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रेंबो और फैंटम का जुर्म कुछ भी नहीं और सजा उम्रकैद की

Fri, 05 Feb 2021 01:40 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 05 Feb 2021 01:40 AM IST
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The crime of Rainbow and Phantom is nothing and punishment for life imprisonment
फैंटम। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

वर्ष 2012 में शाहजहांपुर की कटरी में बदमाशों से बरामद हुए थे दोनों घोड़े
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इसके बाद से ही पुलिस लाइन की अश्वशाला में कैद हैं दोनों

बरेली। क्या आपने कभी सुना है कि जुर्म आदमी ने किया हो और उसकी सजा बेजुबान जानवर को भुगतनी पड़ी हो, लेकिन यहां रेंबो और फैंटम के साथ ऐसा ही हो रहा है। रेंबो और फैंटम उन घोड़ों के नाम हैं जो आठ साल से पुलिस लाइन की अश्वशाला में कैद हैं। इनका दोष सिर्फ इतना है कि इनके मालिक बदमाश थे।
दिसंबर, 2012 में शाहजहांपुर की बंडा थाना पुलिस ने दो बदमाशों को पकड़ा था। इनमें से एक रामफल पीलीभीत के सेहरामऊ उत्तरी क्षेत्र का रहने वाला था, जबकि दूसरा विनोद यादव कासगंज के पटियाली थानाक्षेत्र के खजुआ गांव का था। दोनों के पास से पुलिस ने घोड़ेे रेम्बो और फैंटम बरामद किए थे। पुलिस ने रामफल और विनोद को तो जेल भेज दिया, लेकिन रेम्बे और फैंटम को लेकर यह पेच फंस गया कि आखिर इनका क्या किया जाए। तत्कालीन डीआईजी एलवी एंटनी देवकुमार ने दोनों को शाहजहांपुर से बरेली पुलिस लाइन भेजने का आदेश दिया। तब से आज तक रेंबो और फैंटम बरेली पुलिस लाइन की अश्वशाला में कैद हैं। इनके यहां से छूटने की उम्मीद भी नहीं है। इनके खाने-पीने और रख-रखाव की जिम्मेदारी पुलिस की है। अपने मालिकों के गुनाहों की सजा रेंबो और फैंटम भुगत रहे हैं। अब यह आजीवन यहीं रहेंगे।
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पुलिस गश्त में भी नहीं कर सकती इनका इस्तेमाल

रेंबो और फैंटम की सेहत जबरदस्त है। वह पुलिस के दूसरे घोड़ों से किसी मायने में कम नहीं है। इनमें फैंटम काफी तगड़ा है। दौड़ में भी दोनों अच्छों-अच्छों को फेल करने का माद्दा रखते हैं, लेकिन नियमानुसार दोनों का गश्त ही नहीं किसी भी सरकारी काम में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। लिहाजा दोनों पुलिस लाइन की अश्वशाला में ही अपना जीवन गुजार रहे हैं। कभी-कभार उन्हें पुलिस लाइन मैदान का चक्कर जरूर लगवा दिया जाता है।
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एक घोड़े पर आता है 10 हजार महीने का खर्चा

एसआई (घुड़सवार पुलिस) भगवती प्रसाद ने बताया कि घोड़ों का पूरा ख्याल रखा जाता है। घोड़ों को सुबह नाश्ता और फिर दोपहर और शाम को खाना दिया जाता है। दिन में घोड़ों को एक किलो चना, दो किलो दला हुआ जौ, एक किलो चोकर, 30 ग्राम नमक और 15 किलो सूखी घास खाने में दी जाती है। इस तरह एक घोड़े पर प्रतिमाह करीब 10 हजार रुपये खर्च होते हैं। इसके अलावा अगर किसी की तबीयत खराब होती है तो उसका इलाज भी कराया जाता है।
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