टेरर फंडिंगः सदाकत बोला- सिराज ही मास्टरमाइंड, मुझे फंसाया गया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नेपाल के जरिये टेरर फंडिंग में आरोपी सदाकत को प्रेमनगर थाने के धोखाधड़ी संबंधी 10 साल पुराने मामले में जिला जेल से शनिवार को सीजेएम कोर्ट लाया गया। यहां मीडिया से बातचीत में सदाकत ने कहा कि उसे झूठा फंसाकर टेरर फंडिंग का सरगना बताया जा रहा है। असली आरोपी सिराजुद्दीन उर्फ सिराज ही है। फहीम भी सिराज का साथी है। यही दोनों नेपाल तक जाते और नेटवर्क चलाते थे। कॉल डिटेल और सीसीटीवी फुटेज से रिकॉर्ड निकलवाया जाए तो हकीकत सामने आ जाएगी।
सीजेएम कोर्ट में पेशी के लिए जाते वक्त गांव परतापुर चौधरी निवासी सदाकत हुसैन ने अपना चेहरा कपड़े से ढक लिया था। दूसरे बंदियों को भी आड़ के लिए आगे कर लिया ताकि उसका फोटो न खींचा जा सके। उसकी पत्नी और परिवार के कुछ लोग भी कोर्ट आए थे जो मीडिया से उलझ रहे थे। सदाकत का कहना था कि उसकी माली हालत पहले भी अच्छी थी। उसका अपना चप्पल बनाने का कारखाना था। बाद में उसने ईंट भट्ठा खोला।
उसके मुताबिक सिराज को भरोसेमंद मानकर अपना पार्टनर बनाया पर सिराज ने दगा कर दिया। उसका कई लाख रुपया हड़प लिया। बाद में उसे पता लगा कि सिराज ठगी और लॉटरी के धंधे में पड़ गया है। तब उसने सिराज से नाता तोड़ लिया। बस्ती के ही फहीम ने अपनी बहन की शादी में सिराज से एक लाख रुपये उधार लिए थे। फहीम रुपये नहीं लौटा पाया तो सिराज ने उसे अपना ड्राइवर बना लिया। बताया कि सिराज और फहीम ही अक्सर नेपाल जाते थे और रुपये इधर से उधर पहुंचाने का धंधा करते थे। सही से जांच की जाए तो सिराज ही मास्टरमाइंड निकलेगा।
सरेंडर न करता तो एटीएस टीम विलेन बना देती
सदाकत ने स्वीकार किया कि उसने जानबूझकर पुराने मामले में जमानत तुड़वाकर बरेली में जेल जाने का रास्ता बनाया। कहा कि ऐसा न करता तो एटीएस टीम उसे पकड़ लेती और कुछ रुपये या कोई फर्जी दस्तावेज साथ में लगाकर उसे हवाला या टेरर फंडिंग का पक्का आरोपी बना देती। अभी तक सिर्फ आरोप ही है। कहा, वह दावे से कहता है कि यह हवाला का धंधा है, जिसमें सिराज जैसे लोग जुड़े हैं। एटीएस न तो इसे टेरर फंडिंग साबित कर पाएगी और न ही उसका इस धंधे से नाता जोड़ पाएगी।