर इशारा करते हैं।
- प्रो. एनएल शर्मा, अर्थशास्त्री
रियल एस्टेट सेक्टर की ओर सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया है। बजट में 50 लाख तक की सेल और दस करोड़ के टर्न ओवर पर 0.1 प्रतिशत बेस बढ़ा दिया गया है। इसके अलावा 120 दिन से अधिक समय तक भारत में रहने पर आपको रिटर्न भरना होगा। इससे जो विदेशी यहां लंबे समय रहता है और विदेशी मुद्रा खर्च करता है, वह यहां से जल्द जाएगा। इससे अन्य उद्योग भी प्रभावित होंगे।
- गुरुदेव चावला, चार्टर्ड अकाउंटेंट
बजट के आवंटन में तकनीकी खामियां ज्यादा हैं। ऊपर से देखने में यह अच्छा जरूर है पर दीर्घकालीन तौर पर इसके नकारात्मक प्रभाव दिखाई देंगे। बजट के आवंटन के दौरान यह भी सोचना चाहिए कि राज्य सरकारे इसे किस तरह खर्च करेंगी। राज्य सरकार किस तरह इस बजट को खर्च करती है, इसे देखना होगा। एक समिति होनी चाहिए जो केंद्रीय योजनाओं में बजट आवंटन के खर्च की लगातार ऑडिट करे ताकि सही दिशा में पैसा खर्च हो सके।
- अमरदीप सिंह, उद्यमी
सरकार ने देश के हर घर में पाइप से साफ पानी पहुंचाने के लिए साढ़े तीन लाख करोड़ की योजना शुरू की है। इसके अलावा पीएम जन आरोग्य योजना के तहत 69 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। बजट में सीनियर सिटीजन से लेकर किसानों तक के लिए योजनाओं के अलावा मछली उत्पादन और नाबार्ड योजनाओं का विस्तार करने की योजना है जो भारत के छोटे उद्यमियों को काफी मदद करेगा।
- डॉ. प्रदीप कुमार सिंघल, असिस्टेंट प्रोफेसर बरेली कॉलेज
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इनकम टैक्स स्लैब बढ़ा दिया गया है। पांच लाख तक शून्य, पांच से साढ़े सात लाख तक पांच प्रतिशत, साढ़े सात से दस लाख स्लैब में दस प्रतिशत और इसी तरह आगे। अब तक लोग टैक्स बचाने को एफडी, रेकरिंग, इंश्योरेंस और बांड खरीदते थे, इससे उनकी बचत भी होती थी मगर अब वे इन पचड़ों में नही पड़ेंगे। उनके हाथ में पैसा ज्यादा होगा तो उपभोग बढ़ेगा। इससे देश में सुस्त अर्थव्यवस्था को तो सहारा मिलेगा लेकिन बचत की प्रवृत्ति कम होने से लोगोें का भविष्य दांव पर लगेगा। - मनोज मंगल, चार्टर्ड अकाउंटेंट
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सरकार अप्रत्यक्ष कर पर ज्यादा जोर दे रही है। यह बजट छोटे करदाताओं के लिए ज्यादा मुफीद है। आने वाले दिनों में बजट में किए गए प्रावधान खासकर किसान रेल जैसी योजनाएं और इन्फ्रास्ट्रक्चर से संबंधित योजनाओं के ठीक तरह क्रियान्वित होने से देश में अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकती है। खास तौर पर रेफ्रिजरेटर ट्रेन चलाने से मछली उद्योग को काफी मदद मिलेगी और सब्जियाें जैसी वस्तुएं भी भी एक स्थान से दूसरे स्थान तक सुरक्षित पहुंचाई जा सकेंगी। इससे रोजगार बढ़ेगा। - डॉ. अनूप कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर, बरेली कॉलेज
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कम आमदनी के व्यक्ति का टैक्स स्लैब बढ़ाकर उसकी क्रय शक्ति को बढ़ाने का जो आधार दिया गया है, वह उन लोगों के खिलाफ है जो टैक्स बचाने के लिए एलआईसी के साथ ऐसे ही दूसरे तरीके अपनाते हैं। उनकी बचत की भावना को हतोत्साहित किया गया है। सरकार ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की नीतियों को अपनाने की कोशिश की है जबकि अमेरिका की तरह यहां सामाजिक सुरक्षा प्रावधान न के बराबर हैं। वहीं, शिक्षा क्षेत्र में एफडीआई आने से यहां शिक्षा भी महंगी हो जाएगी। - मोहित टंडन, चार्टर्ड अकाउंटेंट
सरकार ढांचागत विकास के लिए छह हजार प्रोजेक्ट लाएगी मगर इनका क्रियान्वयन कैसे होगा, इस बारे में कुछ नहीं बताया गया। हालांकि तकनीकी और मेडिकल के छात्रों को लोकल बॉडी से जोड़कर ट्रेनिंग देने की बात अच्छी है। स्टडी इन इंडिया स्लोगन से शुरू की गई योजना से हमारी शिक्षा की कमियां दूर होंगी, हम विश्व स्तर पर स्थापित होंगे। एमएसएमई में एक करोड़ के लोन बिना सिक्योरिटी देने की बात की गई है। इसका भी लाभकारी परिणाम होगा। - सुरेश सुंदरानी, वाइस प्रेसिडेंट इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
