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साक्ष्यों से छेड़छाड़ पर प्रशासन सख्त
बरेली
Updated Thu, 18 Jan 2018 02:24 AM IST
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साईं अस्पताल में हुए अग्निकांड के दौरान दो महिला मरीजों की मौत हो जाने के मामले की जांच रिपोर्ट बुधवार को प्रभारी जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार को सौंप दी गई। इस बीच अस्पताल की सील आईसीयू में साक्ष्यों से छेड़छाड़ का मामला भी सामने आ गया। इसको गंभीरता से लेते हुए प्रभारी डीएम ने सिटी मजिस्ट्रेट और सीएमओ को अस्पताल सीज करने के आदेश दे दिए। बृहस्पतिवार को अस्पताल सील कर दिया जाएगा।
रविवार को रात 2.40 बजे साई अस्पताल की आईसीयू में अचानक आग लग गई थी। इसमें बदायूं की दो महिला मरीजों की मौत हो गई थी। उस समय प्रशासन ने अस्पताल प्रबंधन पर कार्रवाई करते हुए सिर्फ आईसीयू को सील किया था। अस्पताल में चूंकि काफी संख्या में मरीज भर्ती थे, लिहाजा अस्पताल को उस वक्त सील नहीं किया गया। एडीएम सिटी, सिटी मजिस्ट्रेट, सीएमओ, अग्निशमन विभाग और विद्युत विभाग को अस्पताल की बिल्डिंग के मानकों के साथ विभिन्न पहलुओं की जांच सौंपी गई थी। बुधवार को देर शाम तक सभी अधिकारियों ने अपनी जांच रिपोर्ट प्रभारी डीएम सत्येंद्र कुमार को सौंप दी। अधिकारियों की संयुक्त जांच रिपोर्ट में यह पाया गया कि साईं अस्पताल की बिल्डिंग किसी भी तरह के मरीजों के आपरेशन के लिए सुरक्षित नहीं है। इस बीच सील आईसीयू में फायर इस्टिग्यूशरों पर लेबल बदले जाने के मामला भी आ गया। जांच रिपोर्ट और सील आईसीयू में साक्ष्यों से छेड़छाड़ को गंभीरता से लेते हुए प्रभारी डीएम ने बृहस्पतिवार को पूरे अस्पताल को सील करने का आदेश दे दिया।
फोटो ----
फायर इस्टिंग्विशर पर मिले नए लेबल, बदल गई एक्सपायरी डेट
सीएफओ ने आईसीयू को खुलवाकर छानबीन की, पकड़ी गड़बड़ी
एसपी सिटी के निर्देश पर, चारों सिलिंडर पुलिस ने थाने में सील कराए
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली।
साईं अस्पताल के सील आईसीयू में साक्ष्यों से छेड़छाड़ किए जाने का ‘अमर उजाला’ में खुलासा किए जाने के बाद पुलिस और प्रशासन हरकत में आ गया। बुधवार को सीएफओ ने पुलिस टीम के साथ आईसीयू की सील खुलवाकर जांच की तो अस्पताल के स्टाफ की करतूत सामने आ गई। आईसीयू में मौजूद चारों फायर इस्टिंग्विशर पर लगे लेवल बदले हुए मिले। सीएफओ केएन रावत ने अस्पताल मालिक डॉ. शरद अग्रवाल से भी लंबी पूछताछ की, लेकिन डॉ. शरद अधिकारियों को संतुष्ट नहीं कर पाए। इसके बाद एसपी सिटी के निर्देश पर चारों सिलिंडरों को कब्जे में लेकर थाना बारादरी में सील करा दिया गया।
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साईं अस्पताल की सील आईसीयू में रोशनदान के जरिये अंदर घुसने के खुलासे के बाद डॉ. शरद ने स्वीकार किया था कि अंदर घुसने वाले लोग उनके अस्पताल का ही स्टाफ था। बुधवार को एसपी सिटी रोहित सिंह के निर्देश पर सीएफओ और बारादरी थाने की पुलिस अस्पताल पहुंची। सील आईसीयू के ताले को खुलवाकर अंदर दोबारा छानबीन की गई तो फायर इस्टिंग्विशर पर लगे लेवल बदले हुए पाए गए। हादसे के बाद की गई जांच के मुताबिक ये फायर इस्टिंग्विशर एक्सपायर्ड थे, लेकिन बदले गए लेवलों पर उनकी एक्सपायरी डेट जून 2018 दर्ज थी। सील आईसीयू में फायर इस्टिंग्विशर पर नए लेवल कैसे लग गए, अस्पताल प्रबंधन इसका कोई जवाब नहीं दे पाया।
