{"_id":"61bcea35a7c4df73f6063c69","slug":"ten-thousand-samples-of-kovid-were-not-investigated-but-the-report-was-released-bareilly-news-bly469534686","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोविड के दस हजार सैंपल की जांच ही नहीं हुई मगर रिपोर्ट जारी हो गई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोविड के दस हजार सैंपल की जांच ही नहीं हुई मगर रिपोर्ट जारी हो गई
विज्ञापन
demo photo
- फोटो : social media
स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने अपनी लापरवाही छिपाने के लिए किया हजारों लोगों की जिंदगी से गंभीर खिलवाड़
बरेली। कोविड मॉनिटरिंग रिपोर्ट के मुताबिक 17 दिसंबर तक जिले भर से 778768 लोगों के आरटीपीसीआर सैंपल लिए गए जिसमें से 776992 सैंपल की रिपोर्ट भी पोर्टल पर अपडेट कर दी गई। इन दोनों आंकड़ों में सिर्फ 1776 सैंपल का अंतर है लेकिन खुद सीएमओ कोविड अस्पताल में 11600 सैंपल बगैर जांच कराए बर्बाद कर दिए जाने की पुष्टि कर चुके हैं। इस पूरे गुणा-भाग से साफ जाहिर है कि 9824 कोविड सैंपल की फर्जी रिपोर्ट जारी कर दी गई।
अब तक सिर्फ 11600 कोविड सैंपलों की जांच कराए बगैर उन्हें लंबे समय के लिए डंप कर बर्बाद कर दिए जाने का मामला सुर्खियों में था लेकिन अब करीब दस हजार कोविड सैंपल की फर्जी रिपोर्ट जारी कर दिए जाने का मामला जता रहा है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने पोर्टल पर रिपोर्ट को दुरुस्त रखने के लिए लोगों की जिंदगी के साथ कितना गंभीर खिलवाड़ किया है। जिला प्रशासन मामले की जांच कर रहा है, हालांकि यह जांच अभी सैंपल को जांच कराए बगैर बर्बाद कर दिए जाने पर ही केंद्रित है। इसमें पोर्टल पर फर्जी अपडेट करने का मामला शामिल नहीं है।
कोविड मॉनिटरिंग रिपोर्ट से अगर मामले को विस्तार से समझने की कोशिश करें तो यह रिपोर्ट बताती है कि 17 दिसंबर तक जिले भर से कोरोना के संदेह में 778768 लोगों के आरटीपीसीआर सैंपल लिए गए। इनमें से 776992 लोगों की जांच रिपोर्ट पोर्टल पर अपडेट भी कर दी गई। सिर्फ 1776 सैंपल की जांच रिपोर्ट अपडेट नहीं की जा सकी।
विज्ञापन
यह मामला तब उलझा जब सीएमओ डॉ. बलबीर सिंह ने एडीएम सिटी को यह बयान दिया कि 26 नवंबर को करीब 16 सौ सैंपल स्टोर रूम में रखे मिले थे। बेकार हो जाने की वजह से उन्हेें कोविड प्रोटोकाल के तहत नष्ट कराने का निर्देश दिया गया था। इससे पहले 17 नवंबर को भी एक से लेकर 16 नवंबर के बीच लिए गए करीब दस हजार सैंपल भी बरबाद हो गए थे।
सीएमओ के बयान के बाद सवाल उठा कि जब 11600 सैंपल की जांच ही नहीं हुई तो उनकी रिपोर्ट कैसे पोर्टल पर अपडेट कर दी गई। यहां यह भी बता दें कि फ्लू कॉर्नर इंचार्ज डॉ. सतीश चंद्रा ने बताया था कि सभी सैंपल को नष्ट कर दिया गया था। उनके मुताबिक अधिकतम 72 घंटे तक ही सैंपल जांच करने योग्य रह सकते थे। लिहाजा 15 नवंबर से पहले के जो भी सैंपल रखे मिले थे, उन्हें कोविड प्रोटोकाल के तहत नष्ट कर दिया गया था। हालांकि उनकी गणना नहीं की थी। अनुमान के अनुसार करीब दस हजार सैंपल नष्ट हुए थे।
