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Bareilly News: थाने में खड़ी दुर्घटनाग्रस्त बस की भी दिखाई थी मरम्मत, कई फर्जी बिलों को कराया पास

Fri, 30 May 2025 02:38 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 30 May 2025 02:38 AM IST
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The accidented bus parked in the police station was also shown to be repaired, many fake bills were passed
बरेली। रोडवेज बसों की मरम्मत में फर्जीवाड़ा इस कदर हावी रहा कि हादसे के बाद थाने में खड़ी बस में भी मरम्मत दिखाकर बिल पास कर दिए गए। डेढ़ सौ से ज्यादा बसों में गैरजरूरी काम दर्शाकर भुगतान कर दिया गया। नए का बिल पास करवाकर बसों में पुराना मोबिल डाला गया। इन फर्जीवाड़ों का खुलासा होने पर सेवा प्रबंधक के साथ ही लेखाधिकारी और तीन डिपो के एआरएम भी दोषी साबित हुए हैं।
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अमर उजाला में खबरें छपनी शुरू हुईं तो जिम्मेदार अफसर इस मामले को दबाने में लगे रहे। इन खबरों का मुख्यमंत्री ने संज्ञान लिया। शासन स्तर जांच के आदेश होने पर अधिकारी सक्रिय हुए। जांच के बाद दोषियों को चार्जशीट थमाने के साथ ही कार्रवाई भी कर दी गई। हालांकि, इसमें पांच माह का वक्त लग गया।
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फर्जीवाड़े का यह खेल काफी बड़ा है। अभी इसकी कई परतें खुलनी बाकी हैं। बसों की मरम्मत के लिए शिव भसीन नाम की जिस फर्म को जिम्मेदारी दी गई है, पहले उसकी दरों को महंगा बताकर टेंडर रद्द कर दिया गया था। बाद में उसी फर्म को पीलीभीत और बदायूं डिपो की बसों की मरम्मत संबंधी कार्यादेश जारी कर दिया गया। कम दरें दर्शाने वाली फर्म ममता इंटरप्राइजेज को सिर्फ एक डिपो का दिया गया। जांच में यह भी साफ हुआ कि ममता इंटरप्राइजेज ने भी बिलों में जमकर गड़बड़ी की। एसी बसों की मरम्मत को भी दर्शाया गया।
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अकुशल कर्मियों से करा रहे थे मरम्मत
नई बसों की मरम्मत अकुशल कर्मचारियों से कराए जाने का मामला प्रकाश में आया है। इससे नई बसों की भी हालत खस्ता होती जा रही थी। दरअसल, उन दिनों रोडवेज के बेड़े में बीएस-6 श्रेणी की नई बसें शामिल की गई थीं। इनकी मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी कंपनी की थी। इसके बाद भी वर्कशॉप में इन बसों के नाम पर बिल बनाए गए और उनको पास कराया गया। एक लाख किमी चली बस के टायर तीन बार बदलवाए गए। दो बसों में पुराना मोबिल ऑयल डालने का मामला भी सामने आया।



इन पर साबित हुए आरोप
इस मामले में घिरे बरेली डिपो के एआरएम संजीव श्रीवास्तव तीन माह पहले अपने तबादले की मांग कर चुके हैं। हालांकि, शासन स्तर से चल रही जांच के दौरान उनका तबादला नहीं हुआ। इस घपलेबाजी में शासन स्तर से गठित कमेटी ने एआरएम बरेली डिपो संजीव श्रीवास्तव, एआरएम रुहेलखंड रुहेलखंड डिपो अरुण कुमार वाजपेयी, एआरएम पीलीभीत पवन कुमार समेत बरेली डिपो के सीनियर फोरमैन दीपक जैन, रुहेलखंड डिपो के सीनियर फोरमैन दिनेश सिंह, पीलीभीत डिपो के सीनियर फोरमैन जुबैर को दोषी पाया है। लेखाकार ओमपाल सिंह, राजेश जयसवाल, मेवाराम गंगवार, बरेली डिपो के सहायक लेखाकार संतोष कुमार और सेवा प्रबंधक को भी भ्रष्टाचार का दोषी पाया गया है। संवाद
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