अधिकारी बोले, उस दिन नहीं थे यह लेबल
छानबीन के बाद अग्निशमन द्वितीय अधिकारी रजीउद्दीन ने सीएफओ को बताया कि चार सिलिंडरों पर एक्सपायरी डेट बताने वाले नए लेबल लगे मिले हैं। रविवार रात में बचाव कार्य में लगी फायर डिपार्टमेंट की टीम को वह लीड कर रहे थे। बचाव कार्य पूरा होने के बाद सभी चार सिलिंडरों उन्होंने खुद जांच की थी। सिलिंडरों के लेबल पर मार्च 2017 में एक्सपायर होने की डेट पड़ी थी, अब नए लेबल पर जून 2018 की एक्सपायरी डेट पड़ी है। अग्निकांड के प्रकरण में बारादरी थाने में दर्ज केस के विवेचक गिरीश जोशी भी बुधवार को अस्पताल पहुंचे। स्टाफ से पूछताछ की गई।
चौबीस घंटे ड्यूटी पर थी पुलिस तैनात
रविवार रात 2:45 बजे आग लगने के बाद सोमवार सुबह 12 बजे एसएसपी जोगेंद्र कुमार और प्रभारी डीएम सत्येंद्र कुमार की मौजूदगी में आईसीयू को सील कर दिया गया था। सील परिसर में गड़बड़ी की आशंका के चलते थाना बारादरी की पुलिस को यहां 24 घंटे की ड्यूटी पर लगा दिया गया था। इसके बावजूद मंगलवार को अस्पताल के दो कर्मचारी रोशनदान के जरिये अंदर रखे सामान से छेड़छाड़ करते देखे गये थे जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया।
छत पर वाटर टैंकों की भी जांच
फायर डिपार्टमेंट की टीम ने टावर हीटर और ब्वायलर के वायर भी जांचे। हालांकि सभी वायर ठीक हालत में मिलने के बाद यही माना जा रहा है कि बिजली के बोर्ड में शार्ट सर्किट के बाद आग लगी थी। इसके बाद टीम ने वाटर टैंक की जांच के लिए छत पर पहुंची। जहां पर दो हजार लीटर के वाटर टैंक से सप्लाई को देखा गया। यहां पीने के पानी के साथ ही फायर प्लांट की आपूर्ति को जोड़ा गया था। जांच रिपोर्ट में सभी तथ्यों को शामिल किया गया है।
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इंस्टिंग्विशर सिलिंडर पर लगे लेबल की जांच करवाई जा रही है। इस गड़बड़ी में अस्पताल प्रबंधन की भूमिका क्या है, यह भी देखा जा रहा है। गुरुवार को इसकी रिपोर्ट प्रशासनिक अधिकारियों को सौंप दी जाएगी। - केएन रावत, सीएफओ, अग्निशमन विभाग
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किसकी लापरवाही से लगी आग.. शुरू हुई जांच
केस के विवेचक ने की पूछताछ, मांगी स्टाफ की जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। अग्निकांड के बाद थाना बारादरी में महिला मरीजों की मौत का केस दर्ज हुआ था। इसके विवेचक गिरीश जोशी ने बुधवार को अस्पताल परिसर में स्टाफ से पूछताछ की। उन्होंने अस्पताल मालिक डॉ. शरद अग्रवाल से रविवार रात परिसर में ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ की जानकारी मांगी है। उनके नाम, पते, फोटो समेत अस्पताल में उनके पद की जानकारी भी मांगी गई है।
