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थैंक्यू डॉक्टर, रानी को बचा लिया
बरेली
Updated Thu, 17 Dec 2015 01:45 AM IST
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बरेली। मीरगंज की 33 साल की रानी तीन घंटे के आपरेशन के बाद सकुशल है। शरीर पर गंडासे के 45 घाव थे, कलाई की हड्डियां तक कट गई थी, उंगलियां लटक गई थी। मंगलवार की रात जब आपरेशन टेबल पर थी तो न पल्स मिल रही थी और न वीपी ही ट्रेस हो रहा था। रानी की हिम्मत और डाक्टरों की मेहनत ने उसकी उखड़ती सांसे लौटा दी हैं। अब वह बातचीत भी कर रही है। इस जीवन को बचाने में इकबाल सिंह बाले और प्रशांत अग्रवाल की भी बड़ा योगदान रहा। रानी को सबसे पहले एबी पाजिटिव खून की जरूरत थी। एक यूनिट आईएमए और एक जिला अस्पताल से मिलने के बाद भी उसकी हालत नाजुक बनी हुई थी उसके बाद शहर के नामी रक्त दाता इकबाल सिंह बाले राजेंद्रनगर सेे एडवोकेट दिनेश कटियार को लेकर साढे़ 10 बजे अस्पताल पहुंचे जिन्होंने तुरंत रक्तदान कर उसको जीवनदान दिया।
प्रधानी चुनाव में दिल्ली से वोट डालने आई रानी के शरीर पर उसे पति ओमेंद्र ने गड़ासे से सिर से लेकर पांव तक 45 गहरे वार किए थे। अस्पताल में उसका कोई तीमारदार भी नहीं था। जिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. परवीन जहां ने बताया कि रानी को तुरंत इमरजेंसी ऑपरेशन के लिए ले जाया गया। पांच डॉक्टरों की टीम तैयार थी। रानी की न तो नब्ज रिकार्ड हो रही थी और न ही ब्लड प्रेशर। डॉ. शिवदत्ता और डॉ. आर्या ने बताया कि उसकी उंगली, कलाई बिलकुल लटकी थी। हाथ की हड्डी कट चुकी थी और सिर में भी गहरी चोट आई थी। पहले तो कोशिश रही कि प्राइमरी ऑपरेशन कर उसका खून बंद किया जाए। इसके बाद दूसरा आपरेशन हुआ। वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. डीपी शर्मा ने बताया कि रानी की जान बचाना मुश्किल था, लेकिन महिला की हिम्मत और डॉक्टरों की मेहनत काम आई।
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प्रधानी चुनाव में दिल्ली से वोट डालने आई रानी के शरीर पर उसे पति ओमेंद्र ने गड़ासे से सिर से लेकर पांव तक 45 गहरे वार किए थे। अस्पताल में उसका कोई तीमारदार भी नहीं था। जिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. परवीन जहां ने बताया कि रानी को तुरंत इमरजेंसी ऑपरेशन के लिए ले जाया गया। पांच डॉक्टरों की टीम तैयार थी। रानी की न तो नब्ज रिकार्ड हो रही थी और न ही ब्लड प्रेशर। डॉ. शिवदत्ता और डॉ. आर्या ने बताया कि उसकी उंगली, कलाई बिलकुल लटकी थी। हाथ की हड्डी कट चुकी थी और सिर में भी गहरी चोट आई थी। पहले तो कोशिश रही कि प्राइमरी ऑपरेशन कर उसका खून बंद किया जाए। इसके बाद दूसरा आपरेशन हुआ। वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. डीपी शर्मा ने बताया कि रानी की जान बचाना मुश्किल था, लेकिन महिला की हिम्मत और डॉक्टरों की मेहनत काम आई।
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