जुमे की नमाज से पहले बयान में बोले, शरियत की हिफाजत में खड़े हैं और खड़े रहेंगे
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बरेली। तीन तलाक के मुद्दे पर शहर इमाम मुफ्ती खुर्शीद आलम ने कहा है कि शरीयत के हुक्म को बताना और हिफाजत हमारी जिम्मेदारी है। शरीयत की हिफाजत के लिए पहले भी खड़े थे, आज भी खड़े हैं और हमेशा खड़े रहेंगे। यह बयान शुक्रवार को किला की शाही जामा मस्जिद में जुमा की नमाज से पहले शहर इमाम ने दिया। उन्होंने कहा कि अल्लाह उसके रसूल और कुरान का जो हुक्म है उसे हम हर हालत में लोगों को बताएंगे। हमें इससे कोई नहीं रोक सकता। यह हमारा हक है इसकी इजाजत हमें हमारे देश के संविधान ने दी है। अपने मजहब के बारे में बताना लोगों को इस्लामी कानून के आगाह करना अगर कोई जुर्म कहता है तो हम यह जुर्म हजार बार करेंगे। इसके अलावा उन्होंने शहीदे आजम हजरत इमाम हुसैन की जिंदगी पर भी रोशनी डाली। साथ ही इस्लाम को बचाने के लिए उनकी तमाम कुर्बानियों का भी जिक्र किया।
यहां बता दें कि निदा खान के कुछ बयानों को लेकर फतवा दिया गया था। जिसका एलान शहर इमाम मुफ्ती खुर्शीद आलम अजहरी, मरकजी दारुफ इफ्ता के मुफ्ती अफजाल रजवी ने किया था। इसके खिलाफ निदा खान इसे मानवाधिकार का हनन बताते हुए मुकदमा कायम कराया था। इस फतवे के दिए जाने में निदा खान अपने शौहर शीरान रजा का नाम भी इस मुकदमें में शामिल किया था। इस मामले में पिछले दिनों अदालत ने मुफ्तियों सहित शीरान रजा को समन जारी किया है। इसमें 3 अक्टूबर तारीख लगाई गई है। इसमें मुफ्ती खुर्शीद आलम ने कहा कि वह फतवा किसी के नाम से नहीं है और न ही फतवा किसी के दिया जाता है।