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सौ से ज्यादा नालों ने प्रदूषित कर दी नकटिया नदी
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Tue, 05 Jul 2016 01:22 AM IST
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नदी
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नकटिया नदी में शहर के अंदर सौ से ज्यादा नाले गिर रहे हैं। नाले और सीवर का पानी नदी में गिरने से नदी का पानी कीचड़ में तब्दील हो चुका है। आस-पास की नदियों में सर्वाधिक प्रदूषित पानी इसी नदी का है। ये पानी कपड़े धोने, नहाने और यहां तक कि जानवरों के भी नहलाने लायक नहीं बचा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नदी के लगातार प्रदूषित हो रहे पानी के बारे में भ्रामक रिपोर्ट भेज रहा है।
नकटिया नदी बहेड़ी के दीनानगर गांव के तालाब से निकली है। रिठौरा से पहले भोजीपुरा तक नदी का पानी इतना प्रदूषित नहीं है जितना कि शहर के अंदर। रिठौरा से पीलीभीत बाईपास होते हुए बीसलपुर रोड, हरूनगला, नकटिया, कैंट एरिया से लेकर ठिरिया निजावत खां तक नदी में सौ से ज्यादा नाले नदी में गिरते हैं। ग्रीन पार्क, गोल्डन ग्रीन पार्क, सुपर सिटी, कुशीनगर, हरूनगला में प्राइवेट कालोनियां बसाने वाले बिल्डरों ने अपनी कालोनियों के नाले और सीवर का मुंह नदी में ही खोल रखा है। पुराना शहर में सैलानी, गुलाबबाड़ी, जगतपुर, कांकरटोला, जोगी नवादा के नालों का गंदा पानी भी नदी की ओर निकाला गया है। औसतन 25 हजार से ज्यादा घरों का गंदा पानी इस समय नकटिया नदी में पहुंच रहा है। इससे नदी नाले में तब्दील होती नजर आ रही है। नकटिया नदी के पानी में आर्सेनिक, गंधक, टीडीएस, क्लोराइड, हार्डनेस, सल्फेट, नाइट्रेट, फ्लोराइड, अल्केनिटी, टर्बिडिटी, बैक्टीरिया, पीएच आदि की मात्रा सामान्य से तीन से चार गुना तक बढ़ चुकी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की लैब में अधिकांश पैरामटर्स नापने के उपकरण ही नहीं है। इसलिए पीसीबी का स्टाफ इधर उधर से साफ पानी के नमूने लेकर एक या दो पैरामीटर्स का परीक्षण नकटिया नदी के नाम से कराकर मामूली प्रदूषण होने की रिपोर्ट भेज देता है। जमीन पर अनाधिकृत कब्जे होने से कैंट समेत कई स्थानों पर नदी विलुप्त होने के कगार पर है।
फोटो-
नहीं लगा सीवर ट्रीटमेंट प्लांट
पार्षद सुनीता यादव के पति रजनीश यादव का कहना है कि नकटिया नदी में नाले गिरने से रोकने के लिए उन्होंने मेयर डा. आईएस तोमर को लिखकर दिया था। उस समय मेयर ने सीवर ट्रीटमेंट लगवाने और नालों का पानी कहीं और डायवर्ट कराने का वादा किया था। बाद में इस पर कोई काम नहीं किया। सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगता तो नदी को प्रदूषित होने से बचाया जा सकता था।
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नकटिया नदी की खबर में वर्जन
‘सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का प्रस्ताव अमृत योजना में भेजा जा चुका है। शासन से बजट मिलने के बाद इस संबंध में एसटीपी लगवाने का काम शुरू कराएंगे। तब तक नालों का पानी कहीं और जाने की गुंजाइश ही नहीं है।’ डा. आईएस तोमर, मेयर
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नकटिया नदी बहेड़ी के दीनानगर गांव के तालाब से निकली है। रिठौरा से पहले भोजीपुरा तक नदी का पानी इतना प्रदूषित नहीं है जितना कि शहर के अंदर। रिठौरा से पीलीभीत बाईपास होते हुए बीसलपुर रोड, हरूनगला, नकटिया, कैंट एरिया से लेकर ठिरिया निजावत खां तक नदी में सौ से ज्यादा नाले नदी में गिरते हैं। ग्रीन पार्क, गोल्डन ग्रीन पार्क, सुपर सिटी, कुशीनगर, हरूनगला में प्राइवेट कालोनियां बसाने वाले बिल्डरों ने अपनी कालोनियों के नाले और सीवर का मुंह नदी में ही खोल रखा है। पुराना शहर में सैलानी, गुलाबबाड़ी, जगतपुर, कांकरटोला, जोगी नवादा के नालों का गंदा पानी भी नदी की ओर निकाला गया है। औसतन 25 हजार से ज्यादा घरों का गंदा पानी इस समय नकटिया नदी में पहुंच रहा है। इससे नदी नाले में तब्दील होती नजर आ रही है। नकटिया नदी के पानी में आर्सेनिक, गंधक, टीडीएस, क्लोराइड, हार्डनेस, सल्फेट, नाइट्रेट, फ्लोराइड, अल्केनिटी, टर्बिडिटी, बैक्टीरिया, पीएच आदि की मात्रा सामान्य से तीन से चार गुना तक बढ़ चुकी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की लैब में अधिकांश पैरामटर्स नापने के उपकरण ही नहीं है। इसलिए पीसीबी का स्टाफ इधर उधर से साफ पानी के नमूने लेकर एक या दो पैरामीटर्स का परीक्षण नकटिया नदी के नाम से कराकर मामूली प्रदूषण होने की रिपोर्ट भेज देता है। जमीन पर अनाधिकृत कब्जे होने से कैंट समेत कई स्थानों पर नदी विलुप्त होने के कगार पर है।
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नहीं लगा सीवर ट्रीटमेंट प्लांट
पार्षद सुनीता यादव के पति रजनीश यादव का कहना है कि नकटिया नदी में नाले गिरने से रोकने के लिए उन्होंने मेयर डा. आईएस तोमर को लिखकर दिया था। उस समय मेयर ने सीवर ट्रीटमेंट लगवाने और नालों का पानी कहीं और डायवर्ट कराने का वादा किया था। बाद में इस पर कोई काम नहीं किया। सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगता तो नदी को प्रदूषित होने से बचाया जा सकता था।
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नकटिया नदी की खबर में वर्जन
‘सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का प्रस्ताव अमृत योजना में भेजा जा चुका है। शासन से बजट मिलने के बाद इस संबंध में एसटीपी लगवाने का काम शुरू कराएंगे। तब तक नालों का पानी कहीं और जाने की गुंजाइश ही नहीं है।’ डा. आईएस तोमर, मेयर