आशंका : जांच नहीं हुई यानी सभी सैंपल की निगेटिव रिपोर्ट कर दी गई अपडेट
विभागीय सूत्रों का दावा है कि अपनी लापरवाही की पोल खुलने और इसमें फंसने के डर से शासन को भेजी जा रही रिपोर्ट में आंकड़ों में बड़े खेल किए जा रहे हैं। इससे पहले मौत के आंकड़ों में खेल हुआ था और फिर तमाम संक्रमितों की रिपोर्ट भी पोर्टल पर अपडेट नहीं की गई थी। इसकी पुष्टि निजी लैब की जांच में पॉजिटिव मिले लोगों की शिकायतों की जांच में हो चुकी है। अब सैंपल बरबाद करने के प्रकरण में कहा जा जा रहा है कि स्वास्थ्य विभाग ने पहले लोगों को जांच रिपोर्ट कुछ दिन में मिल जाने की बात कहकर टालते रहे और फिर जो लोग रिपोर्ट के लिए विभाग पहुंचे उनके ओपीडी पर्चे पर ही निगेटिव रिपोर्ट देकर उन्हें लौटा दिया गया।
प्रशासन ने अब जनता से भी मांगे कोविड सैंपल बर्बाद करने के मामले में साक्ष्य
एडीएम सिटी आरडी पांडेय के मुताबिक सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। अब डीएम ने जूतों से सैंपल कुचलने के प्रकरण में जनता से भी साक्ष्य मांगने का निर्देश दिया है। अगर लोगों के पास इस प्रकरण से संबंधित कोई दस्तावेज, फोटो या वीडियो के तौर पर साक्ष्य है तो वह उनके कार्यालय में लिखित, मौखिक या सोशल मीडिया के जरिए उन्हें उपलब्ध करा सकते हैं। सूचना देने वालों की सभी जानकारी गोपनीय रहेगी। इसमें अगस्त, सितंबर से लेकर नवंबर तक सैंपल की जांच सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर कराने वाले और उनकी रिपोर्ट न मिलने संबंधी जानकारी दो दिन में दी जा सकती है।
विज्ञापन
बरेली। कोविड मॉनिटरिंग रिपोर्ट के मुताबिक 17 दिसंबर तक जिले भर से 778768 लोगों के आरटीपीसीआर सैंपल लिए गए जिसमें से 776992 सैंपल की रिपोर्ट भी पोर्टल पर अपडेट कर दी गई। इन दोनों आंकड़ों में सिर्फ 1776 सैंपल का अंतर है लेकिन खुद सीएमओ कोविड अस्पताल में 11600 सैंपल बगैर जांच कराए बर्बाद कर दिए जाने की पुष्टि कर चुके हैं। इस पूरे गुणा-भाग से साफ जाहिर है कि 9824 कोविड सैंपल की फर्जी रिपोर्ट जारी कर दी गई।
अब तक सिर्फ 11600 कोविड सैंपलों की जांच कराए बगैर उन्हें लंबे समय के लिए डंप कर बर्बाद कर दिए जाने का मामला सुर्खियों में था लेकिन अब करीब दस हजार कोविड सैंपल की फर्जी रिपोर्ट जारी कर दिए जाने का मामला जता रहा है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने पोर्टल पर रिपोर्ट को दुरुस्त रखने के लिए लोगों की जिंदगी के साथ कितना गंभीर खिलवाड़ किया है। जिला प्रशासन मामले की जांच कर रहा है, हालांकि यह जांच अभी सैंपल को जांच कराए बगैर बर्बाद कर दिए जाने पर ही केंद्रित है। इसमें पोर्टल पर फर्जी अपडेट करने का मामला शामिल नहीं है।
