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शहर में अब राजेश अग्रवाल होंगे सपा के योद्धा
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Sun, 11 Dec 2016 01:25 AM IST
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The city will now SP Rajesh Agarwal warrior
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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सपा में चाचा भतीजे के अंदरूनी लड़ाई का असर विधानसभा चुनाव के टिकट वितरण पर साफ दिखने लगा है। सपा की 123 प्रत्याशियों की सूची में बरेली शहर सीट से अब नगर निगम पार्षद दल नेता राजेश अग्रवाल सपा के प्रत्याशी हो गए हैं। राजेश अग्रवाल को प्रत्याशी बनवाने और मीरगंज से गुड्डू का टिकट कटवाने के स्थानीय नेता की सिफारिश मानी जा रही है। इस बदलाव से अखिलेश समर्थकों में नाराजगी है। हाजी गुड्डू ने इस निर्णय पर खुल कर विरोध भी जता दिया है। मीरगंज में नए और पुराने प्रत्याशी में जुबानी जंग भी शुरू हो गई है। इधर चर्चा है कि अभी कुछ और के टिकट बदल सकते हैं इनमें दो वर्तमान विधायक भी हैं हालांकि ये दोनों ही पार्टी के दोनों खेमों को साधने में लगे हैं।
शेर अली जाफरी के हाथ खड़े करने के बाद से यहां प्रत्याशी की तलाश थी। मेयर डॉ. आईएस तोमर, सपा के पूर्व प्रदेश सचिव डॉ. अनिल शर्मा और महानगर अध्यक्ष जफर बेग, डॉ सत्येंद्र समेत समेत छह से ज्यादा दावेदार माने जा रहे थे। हालांकि महापौर और डॉ. अनिल शर्मा खुले तौर पर लगातार चुनाव लड़ने से इनकार करते रहे हैं। अखिलेश यादव के समर्थक माने जाने वाले शीशगढ़ चेयरमैन और मीरगंज से प्रत्याशी जाहिद हुसैन उर्फ हाजी गुड्डू का टिकट काट दिया गया है। प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने मंडलीय रैली से 24 घंटे पहले प्रेस वार्ता में कमजोर प्रत्याशियों के टिकट काटने के संकेत दिए थे। तीसरे दिन ही बरेली और मीरगंज विधान सभा क्षेत्रों से प्रत्याशियों के टिकट बदले गए हैं। शेर अली जाफरी ने अपने लिए शहर सीट कमजोर बताकर भोजीपुरा से चुनाव लड़ने की बात कहते हुए पार्टी का टिकट वापस कर दिया था। उधर मीरगंज से जाहिद हुसैन गुड्डू उर्फ हाजी गुड्डू चुनाव प्रचार भी कर रहे थे। उनका टिकट काटकर हाल ही में पार्टी जिला उपाध्यक्ष बनाए गए पूर्व एमएलए शराफत यार खां को मीरगंज से टिकट दिया गया है। शराफत यार खां 1993 में एमएलए रहे थे। इंटरमीडिएट तक शिक्षित शराफत यार के पिता मिसर यार खां 1994 में बरेली से सांसद थे।
अपने-अपने दावे
मुझे टिकट दिलाने में जिलाध्यक्ष जी का सहयोग रहा। अब मैं पूरी दमखम से चुनाव लड़ूंगा और भाजपा को हराकर शहर सीट पर सपा के खाते में डालूंगा।
-राजेश अग्रवाल, सपा प्रत्याशी शहर
पार्टी का निर्णय स्वीकार है लेकिन जिन्हें प्रत्याशी बनाया गया है उन्हें एमएलसी चुनाव में मात्र 31 सौ वोट मिले थे। वह बरेली के रहने वाले भी नहीं हैं। तीन बार पार्टी छोड़ चुके हैं। अखिलेश वादियों को नीचा दिखाया जा रहा है।
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-जाहिद हुसैन उर्फ हाजी गुड्डू, पूर्व प्रत्याशी सपा, मीरगंज
मेरा खानदान राजनीतिक रहा है। हाजी गुड्डू का कोई राजनीतिक भविष्य नहीं है। सपा लहर में वह 26 हजार वोटों से हारकर तीसरे नंबर पर रहे थे। टिकट के लिए पार्टी ने जो सर्वे कराया था, उसमें पाया गया कि वह अवैध पशु कटान से लेकर कोटेदारों से वसूली, थानों में दलाली करते हैं। पैसे लेकर जनता के काम कराते हैं।
-शराफत यार खां, सपा प्रत्याशी मीरगंज
सर्वे में परखी जा रही है निष्ठा भी
