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कागजों पर दौड़ रहीं टीमें, सेटेलाइट बता रहा है कहां जल रही पराली

Mon, 26 Oct 2020 01:54 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 26 Oct 2020 01:54 AM IST
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Teams running on paper, satellite tells where burning stubbleTeams running on paper, satellite tells where burning stubble
demo photo - फोटो : अमर उजाला

सेटेलाइट के जरिए पकड़े गए सारे 19 मामले, पिछले साल हुई थी 41 पर कार्रवाई

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बरेली। पराली जलाने पर रोक के सरकार के सख्त आदेश पर प्रशासन की टीमें सिर्फ कागजों पर अमल कर रही हैं। हालत यह है कि अब तक पराली जलाने के जिन 19 मामलों में कार्रवाई हुई है, वे सब सेटेलाइट ने पकड़े हैं। हालांकि यह कार्रवाई भी पिछले साल के मुताबिक आधी से भी कम है।
शासन के निर्देश पर अफसरों ने पराली जलाने के मामले पर रोक लगाने के लिए मातहतों को जमकर निर्देश जारी किए। मगर कार्रवाई सिर्फ उन मामलों में हो रही है जो सेटेलाइट से पकड़ में आ रहे हैं। लेखपाल इन पर केस दर्ज कराकर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। आदेशों के मुताबिक पराली जलाने की घटनाओं को तत्काल पकड़ना है मगर पराली जल जाने के बाद सूचना मिलने पर बची राख के आधार पर पराली जलाए जाने का सुबूत इकट्ठा कर कार्रवाई हो रही है जबकि सरकार चाहती है कि पराली जले ही न। पिछले साल भी प्रशासन ने पराली जलाने के मामलों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई की मगर उस दौरान भी सभी कार्रवाई सेटेलाइट से पकड़े गए मामलों पर हुई थी।
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लखनऊ से रिमोट सेंसिंग सेंटर के जरिए निगरानी

पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए शासन ने कई दिशा निर्देश दिए मगर कोई सफलता हाथ न लगने पर जिम्मेदारी लखनऊ के रिमोट सेंसिंग सेंटर को सौंपी गई। ये सेंटर ही सेटेलाइट के जरिए निगरानी कर रहा है। निगरानी के दौरान कहीं भी धुआं उठते देख टीम प्रशासन को सूचना देती है कि किस अक्षांश और देशांतर पर पराली जल रही है। फिर राजस्व और कृषि विभाग के अफसर और कर्मचारी स्थलीय निरीक्षण कर जांच करते हैं। दोषी पर कार्रवाई की जाती है।
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पिछले साल के मुकाबले सिर्फ आधे मामले

पिछले साल 23 अक्तूबर तक सेटेलाइट से पराली जलाने की 41 सूचनाएं मिलीं जिसमें से नियमानुसार जुर्माना और केस दर्ज कराए गए थे। इस साल अब तक 19 मामले सामने आए हैं जो पिछले साल की अपेक्षा आधे से भी कम हैं। हालांकि अफसर इसे पिछले साल हुई कार्रवाई का असर बता रहे हैं।

महीने भर में एक भी मामला नहीं पकड़ा

खेतों में पराली जलाने से रोकने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर लेखपाल, पंचायत सचिव, ग्राम प्रधान, पुलिस और कृषि विभाग के कर्मचारी और अफसर निगरानी कर रहे हैं। टीमों को अपने क्षेत्र में पराली जलाने की घटना की रोकथाम और किसानों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं। मगर टीमें सिर्फ कागजों पर दौड़ रही हैं। बताते हैं कि अगर इस संबंध में गांव-गांव पड़ताल की जाए तो टीमों के कारनामे सामने आएंगे।

पराली जलाने पर रोकथाम के लिए ग्राम और न्याय पंचायत स्तर पर टीमें काम कर रही हैं। अब तक जो भी मामले सामने आए वह सभी सेटेलाइट के जरिए ट्रेस हुए हैं। सब पर कार्रवाई भी हो चुकी है। - धीरेंद्र चौधरी जिला कृषि अधिकारी
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