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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   The 'gardens' of the rich from the cultivation of flowers

फूलों की खेती से महक रहे अमीरों के ‘बगीचे’

Thu, 05 Oct 2017 01:40 AM IST
बरेली
बरेली Updated Thu, 05 Oct 2017 01:40 AM IST
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केंद्र सरकार का जोर किसानों की आय दोगुनी करने पर है, लेकिन सरकारी सिस्टम किसानों का हक मारकर उसे अमीरों में बांट रहा है। उद्यान विभाग इस काम में सबसे आगे निकल गया है। बागवानी और फूलों-सब्जियों की खेती पर सरकार से करीब तीन करोड़ की जो सब्सिडी किसानों को मिलनी है, उद्यान विभाग ने उसे करोड़पतियों की जेब में डालने की पूरी तैयारी कर रखी है। बरेली से इस योजना में जिन सात लोगों के प्रोजेक्ट मंजूरी के लिए शासन को भेजे गए हैं, उनमें ज्यादातर इसी हैसियत के लोग हैं। मतलब साफ है कि करोड़ों की सरकारी सब्सिडी पर किसानों को कोई राहत नहीं देगी बल्कि अमीरों के ‘बगीचों’ को ही और महकाएगी। 
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उद्यान विभाग एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की ओर से संरक्षित खेती के अंतर्गत फूल और सब्जी की खेती करने वाले किसानों को 50 फीसदी (अधिकतम 25 लाख) सब्सिडी देने का प्रावधान है। देशी-विदेशी फूल या सब्जियों की खेती करने के लिए 10 करोड़ लागत तक के प्रोजेक्ट स्थानीय स्तर पर स्वीकृत होते हैं। इससे अधिक लागत के प्रोजेक्ट मंजूरी के लिए उद्यान निदेशालय भेजे जाते हैं। इस योजना में हर साल एक से डेढ़ करोड़ तक लागत के के प्रोजेक्ट मंजूर होते हैं। बरेली में इस योजना के तहत किसानों का हक मारकर बडे़ व्यापारी हर साल 75 लाख से लेकर एक करोड़ तक का सरकारी अनुदान भी झटक रहे हैं। हालांकि इक्का-दुक्का जगह छोड़कर कहीं भी इन अमीरों की फूलों या सब्जियों की खेती होती नहीं दिख रही। यही नहीं एक तरफ सरकारी अनुदान झटका जा रहा है तो दूसरी ओर व्यापार से करोड़ों रुपये की कमाई पर इनकम टैक्स बचाने के लिए भी कृषि बागवानी में निवेश दिखाया जा रहा है।
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फूल और सब्जी की खेती के बड़े प्रोजेक्ट
जगह का नाम         जमीन              लागत        अनुदान 
शाहजहांपुर रोड   चार हजार वर्ग मी.   56 लाख     25 लाख
नवाबगंज          चार हजार वर्ग मी.   56 लाख     25 लाख  
सेमीखेड़ा         चार हजार वर्ग मी.   56 लाख     25 लाख
गांधी नगला      एक हजार वर्ग मी.    12 लाख    06 लाख 
केसरपुर          चार हजार वर्ग मी.   56 लाख     25 लाख 

कोट--
फूल और सब्जी की खेती पर अनुदान उसको मिलता है जिसकी अपनी खेती हो। फिर चाहे वह किसान हो या व्यापारी। इसमें खेती पहले करनी पड़ती है, अनुदान बाद में मिलता है। ये बड़े प्रोजेक्ट होते हैं। छोटे किसान लागत पहले लगाने की वजह से फूल और सब्जी की खेती कर नहीं पाते। शासन को सात प्रोजेक्ट मंजूरी के लिए भेजे गए हैं। इनमें पिछले साल के दो प्रोजेक्ट मंजूर हो चुके हैं। -पूजा, जिला उद्यान अधिकारी  
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क्या कहते हैं किसान 
फोटो--
किसी ने खेती के लिए शहर से गांव आकर जमीन खरीद ली और उस पर फसल कराने लगे तो वह किसान नहीं हो गए। ऐसे लोग इन्वेस्टर हैं। सरकार की मंशा गरीब और मध्यम किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की है। एक अमीर व्यक्ति को 25 लाख अनुदान देने के बजाय 12 छोटे किसानों को दो-दो लाख का अनुदान दिया जाए। राजनीतिक पहुंच वालों को ही अनुदान देने की परंपरा बंद हो। -अनिल साहनी प्रगतिशील किसान 

फोटो-
सरकार किसानों को फूल, सब्जी या अन्य खेती पर अनुदान इसलिए देती है क्योंकि किसान के पास पैसा इतना नहीं होता कि वह इनकी खेती कर सके। उद्यान विभाग की कोई भी अनुदान स्कीम किसानों को पता ही नहीं चल पाती। सब ऊपर ही ऊपर सेटिंग कर अनुदान का बंदरबांट कर लिया जाता है। अमीरों को सरकारी अनुदान का कोई मतलब नहीं। - ताराशंकर मौर्य, किसान तिगरा फार्म 


फोटो-
अगर सरकार की कोई स्कीम किसानों के लिए आती है तो सबसे पहले उद्यान विभाग को उसका प्रचार प्रसार करना चाहिए। विभाग के अफसर और कर्मचारी यह सब करते नहीं क्योंकि इसमें उनका अपना काम नहीं बन पाएगा। इसका फायदा तकनीकी तौर पर अमीर लोग लाखों करोड़ों का अनुदान लेकर उठाते हैं। यह बड़ा निठल्ला विभाग है।  -डॉ. विकास वर्मा, प्रगतिशील किसान 
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