बरेली। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की मंडलीय रैली में प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह ने बताया था कि पार्टी के सर्वे के आधार पर जिताऊ और टिकाऊ ही चुनाव मैदान में रहेंगे। बरेली जिले में हुए दो बदलावों से जाहिर है कि इस सर्वे में पार्टी के सांगठनिक नेतृत्व के प्रति निष्ठा भी देखी जा रही है। अखिलेशवादी नेताओं को रैली में बोलने का मौका न देकर संदेश साफ कर दिया गया था। सपा लहर में पिछली बार ही मात्र 18 वोटों से चुनाव जीते अताउर रहमान, आईएमसी से जीत कर सपा में शामिल हुए शहजिल खतरे में बताए जा रहे हैं। पांच बार के विधायक भगवतसरन हालांकि सपा के सबसे दमदार प्रत्याशी बताए जाते हैं लेकिन प्रदेश अध्यक्ष से नजदीकियों की वजह से शहला ताहिर उनकी जगह मैदान में उतरने को आतुर हैं।
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शेर अली जाफरी के हाथ खड़े करने के बाद से यहां प्रत्याशी की तलाश थी। मेयर डॉ. आईएस तोमर, सपा के पूर्व प्रदेश सचिव डॉ. अनिल शर्मा और महानगर अध्यक्ष जफर बेग, डॉ सत्येंद्र समेत समेत छह से ज्यादा दावेदार माने जा रहे थे। हालांकि महापौर और डॉ. अनिल शर्मा खुले तौर पर लगातार चुनाव लड़ने से इनकार करते रहे हैं। अखिलेश यादव के समर्थक माने जाने वाले शीशगढ़ चेयरमैन और मीरगंज से प्रत्याशी जाहिद हुसैन उर्फ हाजी गुड्डू का टिकट काट दिया गया है। प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने मंडलीय रैली से 24 घंटे पहले प्रेस वार्ता में कमजोर प्रत्याशियों के टिकट काटने के संकेत दिए थे। तीसरे दिन ही बरेली और मीरगंज विधान सभा क्षेत्रों से प्रत्याशियों के टिकट बदले गए हैं। शेर अली जाफरी ने अपने लिए शहर सीट कमजोर बताकर भोजीपुरा से चुनाव लड़ने की बात कहते हुए पार्टी का टिकट वापस कर दिया था। उधर मीरगंज से जाहिद हुसैन गुड्डू उर्फ हाजी गुड्डू चुनाव प्रचार भी कर रहे थे। उनका टिकट काटकर हाल ही में पार्टी जिला उपाध्यक्ष बनाए गए पूर्व एमएलए शराफत यार खां को मीरगंज से टिकट दिया गया है। शराफत यार खां 1993 में एमएलए रहे थे। इंटरमीडिएट तक शिक्षित शराफत यार के पिता मिसर यार खां 1994 में बरेली से सांसद थे।
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अपने-अपने दावे
मुझे टिकट दिलाने में जिलाध्यक्ष जी का सहयोग रहा। अब मैं पूरी दमखम से चुनाव लड़ूंगा और भाजपा को हराकर शहर सीट पर सपा के खाते में डालूंगा।
-राजेश अग्रवाल, सपा प्रत्याशी शहर
पार्टी का निर्णय स्वीकार है लेकिन जिन्हें प्रत्याशी बनाया गया है उन्हें एमएलसी चुनाव में मात्र 31 सौ वोट मिले थे। वह बरेली के रहने वाले भी नहीं हैं। तीन बार पार्टी छोड़ चुके हैं। अखिलेश वादियों को नीचा दिखाया जा रहा है।
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-जाहिद हुसैन उर्फ हाजी गुड्डू, पूर्व प्रत्याशी सपा, मीरगंज
मेरा खानदान राजनीतिक रहा है। हाजी गुड्डू का कोई राजनीतिक भविष्य नहीं है। सपा लहर में वह 26 हजार वोटों से हारकर तीसरे नंबर पर रहे थे। टिकट के लिए पार्टी ने जो सर्वे कराया था, उसमें पाया गया कि वह अवैध पशु कटान से लेकर कोटेदारों से वसूली, थानों में दलाली करते हैं। पैसे लेकर जनता के काम कराते हैं।
-शराफत यार खां, सपा प्रत्याशी मीरगंज
सर्वे में परखी जा रही है निष्ठा भी
बरेली। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की मंडलीय रैली में प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह ने बताया था कि पार्टी के सर्वे के आधार पर जिताऊ और टिकाऊ ही चुनाव मैदान में रहेंगे। बरेली जिले में हुए दो बदलावों से जाहिर है कि इस सर्वे में पार्टी के सांगठनिक नेतृत्व के प्रति निष्ठा भी देखी जा रही है। अखिलेशवादी नेताओं को रैली में बोलने का मौका न देकर संदेश साफ कर दिया गया था। सपा लहर में पिछली बार ही मात्र 18 वोटों से चुनाव जीते अताउर रहमान, आईएमसी से जीत कर सपा में शामिल हुए शहजिल खतरे में बताए जा रहे हैं। पांच बार के विधायक भगवतसरन हालांकि सपा के सबसे दमदार प्रत्याशी बताए जाते हैं लेकिन प्रदेश अध्यक्ष से नजदीकियों की वजह से शहला ताहिर उनकी जगह मैदान में उतरने को आतुर हैं।