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Bareilly News: हाईकोर्ट से शिक्षक को मिली राहत, जाति जांच समिति का आदेश निरस्त

Tue, 11 Aug 2026 01:13 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Tue, 11 Aug 2026 01:13 AM IST
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Teacher gets relief from High Court; caste scrutiny committee's order quashed.
बरेली। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली की जिला स्तरीय जाति जांच समिति के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें याची केंद्रपाल के अनुसूचित (धनगर) जाति के प्रमाणपत्र को रद्द किया गया था। प्रमाणपत्र रद्द करने से पहले सतर्कता रिपोर्ट नहीं मांगी गई थी। कोर्ट ने इसे उच्चतम न्यायालय के दिशा निर्देशों का उल्लंघन करार दिया है।
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केंद्रपाल ने जिला स्तरीय जाति जांच समिति की ओर से आठ अक्तूबर 2025 को जारी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। तर्क दिया था कि समिति ने उच्चतम न्यायालय के माधुरी पाटिल मामले में पारित आदेश का पालन नहीं किया गया। इसके अनुसार, जाति प्रमाणपत्र रद्द करने से पहले सतर्कता जांच अनिवार्य है। शासकीय अधिवक्ता ने भी स्वीकार किया कि प्रमाणपत्र रद्द करने से पहले कोई सतर्कता जांच नहीं हुई थी।
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इस पर हाईकोर्ट ने कहा, समिति का आदेश कानून के अनुसार नहीं है। कोर्ट ने याची का जाति प्रमाणपत्र बहाल करने का आदेश दिया। साथ ही, जाति जांच समिति को स्वतंत्रता दी है कि याची को सुनवाई का पूर्ण अवसर देकर उच्चतम न्यायालय के आदेश का अनुपालन करते हुए विजिलेंस जांच करवाकर नया आदेश पारित कर सकती है।
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ये है मामला
बहेड़ी के गांव दौलतपुर निवासी केंद्रपाल की 23 अक्तूबर 2020 को माध्यमिक शिक्षा विभाग में नियुक्ति हुई थी। वह बुलंदशहर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज रसूलगढ़ में तैनात थे। पत्नी की शिकायत पर उनके बरेली से जारी जाति प्रमाणपत्र की जांच कराई गई तो वह कूटरचित पाया गया। आठ अक्तूबर 2025 को जिला जाति जांच समिति ने उसका जाति प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया था।
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बरेली कॉलेज के भौतिकी विभाग के प्रोफेसर को हाईकोर्ट से राहत
बरेली। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली कॉलेज के भौतिकी विभाग के प्रो. वीरपाल सिंह को राहत दी है। न्यायालय ने उनके खिलाफ जारी जांच और विभाग प्रभारी पद से हटाने के आदेश पर स्टे लगा दिया है।
प्रो. वीरपाल को विभाग प्रभारी पद से हटाने का आदेश बरेली कॉलेज की प्रबंध समिति ने जारी किया था। इसके खिलाफ वीरपाल सिंह ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। रजत मिश्रा की ओर से 23 मई को की गई शिकायत के आधार पर याची के विरुद्ध आठ जून को सात सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। जांच शुरू होने से पहले ही 20 जून को उन्हें विभाग प्रभारी पद से हटा दिया गया। इन दोनों आदेशों को चुनौती देते हुए याची ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

कोर्ट ने चार अगस्त को सुनवाई के बाद प्रबंध समिति के दोनों आदेशों पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि किसी भी जांच को मनमाने तरीके से संचालित नहीं किया जा सकता। इसी तरह किसी भी विभाग प्रभारी को मनमाने ढंग से उसके पद से नहीं हटाया जा सकता।
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