विज्ञापन
कोविड मॉनिटरिंग रिपोर्ट से अगर मामले को विस्तार से समझने की कोशिश करें तो यह रिपोर्ट बताती है कि 17 दिसंबर तक जिले भर से कोरोना के संदेह में 778768 लोगों के आरटीपीसीआर सैंपल लिए गए। इनमें से 776992 लोगों की जांच रिपोर्ट पोर्टल पर अपडेट भी कर दी गई। सिर्फ 1776 सैंपल की जांच रिपोर्ट अपडेट नहीं की जा सकी।
विज्ञापन
यह मामला तब उलझा जब सीएमओ डॉ. बलबीर सिंह ने एडीएम सिटी को यह बयान दिया कि 26 नवंबर को करीब 16 सौ सैंपल स्टोर रूम में रखे मिले थे। बेकार हो जाने की वजह से उन्हेें कोविड प्रोटोकाल के तहत नष्ट कराने का निर्देश दिया गया था। इससे पहले 17 नवंबर को भी एक से लेकर 16 नवंबर के बीच लिए गए करीब दस हजार सैंपल भी बरबाद हो गए थे।
सीएमओ के बयान के बाद सवाल उठा कि जब 11600 सैंपल की जांच ही नहीं हुई तो उनकी रिपोर्ट कैसे पोर्टल पर अपडेट कर दी गई। यहां यह भी बता दें कि फ्लू कॉर्नर इंचार्ज डॉ. सतीश चंद्रा ने बताया था कि सभी सैंपल को नष्ट कर दिया गया था। उनके मुताबिक अधिकतम 72 घंटे तक ही सैंपल जांच करने योग्य रह सकते थे। लिहाजा 15 नवंबर से पहले के जो भी सैंपल रखे मिले थे, उन्हें कोविड प्रोटोकाल के तहत नष्ट कर दिया गया था। हालांकि उनकी गणना नहीं की थी। अनुमान के अनुसार करीब दस हजार सैंपल नष्ट हुए थे।
आशंका : जांच नहीं हुई यानी सभी सैंपल की निगेटिव रिपोर्ट कर दी गई अपडेट
विभागीय सूत्रों का दावा है कि अपनी लापरवाही की पोल खुलने और इसमें फंसने के डर से शासन को भेजी जा रही रिपोर्ट में आंकड़ों में बड़े खेल किए जा रहे हैं। इससे पहले मौत के आंकड़ों में खेल हुआ था और फिर तमाम संक्रमितों की रिपोर्ट भी पोर्टल पर अपडेट नहीं की गई थी। इसकी पुष्टि निजी लैब की जांच में पॉजिटिव मिले लोगों की शिकायतों की जांच में हो चुकी है। अब सैंपल बरबाद करने के प्रकरण में कहा जा जा रहा है कि स्वास्थ्य विभाग ने पहले लोगों को जांच रिपोर्ट कुछ दिन में मिल जाने की बात कहकर टालते रहे और फिर जो लोग रिपोर्ट के लिए विभाग पहुंचे उनके ओपीडी पर्चे पर ही निगेटिव रिपोर्ट देकर उन्हें लौटा दिया गया।
प्रशासन ने अब जनता से भी मांगे कोविड सैंपल बर्बाद करने के मामले में साक्ष्य
एडीएम सिटी आरडी पांडेय के मुताबिक सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। अब डीएम ने जूतों से सैंपल कुचलने के प्रकरण में जनता से भी साक्ष्य मांगने का निर्देश दिया है। अगर लोगों के पास इस प्रकरण से संबंधित कोई दस्तावेज, फोटो या वीडियो के तौर पर साक्ष्य है तो वह उनके कार्यालय में लिखित, मौखिक या सोशल मीडिया के जरिए उन्हें उपलब्ध करा सकते हैं। सूचना देने वालों की सभी जानकारी गोपनीय रहेगी। इसमें अगस्त, सितंबर से लेकर नवंबर तक सैंपल की जांच सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर कराने वाले और उनकी रिपोर्ट न मिलने संबंधी जानकारी दो दिन में दी जा सकती है।