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सीओ ने लाठियां चलवाईं और फिर एसपी सिटी ने भी धमकाया.. बेकाबू हो गई भीड़

Wed, 21 Oct 2020 02:09 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 21 Oct 2020 02:09 AM IST
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The CO started lathis and then SPCity also threatened .. Uncontrolled crowd...
थाने में प्रदर्शन करते हिंदूवादी नेता। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

अफसरों की अदूरदर्शिता ने पुलिस की कार्रवाई पर भी पानी फेरा, डीआईजी और एडीजी के पहुंचने के बाद काबू में आए हालात

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बरेली। जिस तरह हाथरस कांड में अफसरों पर संवेदनशील होते हालात को भांपने में चूक करने के आरोप लगे थे, ऐन उसी तरह की चूक किला इलाके में लड़की के अपहरण के मामले में अफसर कर बैठे। मंगलवार को थाने में बवाल के बाद महकमे के आला अफसरों की सबसे ज्यादा झुंझलाहट इस बात पर थी कि किला पुलिस ने लड़की की बरामदगी के लिए लगातार कोशिश करने के बाद भी उसके परिवार को विश्वास में नहीं लिया। उल्टे थाने में हंगामा हुआ तो हालात की संवेदनशीलता को भांपने के बजाय सीओ ने जल्दबाजी में भीड़ पर लाठियां चलवा दीं। हनक दिखाने के आदी एसपी सिटी ने भीड़ को धमकाकर बात और बढ़ा दी।
अफसरों का कहना है कि लड़की के पिता की तहरीर पर नामजद किए गए सभी छह लोगों के खिलाफ 17 अक्तूबर को फौरन रिपोर्ट दर्ज कर उनके नंबर सर्विलांस पर लगवा दिए थे। अगले ही दिन एसएसपी ने खुद एक टीम हल्द्वानी हल्द्वानी भेजी थी। फिर मुरादाबाद के रास्ते उनके दिल्ली जाने का पता लगा तो दो टीमें वहां भेजी गईं। पुलिस टीमें वहां होटलों और दूसरे स्थानों पर लगातार उनकी तलाश कर रही हैं। लेकिन इस सबके बाद भी थाने की पुलिस ने पीड़ित पक्ष को इस पूरी कवादय की कोई जानकारी नहीं दी। दो समुदायों के बीच का मामला होने के कारण नेतागिरी शुरू हुई तब भी थाने और सर्किल के अधिकारियों ने उस पर ध्यान देने की जरूरत नहीं समझी।
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इसी वजह से पीड़ित पक्ष को यह महसूस होने लगा कि पुलिस इस मामले पर ध्यान नहीं दे रही है। वे चाहते थे कि पुलिस कुछ ऐसा करे कि आरोपी पक्ष तत्काल लड़की को बरामद करा दे। इसके लिए पुलिस पर दबाव बनाने को ही हिंदूवादी संगठनों के लोग थाना किला पहुंचे थे। बातचीत के बीच भीड़ में शामिल लड़कों ने हंगामा किया तो थाने में मौजूद अधिकारियों ने जल्दबाजी में लाठीचार्ज का फरमान सुना दिया। लाठीचार्ज में बजरंग दल के आईटी सेल प्रमुख करन दीवान, विद्यार्थी प्रमुख केशव और गजेंद्र तोमर समेत सात लोगों के घायल होने के बाद मामला पुलिस के काबू से बाहर हो गया।
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बवाल के बीच पहुंचे एसपी सिटी ने बात संभालने के बजाय और बिगाड़ी

एसपी सिटी रविंद्र कुमार की कड़कमिजाजी से भी हालात और बिगड़े। वह थाने में हंगामे की सूचना पर पहुंचे थे और पहुंचते ही माइक हाथ में लेकर यह कहते हुए भीड़ को चेतावनी देनी शुरू कर दी कि थाने में हंगामा और तोड़फोड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। एसपी सिटी के अंदाज से लोगों का गुस्सा और भड़क गया। पुलिस पर गुंडागर्दी करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने नारेबाजी और तेज कर दी। भीड़ का गुस्सा इतना ज्यादा था कि उसने एसपी सिटी की तरफ बढ़ना शुरू कर दिया तब कहीं वह मौके की नजाकत समझ पाए और फिर अंदर चले गए। सीओ टू और इंस्पेक्टर इससे पहले ही जाकर केबिन में बैठ गए थे। भीड़ ने इन सभी अधिकारियों के नाम लेकर जमकर नारे लगाए।