फायर डिपार्टमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक आग लगने में स्टाफ की लापरवाही को भी कारण माना गया। ऐसे में पुलिस पता करने में लगी है कि रविवार रात आईसीयू में किन स्टाफ की ड्यूटी थी। वह कितने बजे से लेकर कितने बजे तक आईसीयू में रहे। उनके अतिरिक्त प्राइवेट, जनरल वार्ड और रिसेप्शन पर कौन-कौन तैनात था। विवेचक गिरीश जोशी ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन से स्टाफ की जानकारी घटना के बाद ही मांगी गई थी, लेकिन बुधवार तक स्टाफ की जानकारी मुहैया नहीं कराई गई है।
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ऊपर पुलिस इन्वेस्टीगेशन, नीचे हो गई छेड़छाड़
बरेली। जिस वक्त फायर विभाग और बारादरी थाने की पुलिस साईं अस्पताल की दूसरी मंजिल पर अग्निकांड के साक्ष्यों से छेड़छाड़ किए जाने के मामले की छानबीन कर रही थी, उसी वक्त ग्राउंड फ्लोर के टायलेट में एक महिला से छेड़छाड़ की घटना हो गई। महिला के शोर मचाने पर तीमारदार आ गए और आरोपी वहां से भाग निकला। इस घटना के बाद अस्पताल का माहौल कुछ देर गर्म रहा, फिर मामला शांत करा दिया गया।
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लापता कंपाउंडर की अस्पताल के बाहर खड़ी मिली बाइक
ब्यूरो
बरेली। साईं अस्पताल का गायब कंपाउंडर जितेंद्र का बुधवार को भी पता नहीं चल सका। उसकी बाइक अस्पताल की पार्किंग में खड़ी मिली है। केस के विवेचक गिरीश जोशी ने गायब कंपाउंडर के बारे में भी पूछताछ की।
जितेंद्र की पत्नी ने अस्पताल प्रबंधन को बताया था कि उनके पति घर नहीं लौटे हैं, जिसके बाद उन्हें काफी ढूंढा गया, लेकिन कहीं कुछ पता नहीं चला। पत्नी की शिकायत के बाद मंगलवार को पूरे अस्पताल में जितेंद्र की खोजबीन की गई थी। सभी वार्ड, स्टोर सहित छत पर कर्मचारियों ने जितेंद्र को ढूंढा, लेकिन वह कहीं नहीं मिला। अस्पताल के स्टाफ के मुताबिक सोमवार को हादसे के बाद गुस्साए तीमारदारों ने पूरे स्टाफ को पीटना शुरू कर दिया था। बाकी लोग तो थोड़ी-बहुत पिटाई के बाद किसी तरह भागने में सफल हो गए थे लेकिन जितेंद्र शायद भीड़ के बीच फंसा रह गया।
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रविवार को रात 2.40 बजे साई अस्पताल की आईसीयू में अचानक आग लग गई थी। इसमें बदायूं की दो महिला मरीजों की मौत हो गई थी। उस समय प्रशासन ने अस्पताल प्रबंधन पर कार्रवाई करते हुए सिर्फ आईसीयू को सील किया था। अस्पताल में चूंकि काफी संख्या में मरीज भर्ती थे, लिहाजा अस्पताल को उस वक्त सील नहीं किया गया। एडीएम सिटी, सिटी मजिस्ट्रेट, सीएमओ, अग्निशमन विभाग और विद्युत विभाग को अस्पताल की बिल्डिंग के मानकों के साथ विभिन्न पहलुओं की जांच सौंपी गई थी। बुधवार को देर शाम तक सभी अधिकारियों ने अपनी जांच रिपोर्ट प्रभारी डीएम सत्येंद्र कुमार को सौंप दी। अधिकारियों की संयुक्त जांच रिपोर्ट में यह पाया गया कि साईं अस्पताल की बिल्डिंग किसी भी तरह के मरीजों के आपरेशन के लिए सुरक्षित नहीं है। इस बीच सील आईसीयू में फायर इस्टिग्यूशरों पर लेबल बदले जाने के मामला भी आ गया। जांच रिपोर्ट और सील आईसीयू में साक्ष्यों से छेड़छाड़ को गंभीरता से लेते हुए प्रभारी डीएम ने बृहस्पतिवार को पूरे अस्पताल को सील करने का आदेश दे दिया।
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फायर इस्टिंग्विशर पर मिले नए लेबल, बदल गई एक्सपायरी डेट
सीएफओ ने आईसीयू को खुलवाकर छानबीन की, पकड़ी गड़बड़ी
