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Bareilly News: उम्मीदों के आसमान पर हुनर की डोर से सफलता की उड़ान
Tue, 17 Oct 2023 11:48 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Tue, 17 Oct 2023 11:48 PM IST
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बरेली। वक्त जब करवट लेता है तो बाजियां ही नहीं, इंसान की जिंदगी तक पलट जाती है। आज के शक्ति स्वरूपा के अंक में हम बता रहे है फरीदपुर की ग्राम पंचायत पचौमी की कपड़ा कारोबारी रुकसाना के बारे में। जिसने उम्मीदों के आसमान पर हुनर की डोर से सफलता की उड़ान भरी। रुकसाना अपने कारखाने में कुर्तियां और लैगी आदि कपड़े तैयार कर बेचने के लिए शहर भेजती है। जब रोजगार बढ़ा तो उन्होंने अपने साथ गांव की अन्य महिलाओें को जोड़ा। इसके साथ काम को ऑनलाइन विस्तार दिया। कड़ी मेहनत और लगन से अपनी आर्थिक स्थिति तो सुधारी ही, बल्कि अन्य महिलाओं की भी।
कैसे आया विचार
रुकसाना बताती हैं कि घर की जरूरतों के लिए सिलाई का काम सीखा और इसे आय का जरिया भी बनाया। आसपास की महिलाओं से बात करके उनके ऑर्डर तैयार करना शुरू किया। काम को आगे बढ़ाने का मन किया तो घर को कारखाने का रूप दिया। इसके बाद व्यापारियों से बात की। उनकी मदद से ऑर्डर बढ़ने लगे। समय के साथ ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ मिलकर अपने काम का प्रचार किया। इस तरह अपनी सफलता की कहानी गढ़ी। आज स्थिति यह है कि उनके साथ दस से 15 महिलाएं जुड़ीं हुई हैं, जो उनके ऑर्डर तैयार करती हैं। इसके लिए महिलाओं को प्रशिक्षण और वेतन भी दिया जाता है।
ये आईं चुनौतियां
बताया कि गांव की महिला होने के नाते सबसे ज्यादा मुश्किल था लोगों से मिलना और अपने काम का प्रचार करना, लेकिन सफलता यहीं से मिलनी थी। जब तक लोग मेरे काम को जानते नहीं तब तक उसे विस्तार कैसे मिल सकता था। इसलिए यहीं से शुरूआत की और समय ने साथ दिया और मैं सफलता की सीढ़ी चढ़ती गई। आज मेरे साथ काम करने वाली महिलाएं भी बेहतर अनुभव करती हैं।
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कैसे आया विचार
रुकसाना बताती हैं कि घर की जरूरतों के लिए सिलाई का काम सीखा और इसे आय का जरिया भी बनाया। आसपास की महिलाओं से बात करके उनके ऑर्डर तैयार करना शुरू किया। काम को आगे बढ़ाने का मन किया तो घर को कारखाने का रूप दिया। इसके बाद व्यापारियों से बात की। उनकी मदद से ऑर्डर बढ़ने लगे। समय के साथ ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ मिलकर अपने काम का प्रचार किया। इस तरह अपनी सफलता की कहानी गढ़ी। आज स्थिति यह है कि उनके साथ दस से 15 महिलाएं जुड़ीं हुई हैं, जो उनके ऑर्डर तैयार करती हैं। इसके लिए महिलाओं को प्रशिक्षण और वेतन भी दिया जाता है।
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ये आईं चुनौतियां
बताया कि गांव की महिला होने के नाते सबसे ज्यादा मुश्किल था लोगों से मिलना और अपने काम का प्रचार करना, लेकिन सफलता यहीं से मिलनी थी। जब तक लोग मेरे काम को जानते नहीं तब तक उसे विस्तार कैसे मिल सकता था। इसलिए यहीं से शुरूआत की और समय ने साथ दिया और मैं सफलता की सीढ़ी चढ़ती गई। आज मेरे साथ काम करने वाली महिलाएं भी बेहतर अनुभव करती हैं।
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