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सीओ ने लाठियां चलवाईं और फिर एसपी सिटी ने भी धमकाया.. बेकाबू हो गई भीड़
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थाने में प्रदर्शन करते हिंदूवादी नेता।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अफसरों की अदूरदर्शिता ने पुलिस की कार्रवाई पर भी पानी फेरा, डीआईजी और एडीजी के पहुंचने के बाद काबू में आए हालात
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बरेली। जिस तरह हाथरस कांड में अफसरों पर संवेदनशील होते हालात को भांपने में चूक करने के आरोप लगे थे, ऐन उसी तरह की चूक किला इलाके में लड़की के अपहरण के मामले में अफसर कर बैठे। मंगलवार को थाने में बवाल के बाद महकमे के आला अफसरों की सबसे ज्यादा झुंझलाहट इस बात पर थी कि किला पुलिस ने लड़की की बरामदगी के लिए लगातार कोशिश करने के बाद भी उसके परिवार को विश्वास में नहीं लिया। उल्टे थाने में हंगामा हुआ तो हालात की संवेदनशीलता को भांपने के बजाय सीओ ने जल्दबाजी में भीड़ पर लाठियां चलवा दीं। हनक दिखाने के आदी एसपी सिटी ने भीड़ को धमकाकर बात और बढ़ा दी।
अफसरों का कहना है कि लड़की के पिता की तहरीर पर नामजद किए गए सभी छह लोगों के खिलाफ 17 अक्तूबर को फौरन रिपोर्ट दर्ज कर उनके नंबर सर्विलांस पर लगवा दिए थे। अगले ही दिन एसएसपी ने खुद एक टीम हल्द्वानी हल्द्वानी भेजी थी। फिर मुरादाबाद के रास्ते उनके दिल्ली जाने का पता लगा तो दो टीमें वहां भेजी गईं। पुलिस टीमें वहां होटलों और दूसरे स्थानों पर लगातार उनकी तलाश कर रही हैं। लेकिन इस सबके बाद भी थाने की पुलिस ने पीड़ित पक्ष को इस पूरी कवादय की कोई जानकारी नहीं दी। दो समुदायों के बीच का मामला होने के कारण नेतागिरी शुरू हुई तब भी थाने और सर्किल के अधिकारियों ने उस पर ध्यान देने की जरूरत नहीं समझी।
इसी वजह से पीड़ित पक्ष को यह महसूस होने लगा कि पुलिस इस मामले पर ध्यान नहीं दे रही है। वे चाहते थे कि पुलिस कुछ ऐसा करे कि आरोपी पक्ष तत्काल लड़की को बरामद करा दे। इसके लिए पुलिस पर दबाव बनाने को ही हिंदूवादी संगठनों के लोग थाना किला पहुंचे थे। बातचीत के बीच भीड़ में शामिल लड़कों ने हंगामा किया तो थाने में मौजूद अधिकारियों ने जल्दबाजी में लाठीचार्ज का फरमान सुना दिया। लाठीचार्ज में बजरंग दल के आईटी सेल प्रमुख करन दीवान, विद्यार्थी प्रमुख केशव और गजेंद्र तोमर समेत सात लोगों के घायल होने के बाद मामला पुलिस के काबू से बाहर हो गया।
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अफसरों का कहना है कि लड़की के पिता की तहरीर पर नामजद किए गए सभी छह लोगों के खिलाफ 17 अक्तूबर को फौरन रिपोर्ट दर्ज कर उनके नंबर सर्विलांस पर लगवा दिए थे। अगले ही दिन एसएसपी ने खुद एक टीम हल्द्वानी हल्द्वानी भेजी थी। फिर मुरादाबाद के रास्ते उनके दिल्ली जाने का पता लगा तो दो टीमें वहां भेजी गईं। पुलिस टीमें वहां होटलों और दूसरे स्थानों पर लगातार उनकी तलाश कर रही हैं। लेकिन इस सबके बाद भी थाने की पुलिस ने पीड़ित पक्ष को इस पूरी कवादय की कोई जानकारी नहीं दी। दो समुदायों के बीच का मामला होने के कारण नेतागिरी शुरू हुई तब भी थाने और सर्किल के अधिकारियों ने उस पर ध्यान देने की जरूरत नहीं समझी।
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इसी वजह से पीड़ित पक्ष को यह महसूस होने लगा कि पुलिस इस मामले पर ध्यान नहीं दे रही है। वे चाहते थे कि पुलिस कुछ ऐसा करे कि आरोपी पक्ष तत्काल लड़की को बरामद करा दे। इसके लिए पुलिस पर दबाव बनाने को ही हिंदूवादी संगठनों के लोग थाना किला पहुंचे थे। बातचीत के बीच भीड़ में शामिल लड़कों ने हंगामा किया तो थाने में मौजूद अधिकारियों ने जल्दबाजी में लाठीचार्ज का फरमान सुना दिया। लाठीचार्ज में बजरंग दल के आईटी सेल प्रमुख करन दीवान, विद्यार्थी प्रमुख केशव और गजेंद्र तोमर समेत सात लोगों के घायल होने के बाद मामला पुलिस के काबू से बाहर हो गया।
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