एसपी सिटी के निर्देश पर, चारों सिलिंडर पुलिस ने थाने में सील कराए
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली।
साईं अस्पताल के सील आईसीयू में साक्ष्यों से छेड़छाड़ किए जाने का ‘अमर उजाला’ में खुलासा किए जाने के बाद पुलिस और प्रशासन हरकत में आ गया। बुधवार को सीएफओ ने पुलिस टीम के साथ आईसीयू की सील खुलवाकर जांच की तो अस्पताल के स्टाफ की करतूत सामने आ गई। आईसीयू में मौजूद चारों फायर इस्टिंग्विशर पर लगे लेवल बदले हुए मिले। सीएफओ केएन रावत ने अस्पताल मालिक डॉ. शरद अग्रवाल से भी लंबी पूछताछ की, लेकिन डॉ. शरद अधिकारियों को संतुष्ट नहीं कर पाए। इसके बाद एसपी सिटी के निर्देश पर चारों सिलिंडरों को कब्जे में लेकर थाना बारादरी में सील करा दिया गया।
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साईं अस्पताल की सील आईसीयू में रोशनदान के जरिये अंदर घुसने के खुलासे के बाद डॉ. शरद ने स्वीकार किया था कि अंदर घुसने वाले लोग उनके अस्पताल का ही स्टाफ था। बुधवार को एसपी सिटी रोहित सिंह के निर्देश पर सीएफओ और बारादरी थाने की पुलिस अस्पताल पहुंची। सील आईसीयू के ताले को खुलवाकर अंदर दोबारा छानबीन की गई तो फायर इस्टिंग्विशर पर लगे लेवल बदले हुए पाए गए। हादसे के बाद की गई जांच के मुताबिक ये फायर इस्टिंग्विशर एक्सपायर्ड थे, लेकिन बदले गए लेवलों पर उनकी एक्सपायरी डेट जून 2018 दर्ज थी। सील आईसीयू में फायर इस्टिंग्विशर पर नए लेवल कैसे लग गए, अस्पताल प्रबंधन इसका कोई जवाब नहीं दे पाया।
अधिकारी बोले, उस दिन नहीं थे यह लेबल
छानबीन के बाद अग्निशमन द्वितीय अधिकारी रजीउद्दीन ने सीएफओ को बताया कि चार सिलिंडरों पर एक्सपायरी डेट बताने वाले नए लेबल लगे मिले हैं। रविवार रात में बचाव कार्य में लगी फायर डिपार्टमेंट की टीम को वह लीड कर रहे थे। बचाव कार्य पूरा होने के बाद सभी चार सिलिंडरों उन्होंने खुद जांच की थी। सिलिंडरों के लेबल पर मार्च 2017 में एक्सपायर होने की डेट पड़ी थी, अब नए लेबल पर जून 2018 की एक्सपायरी डेट पड़ी है। अग्निकांड के प्रकरण में बारादरी थाने में दर्ज केस के विवेचक गिरीश जोशी भी बुधवार को अस्पताल पहुंचे। स्टाफ से पूछताछ की गई।
चौबीस घंटे ड्यूटी पर थी पुलिस तैनात
रविवार रात 2:45 बजे आग लगने के बाद सोमवार सुबह 12 बजे एसएसपी जोगेंद्र कुमार और प्रभारी डीएम सत्येंद्र कुमार की मौजूदगी में आईसीयू को सील कर दिया गया था। सील परिसर में गड़बड़ी की आशंका के चलते थाना बारादरी की पुलिस को यहां 24 घंटे की ड्यूटी पर लगा दिया गया था। इसके बावजूद मंगलवार को अस्पताल के दो कर्मचारी रोशनदान के जरिये अंदर रखे सामान से छेड़छाड़ करते देखे गये थे जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया।
छत पर वाटर टैंकों की भी जांच
फायर डिपार्टमेंट की टीम ने टावर हीटर और ब्वायलर के वायर भी जांचे। हालांकि सभी वायर ठीक हालत में मिलने के बाद यही माना जा रहा है कि बिजली के बोर्ड में शार्ट सर्किट के बाद आग लगी थी। इसके बाद टीम ने वाटर टैंक की जांच के लिए छत पर पहुंची। जहां पर दो हजार लीटर के वाटर टैंक से सप्लाई को देखा गया। यहां पीने के पानी के साथ ही फायर प्लांट की आपूर्ति को जोड़ा गया था। जांच रिपोर्ट में सभी तथ्यों को शामिल किया गया है।
