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Bareilly News: चार साल से आवास के लिए भटक रहा था परिवार

Tue, 08 Aug 2023 02:17 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Tue, 08 Aug 2023 02:17 AM IST
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The family was wandering for four years
बरेली। मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करने वाले उमेश के सिर पर छत नहीं थी। पक्का मकान बनवाने में असमर्थ होने की वजह से वह झोंपड़ी डालकर परिवार के साथ रह रहे थे। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिलने वाले मकान के लिए पिछले चार साल से वह प्रयास कर रहे थे। अब तक उन्हें योजना का लाभ नहीं मिला। रविवार देर रात पड़ोसी के मकान की दीवार झोंपड़ी पर गिरने की वजह से दो बच्चों की मौत हो गई। पत्नी और एक पुत्र के साथ अब वह अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।
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हादसे के बाद गांव में कई लोग चर्चा करते दिखे कि अगर उमेश को आवास योजना का लाभ मिला होता तो शायद दो बच्चों की जान नहीं जाती। गांव वालों ने बताया कि उमेश ने आवास दिलाने के लिए कई बार ग्राम प्रधान और सचिव के साथ अन्य अधिकारियों के भी चक्कर लगाए। संपूर्ण समाधान दिवस में भी शिकायत दर्ज कराई। कहा कि गांव में उसकी पुश्तैनी जगह पर झोंपड़ी पड़ी हुई है। छोटी से झोंपड़ी में ही पांच लोगों का परिवार रहता है।
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सबसे ज्यादा दिक्कत बारिश के मौसम में आती है। पानी टपकने की वजह से अंदर रखा सामान भीग जाता है। कई बार तो खाना बनाने में भी कठिनाई होती है। उन्होंने सक्षम अधिकारी से जांच कराकर प्रधानमंत्री आवास दिलाने की गुहार लगाई। हर बार अधिकारियों ने 2011 की आर्थिक सर्वे की सूची में नाम न होने का हवाला देकर टरका दिया गया।
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आवास मिला होता तो नहीं जाती जान

समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष शिवचरण कश्यप ने सोमवार को कलक्ट्रेट में आयोजित सर्वदलीय बैठक में हादसे का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि अगर परिवार को आवास योजना का लाभ मिला होता तो शायद मासूम बच्चों की जान नहीं जाती। उन्होंने कहा कि पात्र होने और आवेदन करने के बाद भी परिवार को आवास योजना का लाभ क्यों नहीं मिला इसकी जांच होनी चाहिए।
वर्जन:

उमेश ने कब-कब आवेदन किया था इसकी जानकारी मांगी गई है। आवास देने में किस स्तर पर लापरवाही हुई है यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। - मनोज बगोरिया, बीडीओ फरीदपुर
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परिजनों ने कराया बच्चों का अंतिम संस्कार
पोस्टमार्टम के बाद विवेक और प्रियल के शव गांव पहुंचे। माता-पिता के अस्पताल में भर्ती होने की वजह से परिवार के अन्य सदस्यों ने रामगंगा नदी के किनारे उनका अंतिम संस्कार कराया। इस दौरान गांव के लोग भी मौजूद रहे।
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गांव नहीं पहुंचे अधिकारी
हादसे की सूचना पर पुलिस तो गांव पहुंची मगर तहसील प्रशासन या ब्लॉक का कोई अधिकारी गांव नहीं गया। इसको लेकर गांव वालों में आक्रोश भी दिखा। वहीं अधिकारियों से बात करने पर उन्होंने सावन का पांचवा सोमवार होने की वजह से व्यस्तता की बात कही।

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कई दिन से था दीवार गिरने का अंदेश
उमेश के परिवार वालों ने बताया कि दीवार एक ओर को झुक गई थी। उमेश ने कई बार दीवार गिरने का अंदेशा जताते हुए इसे हटाने का कहा मगर उनकी बात नहीं सुनी गई। रविवार रात दीवार गिरने की वजह से उमेश की गृहस्थी तहस-नहस हो गई। सारा सामान भी मलबे के नीचे दब गया। बारिश होने की वजह से अनाज समेत चीजें खराब हो गईं।
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