बजट में 20 लाख किसानों को तीन किलोवाट के सोलर पंप देने का प्रावधान किया गया है। इससे उनका पंपिंग सेट ही नहीं चल पाएगा तो वह ग्रिड में बिजली कैसे देगा। ग्रामीण क्षेत्रों में अन्न के स्टोरेज की योजना भी कागजी है। ऑनलाइन आर्गेनिक मार्केट की वजह से आर्गेनिक खेती करने वाले किसानों को नुकसान हो रहा है। फिर भी सरकार इसे बढ़ावा देने पर तुली है। किसान ट्रेन और रेफ्रिजरेटर ट्रेन की बात काल्पनिक महसूस होता है।
- अनिल साहनी, प्रगतिशील किसान
सरकार किसानों की आय दुगुनी करने के लिए कई फसलों के उत्पादन पर जोर दे रही है। वन डिस्ट्रिक्ट वन फ्रूट जैसी नई योजनाएं हैं। खेती के साथ मछली पालन पर भी जोर है। जहां तक रेफ्रिजरेटर ट्रेन की बात है तो यह मैदानी और समुद्री इलाके में मछली उत्पादन और विपणन के साथ सब्जियों के विपणन में भी सहायक होगा। इससे एक बड़ा बाजार सामने आएगा और लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा।
- डॉ. विकास वर्मा, होम्योपैथिक चिकित्सक
अर्थव्यवस्था को सुस्ती से निकालने के लिए उपभोग और क्रय शक्ति को बढ़ाने पर सरकार का जोर है। इसके लिए टैक्स स्लैब को बढ़ाया गया है। हालांकि पुराने टैक्स स्लैब और नए टैक्स स्लैब को अपनी सुविधा के अनुरूप चुनने की आजादी भी दी गई है। इसके बारे में आम लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। - डॉ. रीना अग्रवाल, असिस्टेंट प्रोफेसर, बरेली कॉलेज
नया बजट अमेरिकी बजट की तरह है। इसका भारतीयकरण होना चाहिए था। टैक्स में छूट के साथ सामाजिक सुरक्षा योजना भी लानी चाहिए थी क्योंकि अमेरिका में पहले सामाजिक सुरक्षा पर जोर दिया गया फिर लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाई गई। सरकार ने 150 हायर एजूकेशन सेंटराें में अप्रेंटिस बेस्ड रिसर्च कराने की बात कही गई है जो स्वागत योग्य है। डिग्री लेवल पर ऑनलाइन एजूकेशन, जिला अस्पताल के साथ मेडिकल कॉलेज बनाने पुलिस और राष्ट्रीय न्यायिक विश्वविद्यालय बनाने जैसे कदम सरकार के शिक्षा के क्षेत्र को मजबूत करने की ओर इशारा करते हैं।
- प्रो. एनएल शर्मा, अर्थशास्त्री
रियल एस्टेट सेक्टर की ओर सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया है। बजट में 50 लाख तक की सेल और दस करोड़ के टर्न ओवर पर 0.1 प्रतिशत बेस बढ़ा दिया गया है। इसके अलावा 120 दिन से अधिक समय तक भारत में रहने पर आपको रिटर्न भरना होगा। इससे जो विदेशी यहां लंबे समय रहता है और विदेशी मुद्रा खर्च करता है, वह यहां से जल्द जाएगा। इससे अन्य उद्योग भी प्रभावित होंगे।
- गुरुदेव चावला, चार्टर्ड अकाउंटेंट
बजट के आवंटन में तकनीकी खामियां ज्यादा हैं। ऊपर से देखने में यह अच्छा जरूर है पर दीर्घकालीन तौर पर इसके नकारात्मक प्रभाव दिखाई देंगे। बजट के आवंटन के दौरान यह भी सोचना चाहिए कि राज्य सरकारे इसे किस तरह खर्च करेंगी। राज्य सरकार किस तरह इस बजट को खर्च करती है, इसे देखना होगा। एक समिति होनी चाहिए जो केंद्रीय योजनाओं में बजट आवंटन के खर्च की लगातार ऑडिट करे ताकि सही दिशा में पैसा खर्च हो सके।
- अमरदीप सिंह, उद्यमी
सरकार ने देश के हर घर में पाइप से साफ पानी पहुंचाने के लिए साढ़े तीन लाख करोड़ की योजना शुरू की है। इसके अलावा पीएम जन आरोग्य योजना के तहत 69 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। बजट में सीनियर सिटीजन से लेकर किसानों तक के लिए योजनाओं के अलावा मछली उत्पादन और नाबार्ड योजनाओं का विस्तार करने की योजना है जो भारत के छोटे उद्यमियों को काफी मदद करेगा।
- डॉ. प्रदीप कुमार सिंघल, असिस्टेंट प्रोफेसर बरेली कॉलेज