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इंस्टिंग्विशर सिलिंडर पर लगे लेबल की जांच करवाई जा रही है। इस गड़बड़ी में अस्पताल प्रबंधन की भूमिका क्या है, यह भी देखा जा रहा है। गुरुवार को इसकी रिपोर्ट प्रशासनिक अधिकारियों को सौंप दी जाएगी। - केएन रावत, सीएफओ, अग्निशमन विभाग
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किसकी लापरवाही से लगी आग.. शुरू हुई जांच
केस के विवेचक ने की पूछताछ, मांगी स्टाफ की जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। अग्निकांड के बाद थाना बारादरी में महिला मरीजों की मौत का केस दर्ज हुआ था। इसके विवेचक गिरीश जोशी ने बुधवार को अस्पताल परिसर में स्टाफ से पूछताछ की। उन्होंने अस्पताल मालिक डॉ. शरद अग्रवाल से रविवार रात परिसर में ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ की जानकारी मांगी है। उनके नाम, पते, फोटो समेत अस्पताल में उनके पद की जानकारी भी मांगी गई है।
फायर डिपार्टमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक आग लगने में स्टाफ की लापरवाही को भी कारण माना गया। ऐसे में पुलिस पता करने में लगी है कि रविवार रात आईसीयू में किन स्टाफ की ड्यूटी थी। वह कितने बजे से लेकर कितने बजे तक आईसीयू में रहे। उनके अतिरिक्त प्राइवेट, जनरल वार्ड और रिसेप्शन पर कौन-कौन तैनात था। विवेचक गिरीश जोशी ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन से स्टाफ की जानकारी घटना के बाद ही मांगी गई थी, लेकिन बुधवार तक स्टाफ की जानकारी मुहैया नहीं कराई गई है।
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ऊपर पुलिस इन्वेस्टीगेशन, नीचे हो गई छेड़छाड़
बरेली। जिस वक्त फायर विभाग और बारादरी थाने की पुलिस साईं अस्पताल की दूसरी मंजिल पर अग्निकांड के साक्ष्यों से छेड़छाड़ किए जाने के मामले की छानबीन कर रही थी, उसी वक्त ग्राउंड फ्लोर के टायलेट में एक महिला से छेड़छाड़ की घटना हो गई। महिला के शोर मचाने पर तीमारदार आ गए और आरोपी वहां से भाग निकला। इस घटना के बाद अस्पताल का माहौल कुछ देर गर्म रहा, फिर मामला शांत करा दिया गया।
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लापता कंपाउंडर की अस्पताल के बाहर खड़ी मिली बाइक
ब्यूरो
बरेली। साईं अस्पताल का गायब कंपाउंडर जितेंद्र का बुधवार को भी पता नहीं चल सका। उसकी बाइक अस्पताल की पार्किंग में खड़ी मिली है। केस के विवेचक गिरीश जोशी ने गायब कंपाउंडर के बारे में भी पूछताछ की।
जितेंद्र की पत्नी ने अस्पताल प्रबंधन को बताया था कि उनके पति घर नहीं लौटे हैं, जिसके बाद उन्हें काफी ढूंढा गया, लेकिन कहीं कुछ पता नहीं चला। पत्नी की शिकायत के बाद मंगलवार को पूरे अस्पताल में जितेंद्र की खोजबीन की गई थी। सभी वार्ड, स्टोर सहित छत पर कर्मचारियों ने जितेंद्र को ढूंढा, लेकिन वह कहीं नहीं मिला। अस्पताल के स्टाफ के मुताबिक सोमवार को हादसे के बाद गुस्साए तीमारदारों ने पूरे स्टाफ को पीटना शुरू कर दिया था। बाकी लोग तो थोड़ी-बहुत पिटाई के बाद किसी तरह भागने में सफल हो गए थे लेकिन जितेंद्र शायद भीड़ के बीच फंसा रह गया।