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2012 में हुई नियुक्ति में दो शिक्षक फर्जी निकले
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Tue, 12 Apr 2016 01:37 AM IST
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राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 2012 में नियुक्त किए गए दो शिक्षक फर्जी निकले हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय की स्नातक और बीएड की मार्कशीट वेरीफिकेशन में फर्जी निकली है। इन शिक्षकों को नोटिस भेजा गया है। इसके बाद इन पर एफआईआर दर्ज होगी।
2012 में राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बल्लिया में सर्वेश तिवारी की सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति हुई। इसी दौरान परौधी राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में कमल कांत की भी नियुक्ति की गई थी। इन दोनों ने ही स्नातक और बीएड लखनऊ विश्वविद्यालय से किया। इन दोनों ही सहायक अध्यापकों की मार्कशीट वैरीफिकेशन के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय भेजी गईं। पहली बार के वैरीफिकेशन में सही पाई गईं। दो साल इनके नौकरी करने के बाद इनकी मार्कशीट का फिर से लखनऊ विश्वविद्यालय से वेरीफिकेशन कराया गया तो फर्जी निकलीं। दरअसल, पहली बार हुए वैरीफिकेशन में कुछ खेल किया गया। विश्वविद्यालय को पत्र बिना भेजे ही वेरीफिकेशन करा दिया गया था। लेकिन दोबारा में यह गड़बड़ी पकड़ ली गई। मार्कशीट फर्जी निकलने के बाद इन शिक्षकों को नोटिस भेज दिया जाएगा। इनका पक्ष सुनने के बाद इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी और 2012 से अब तक मिले रुपये की भी रिकवरी होगी। इससे पहले 2012 में करनपुर राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बदायूं में नियुक्त किए गए शिक्षक की मार्कशीट भी फर्जी पाई गईं। इसके बाद इन पर एफआईआर दर्ज करा दी गई। अब यही कार्रवाई बाकी के शिक्षकों पर भी की जाएगी।
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2012 में राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बल्लिया में सर्वेश तिवारी की सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति हुई। इसी दौरान परौधी राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में कमल कांत की भी नियुक्ति की गई थी। इन दोनों ने ही स्नातक और बीएड लखनऊ विश्वविद्यालय से किया। इन दोनों ही सहायक अध्यापकों की मार्कशीट वैरीफिकेशन के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय भेजी गईं। पहली बार के वैरीफिकेशन में सही पाई गईं। दो साल इनके नौकरी करने के बाद इनकी मार्कशीट का फिर से लखनऊ विश्वविद्यालय से वेरीफिकेशन कराया गया तो फर्जी निकलीं। दरअसल, पहली बार हुए वैरीफिकेशन में कुछ खेल किया गया। विश्वविद्यालय को पत्र बिना भेजे ही वेरीफिकेशन करा दिया गया था। लेकिन दोबारा में यह गड़बड़ी पकड़ ली गई। मार्कशीट फर्जी निकलने के बाद इन शिक्षकों को नोटिस भेज दिया जाएगा। इनका पक्ष सुनने के बाद इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी और 2012 से अब तक मिले रुपये की भी रिकवरी होगी। इससे पहले 2012 में करनपुर राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बदायूं में नियुक्त किए गए शिक्षक की मार्कशीट भी फर्जी पाई गईं। इसके बाद इन पर एफआईआर दर्ज करा दी गई। अब यही कार्रवाई बाकी के शिक्षकों पर भी की जाएगी।
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