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Bareilly News: जलवायु परिवर्तन की चुनौती, हरियाणा और पंजाब में घट रहीं भैंसें

Tue, 16 Dec 2025 01:24 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 16 Dec 2025 01:24 AM IST
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The challenge of climate change: Buffaloes are declining in Haryana and Punjab.
बरेली। भैंस आधारित पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, पर जलवायु परिवर्तन से काला सोना कही जाने वाली भैंसों की संख्या घट रही है। ऊष्मा तनाव, प्रजनन और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण हरियाणा, पंजाब में इनकी संख्या में कमी चिंताजनक है। इस विषय पर अनुसंधान जरूरी है।
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सोमवार को इंडियन सोसायटी फॉर बफैलो डेवलपमेंट (आईएसबीडी) की ओर से भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान इज्जतनगर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में ये जानकारी आईसीएआर के पूर्व महानिदेशक डॉ. केएम पाठक ने दी। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2012 में हरियाणा में 57.64 लाख व पंजाब में 57.64 लाख भैंसें थीं। वर्ष 2019 तक क्रमवार यह संख्या घटकर 43.76 लाख और 40.15 लाख रह गई थी। वर्ष 2025 में इनकी संख्या में करीब छह लाख और गिरावट का अनुमान है।
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डॉ. पाठक ने कहा कि जलवायु परिवर्तन इसकी प्रमुख वजह है। भैंस अत्यंत संवेदनशील पशु है। इसलिए अनुसंधान, नीति और प्रसार सेवाओं में समन्वित प्रयास आवश्यक हैं, ताकि सकल घरेलू उत्पाद में योगदान बढ़े।
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दुग्ध उत्पादन में भैंसों का योगदान 50 फीसदी
डॉ. पाठक ने बताया कि देश के दुग्ध उत्पादन में भैंस का योगदान 50 फीसदी से ज्यादा है। भैंस का दूध ए2 श्रेणी का यानी शुद्ध और पौष्टिक होता है। इसलिए अब जलवायु सहिष्णु भैंस का विकास जरूरी है। उन्होंने ऐसी नस्ल पर जोर दिया जो बढ़ते तापमान के सापेक्ष अनुकूलन में सक्षम हों। आंध्र प्रदेश के प्रगतिशील भैंस पालक राजीव को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड दिया गया। यहां डॉ. अंशुक शर्मा, डॉ. मीमांशा शर्मा, डॉ. हरी अब्दुल समद समेत अन्य वैज्ञानिक और विद्यार्थी मौजूद रहे।


भैंस विकास के उन्नयन, क्षेत्र स्तर पर प्रभावी कार्य जरूरी
आईएसबीडी के अध्यक्ष एवं बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय पटना के कुलपति डॉ. इंद्रजीत सिंह ने भैंस विकास के लिए वैज्ञानिक प्रगति, क्षेत्र स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन के लिए शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, उद्योगों और किसानों के बीच मजबूत सहयोग पर जोर दिया। आईवीआरआई के निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने पशुओं को रोगमुक्त बनाने के लिए संस्थान के शोध और विकसित तकनीकी साझा की। आईएसबीडी के सचिव डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि इसमें विभिन्न विषयों कई राज्यों के करीब दो सौ प्रतिभागी मंथन करेंगे।
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