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Bareilly News: घंटाघर की घड़ी डेढ़ माह से खराब पड़ी
Mon, 04 May 2026 01:12 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Mon, 04 May 2026 01:12 AM IST
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बरेली की ऐतिहासिक पहचान और कुतुबखाना क्षेत्र की शान कहे जाने वाले घंटाघर की घड़ी डेढ़ माह से खराब पड़ी है। इसकी मरम्मत न होने से स्थानीय लोगों में रोष है। लोग खराब घड़ी का वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर नगर निगम पर शहर की ऐतिहासिक विरासत की अनदेखी करने का आरोप लगा रहे हैं।
सिकलापुर वार्ड के पार्षद जयप्रकाश ने रविवार को सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि करोड़ों रुपये खर्च कर शहर को स्मार्ट बनाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन मुख्य चौराहे पर लगी इस घड़ी को ठीक कराने की सुध लेने वाला कोई नहीं है। कुतुबखाना स्थित इस घंटाघर का निर्माण वर्ष 1975 में नगर निगम की ओर से कराया गया था।
महापौर उमेश गौतम की पहल पर स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत वर्ष 2021 में भारी बजट खर्च कर इसे संवारा गया और बंद पड़ी घड़ियों को दोबारा चालू किया गया था। अब ये फिर खराब हो गई हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सौंदर्यीकरण के नाम पर केवल रंग-रोगन और दिखावा किया गया। घंटाघर का मूल उद्देश्य अधूरा है। निगम की अनदेखी से शहर की प्रमुख पहचान धूमिल हो रही है।
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सिकलापुर वार्ड के पार्षद जयप्रकाश ने रविवार को सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि करोड़ों रुपये खर्च कर शहर को स्मार्ट बनाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन मुख्य चौराहे पर लगी इस घड़ी को ठीक कराने की सुध लेने वाला कोई नहीं है। कुतुबखाना स्थित इस घंटाघर का निर्माण वर्ष 1975 में नगर निगम की ओर से कराया गया था।
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महापौर उमेश गौतम की पहल पर स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत वर्ष 2021 में भारी बजट खर्च कर इसे संवारा गया और बंद पड़ी घड़ियों को दोबारा चालू किया गया था। अब ये फिर खराब हो गई हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सौंदर्यीकरण के नाम पर केवल रंग-रोगन और दिखावा किया गया। घंटाघर का मूल उद्देश्य अधूरा है। निगम की अनदेखी से शहर की प्रमुख पहचान धूमिल हो रही है।
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