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Bareilly News: असफल विद्यार्थियों को एक ही कक्षा में रोकने का फैसला सही, सुधरेगी शैक्षिक स्थिति
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शिक्षा मंत्रालय के नए नियम को अभिभावकों व शिक्षकों ने सराहा
बरेली। शिक्षा मंत्रालय के असफल होने पर पांचवीं और आठवीं के विद्यार्थियों को एक ही कक्षा में रोकने और दो माह बाद फिर से परीक्षा में शामिल होेने का अवसर देने के फैसले को अभिभावकों व शिक्षकों ने सराहा है। कहा कि इससे शैक्षिक स्थिति में सुधार होगा।
सीबीएसई के जिला समन्वयक वीके मिश्रा के अनुसार विद्यार्थी फेल होते हैं, यह कहना गलत है। विद्यार्थी दोबारा पढ़ाई करते हुए खुद में सुधार करते हैं। पांचवीं-आठवीं के संबंध में लिया गया फैसला सीबीएसई विद्यालयों पर प्रभाव नहीं डालेगा। उन स्कूलों को सुधार करना होगा, जहां विद्यार्थियों की शैक्षिक स्थिति का आकलन नहीं किया जाता है।
कई बार अभिभावक भी चाहते थे कि उनके बच्चे को दोबारा उसी कक्षा में पढ़ाकर उसका शैक्षिक स्तर सुधारा जाए। सबसे अच्छी बात यह है कि जो बच्चा अगली कक्षा में नहीं पहुंच सका, उसे दो महीने बाद दोबारा परीक्षा देने का अवसर मिलेगा। इससे उन विद्यार्थियों को भी लाभ होगा, जोकि परीक्षा के दौरान बीमार या अन्य आपात स्थिति का सामना कर रहे होते थे।
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अभिभावक का भी होगा मार्गदर्शन
नए नियम के अनुसार विद्यार्थी को एक कक्षा में रोकने के दौरान शिक्षक विद्यार्थी के साथ जरूरी होने पर अभिभावक का भी मार्गदर्शन करेंगे। विद्यालय प्रमुख उन विद्यार्थियों की सूची बनाएंगे जो रोके गए हैं। किसी भी विद्यार्थी को तब तक किसी स्कूल से नहीं निकाला जाएगा, जब तक प्रारंभिक शिक्षा पूरी नहीं हो जाती।
यह निर्णय विद्यार्थियों की शैक्षिक स्थिति में सुधार लाएगा। अब तक नियम के कारण सभी विद्यार्थियों को अनिवार्य रूप से उत्तीर्ण किया जा रहा था। इससे जरूरत होेने पर भी विद्यार्थी खुद का मूल्यांकन नहीं कर पा रहा था। -निर्भय बेनीवाल, अध्यक्ष, इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन
यह नियम बिल्कुल सही है। अनिवार्य रूप से उत्तीर्ण करने के कारण विद्यार्थी का शैक्षिक स्तर प्रभावित हो रहा था। नए नियम से विद्यार्थियों को जिम्मेदारी का एहसास होगा, जो अभी नहीं है। अभिभावक भी इसका समर्थन करते है।- अंकुर सक्सेना, जिलाध्यक्ष, अभिभावक संघ
संवाद
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बरेली। शिक्षा मंत्रालय के असफल होने पर पांचवीं और आठवीं के विद्यार्थियों को एक ही कक्षा में रोकने और दो माह बाद फिर से परीक्षा में शामिल होेने का अवसर देने के फैसले को अभिभावकों व शिक्षकों ने सराहा है। कहा कि इससे शैक्षिक स्थिति में सुधार होगा।
सीबीएसई के जिला समन्वयक वीके मिश्रा के अनुसार विद्यार्थी फेल होते हैं, यह कहना गलत है। विद्यार्थी दोबारा पढ़ाई करते हुए खुद में सुधार करते हैं। पांचवीं-आठवीं के संबंध में लिया गया फैसला सीबीएसई विद्यालयों पर प्रभाव नहीं डालेगा। उन स्कूलों को सुधार करना होगा, जहां विद्यार्थियों की शैक्षिक स्थिति का आकलन नहीं किया जाता है।
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कई बार अभिभावक भी चाहते थे कि उनके बच्चे को दोबारा उसी कक्षा में पढ़ाकर उसका शैक्षिक स्तर सुधारा जाए। सबसे अच्छी बात यह है कि जो बच्चा अगली कक्षा में नहीं पहुंच सका, उसे दो महीने बाद दोबारा परीक्षा देने का अवसर मिलेगा। इससे उन विद्यार्थियों को भी लाभ होगा, जोकि परीक्षा के दौरान बीमार या अन्य आपात स्थिति का सामना कर रहे होते थे।
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अभिभावक का भी होगा मार्गदर्शन
नए नियम के अनुसार विद्यार्थी को एक कक्षा में रोकने के दौरान शिक्षक विद्यार्थी के साथ जरूरी होने पर अभिभावक का भी मार्गदर्शन करेंगे। विद्यालय प्रमुख उन विद्यार्थियों की सूची बनाएंगे जो रोके गए हैं। किसी भी विद्यार्थी को तब तक किसी स्कूल से नहीं निकाला जाएगा, जब तक प्रारंभिक शिक्षा पूरी नहीं हो जाती।
यह निर्णय विद्यार्थियों की शैक्षिक स्थिति में सुधार लाएगा। अब तक नियम के कारण सभी विद्यार्थियों को अनिवार्य रूप से उत्तीर्ण किया जा रहा था। इससे जरूरत होेने पर भी विद्यार्थी खुद का मूल्यांकन नहीं कर पा रहा था। -निर्भय बेनीवाल, अध्यक्ष, इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन
यह नियम बिल्कुल सही है। अनिवार्य रूप से उत्तीर्ण करने के कारण विद्यार्थी का शैक्षिक स्तर प्रभावित हो रहा था। नए नियम से विद्यार्थियों को जिम्मेदारी का एहसास होगा, जो अभी नहीं है। अभिभावक भी इसका समर्थन करते है।- अंकुर सक्सेना, जिलाध्यक्ष, अभिभावक संघ
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