तहसील दिवस छोड़कर भागे एडीजी डीआईजी, डीएम और एसएसपी

डीआईजी, कमिश्नर, डीएम व एसएसपी फरीदपुर के तहसील समाधान दिवस में गए हुए थे। वहां उन्हें किला थाने में हालात बेकाबू होने का पता चला तो तहसील दिवस छोड़कर शहर की ओर रवाना हुए। डीआईजी ने एडीजी को भी घटनाक्रम की जानकारी दी। सभी अधिकारी साढ़े तीन बजे किला थाने आ गए। यहां डीआईजी ने माइक पकड़कर भीड़ से कहा कि वह उन लोगों की शिकायत दूर करने आए हैं। कुछ लोगों को कक्ष में बुलाकर बात करेंगे। जनता की बात मानी जाएगी। कक्ष में घुसने को लेकर भी नेताओं में बहस हो गई। इसके बाद कुछ और नेता भी अंदर बुला लिए गए।

मुख्यमंत्री तक पहुंचा मामला, नेता भी पहुंचे

किला थाने में हिंदूवादी संगठनों के हंगामे की जानकारी सीएम और डीजीपी दफ्तर तक पहुंची तो पुलिस प्रशासन हिल गया और तमाम अधिकारी मौके पर आकर लखनऊ अपडेट देने लगे। इसके साथ राजनैतिक लोग भी यहां पहुंचने लगे। मेयर उमेश गौतम, शहर विधायक अरुण कुमार, बिथरी विधायक राजेश मिश्रा, गुलशन आनंद समेत कई नेता मौके पर आ गए। कई बार अधिकारियों के बोलने से पहले नेता ही माइक हाथ में लेकर अनाउंस करने लगे।

लड़की का वीडियो वायरल होने पर भड़का गुस्सा

हालात तब गरमाए जब दो दिन पहले लड़की ने एक वीडियो वायरल किया जिसमें उसने एसपी सिटी से गुहार की कि बिलाल के साथ वह अपनी मर्जी से आई है। उसने शादी कर ली है। बिलाल के घरवालों को परेशान न किया जाए। इस वीडियो में कोई शख्स उसे पीछे से सिखाता हुआ लग रहा है। इसके बाद पीड़ित पक्ष का पुलिस पर भरोसा डगमगाने लगा।

सीओ, इंस्पेक्टर और पुलिस की भूमिका की होगी जांच

डीआईजी के आदेश पर एसएसपी ने सीओ टू, इंस्पेक्टर व लाठीचार्ज करने वाली पुलिस की भूमिका की जांच एसपी देहात को दी है। वह तय करेंगे कि लाठीचार्ज करना सही निर्णय था या गलत। इसके आधार पर ही कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा। सीओ टू आईपीएस अधिकारी हैं मगर वरिष्ठता के आधार पर एसपी देहात उनकी जांच करेंगे।

हंगामा करने वालों से मतलब नहीं: अरोरा

भाजपा के महानगर अध्यक्ष केएम अरोरा का कहना था कि भीड़ में पीड़ित पक्ष के साथ बस्ती के तमाम लोग कार्यकर्ताओं में शामिल हो गए थे। वे सिर्फ ज्ञापन देने आए थे पर कुछ लोगों ने कुर्सियां फेंकनी शुरू कर दीं। हंगामा करने वाले लोग कौन थे, वह नहीं जानते। पुलिस ऐसे लोगों को चिह्नित कर कार्रवाई करे, उन्हें दिक्कत नहीं होगी पर उनके सामने उनके निर्दोष कार्यकर्ताओं को पुलिस ने पीटा, वह गलत है। एसपी सिटी, सीओ टू, इंस्पेक्टर की कार्यशैली अच्छी नहीं रही। बड़े अफसर न आते तो और बात बिगड़ सकती थी।
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