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Bareilly: स्वाद ने दिलाई फरीदपुर की पूजा को पहचान, मेहनत से मिला मुकाम... बनीं आत्मनिर्भर
Mon, 30 Oct 2023 05:05 PM IST
बरेली ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
Published by: बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 30 Oct 2023 05:05 PM IST
सार
पूजा ने बताया कि उन्हें समूह के जरिये स्वरोजगार की योजनाओं के बारे में जानकारी हुई तो कैंटीन खोलने का निर्णय लिया। मेहनत और लगन से खुद भोजन तैयार करना शुरू किया।
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पूजा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बरेली। घर की दहलीज से बाहर निकलकर कई महिलाओं ने कामयाबी की इबारत लिखी है। फरीदपुर के ओसढ़ गांव की पूजा भी उन्हीं में से एक हैं। आठ माह पहले उन्होंने कैंटीन से यह सफर शुरू किया था। उनके बनाए स्वादिष्ट भोजन ने पहचान दिलाई। अथक परिश्रम से कामयाबी का सफर तय किया। अब वह फरीदपुर सीएचसी में मरीजों के लिए भोजन की आपूर्ति करती हैं। स्वाद के साथ ही वह उनकी सेहत का भी पूरा ध्यान देती हैं। उनके इस सफर में अब कई अन्य महिलाएं भी जुड़ चुकी हैं। सभी आत्मनिर्भर बनकर परिवार की परवरिश में योगदान दे रही हैं।
ऐसे आया विचार
पूजा ने बताया कि उन्हें समूह के जरिये स्वरोजगार की योजनाओं के बारे में जानकारी हुई तो कैंटीन खोलने का निर्णय लिया। अपनी मेहनत और लगन से खुद भोजन तैयार करना शुरू किया। गुणवत्ता और स्वाद की वजह से लोगों को खाना पसंद आया। यहीं से उनके काम को विस्तार मिला। धीरे-धीरे सीएचसी में मरीजों के लिए खाना सप्लाई करने का काम भी मिल गया। अकेले यह सब कर पाना कठिन था, इसलिए अन्य महिलाओं को भी साथ जोड़ लिया।
अन्य महिलाओं को भी मिला रोजगार
पूजा ने बताया कि इतनी कामयाबी मिलेगी, उन्हें भी इसका अंदाजा नहीं था। कामयाबी मिली तो दूसरी महिलाओं को भी इसमें शामिल कर लिया। काम के साथ जुड़कर अब वे भी आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। इससे अलग ही खुशी और आत्मसंतुष्टि मिलती है। यह अहसास सबसे सुखद है।
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ऐसे आया विचार
पूजा ने बताया कि उन्हें समूह के जरिये स्वरोजगार की योजनाओं के बारे में जानकारी हुई तो कैंटीन खोलने का निर्णय लिया। अपनी मेहनत और लगन से खुद भोजन तैयार करना शुरू किया। गुणवत्ता और स्वाद की वजह से लोगों को खाना पसंद आया। यहीं से उनके काम को विस्तार मिला। धीरे-धीरे सीएचसी में मरीजों के लिए खाना सप्लाई करने का काम भी मिल गया। अकेले यह सब कर पाना कठिन था, इसलिए अन्य महिलाओं को भी साथ जोड़ लिया।
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अन्य महिलाओं को भी मिला रोजगार
पूजा ने बताया कि इतनी कामयाबी मिलेगी, उन्हें भी इसका अंदाजा नहीं था। कामयाबी मिली तो दूसरी महिलाओं को भी इसमें शामिल कर लिया। काम के साथ जुड़कर अब वे भी आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। इससे अलग ही खुशी और आत्मसंतुष्टि मिलती है। यह अहसास सबसे सुखद है।
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