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Bareilly News: साढ़े बाहर करोड़ का मुआवजा घटकर दो करोड़ भी न बचा

Fri, 29 Nov 2024 02:33 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 29 Nov 2024 02:33 AM IST
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The compensation of Rs 1.5 crore was reduced to not even Rs 2 crore left.
बरेली। रिंग रोड के लिए सरनिया स्थित गाटा संख्या 156 का मुआवजा पहले 12.50 करो़ड़ रुपये तय किया गया। भुगतान से पहले एनएचएआई ने आर्बिट्रेशन दाखिल कर दिया। आर्बिट्रेटर डीएम रविंद्र कुमार ने अब नया आदेश कर मुआवजा तय कर दिया है, जो कि दो करोड़ रुपये से भी कम है। एनएचआई दिल्ली की टीम ने यह गड़बड़ी पकड़ी थी। बाद में सीडीओ की जांच में भी इसकी पुष्टि हुई थी।
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एनएचएआई बनाम मोहम्मद शाहिद निवासी सरनिया मामले में दाखिल आर्बिट्रेशन पर फैसला आया है। गाटा संख्या 156 की 0.6053 हेक्टेयर भूूमि और इसकी परिसंपत्तियों के बदले 12.49 करोड़ रुपये मूल्यांकन किया गया था। मूल्यांकन करने वाले तत्कालीन अधिकारियों, कर्मचारियों और एनएचएआई की ओर से नामित निजी एजेंसी ने इस भूमि को अकृषि माना था, लेकिन एनएचएआई के परियोजना निदेशक ने अपने आर्बिट्रेशन में इसे कृषि भूमि बताया।
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दोनों पक्षों को सुनने के बाद जिलाधिकारी ने कृषि भूमि के सर्किल रेट को आधार बनाकर मूल्यांकन करने के आदेश दिया। वहीं परिसंपत्तियों में बाउंड्री और पेड़ों को ही माना है। इसके बाद आर्बिट्रेटर ने 6 जुलाई 2023 को घोषित अवाॅर्ड में संशोधन करते हुए 1.72 करोड़ रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। इसमें 1.71 करोड़ भूमि का और 1.57 लाख रुपये बाउंड्री और पेड़ों का है।
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इतना कम मुआवजा मंजूर नहीं
मोहम्मद शाहिद की ओर से उनके बेटे मोहम्मद शोएब ने कहा कि सरनिया में जहां जमीन का रेट 15 हजार रुपये प्रति वर्गगज है, वहां हमारे लिए सिर्फ 1800 रुपये प्रति वर्गगज की दर से मुआवजा तय किया गया। जमीन अकृषि है और हमारे पास इसका साक्ष्य है। अगर भूमि को अकृषि मानकर स्टांप ड्यूटी ली जा रही तो कृषि भूमि मानकर मुआवजा कैसे दिया जा सकता है? जो गोदाम बने थे, उनका मुआवजा शून्य कर दिया गया है। इस मामले में हमें सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतजार है। अमर उजाला ब्यूरो
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