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Bareilly News: कई साल बाद भी नजर आ सकते हैं हीमोफीलिया के लक्षण
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बरेली। विरासत में मिलने वाली बीमारी हीमोफीलिया के मरीज को क्लॉटिंग फैक्टर मिलते रहें तो वह स्वस्थ जीवन जी सकता है। कुछ मामलों में बीमारी के लक्षण बचपन में सामने नहीं आते। कई साल बाद जब सामने आते हैं तब तक देर हो चुकी होती है। ऐसे में क्लॉटिंग फैक्टर और दवाएं ही पीड़ित की जीवनरक्षक बनती हैं। यह जानकारी जीवन रेखा हीमोफीलिया जनकल्याण सोसायटी की अध्यक्ष रेखा रानी ने दी।
रेखा रानी के मुताबिक पीड़ित को समय से क्लॉटिंग फैक्टर न मिले और चोट लग जाए तो जान का जोखिम होता है। एक बार खून बहने लगे तो वह बंद नहीं होता। जिला अस्पताल में कोरोना महामारी के दौरान क्लॉटिंग फैक्टर की कमी होने से कई पीड़ित दवाओं पर ही खुद को बचाते रहे। बरेली में 216 हीमोफीलिया के मरीज हैं। उन्हें जिला अस्पताल से निशुल्क क्लॉटिंग फैक्टर मिलता है। अगर किसी को यह बीमारी है तो वह जिला अस्पताल में पंजीकरण करा सकता है। जब दोषपूर्ण जीन बच्चों में आ जाता है, तो बच्चा बीमारी का शिकार होता है। थ्राम्बोप्लास्टिक में खून को शीघ्र थक्का कर देने की क्षमता होती है। खून में इसके न होने से खून का बहना बंद नहीं होता। बरेली मंडल में ज्यादातर फैक्टर आठ के मरीज हैं। यह बीमारी अनुवांशिक है। महिलाएं कैरियर होती हैं।
लखनऊ में होती है जांच
हीमोफीलिया की जांच फिलहाल जिला अस्पताल में नहीं होती। संदिग्ध मरीज का सैंपल लखनऊ भेजा जाता है। मरीजों को क्षमता बरकरार रखने के लिए डॉक्टर से नियमित परामर्श लेते रहना चाहिए। मांस पेशियों और हडिडयों की मजबूती के लिए व्यायाम करने, खेलते समय हेलमेट पहनने, एल्बो और जूते पहनने का सुझाव दिया है, ताकि चोट से रक्तस्राव की संभावना कम रहे।
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रेखा रानी के मुताबिक पीड़ित को समय से क्लॉटिंग फैक्टर न मिले और चोट लग जाए तो जान का जोखिम होता है। एक बार खून बहने लगे तो वह बंद नहीं होता। जिला अस्पताल में कोरोना महामारी के दौरान क्लॉटिंग फैक्टर की कमी होने से कई पीड़ित दवाओं पर ही खुद को बचाते रहे। बरेली में 216 हीमोफीलिया के मरीज हैं। उन्हें जिला अस्पताल से निशुल्क क्लॉटिंग फैक्टर मिलता है। अगर किसी को यह बीमारी है तो वह जिला अस्पताल में पंजीकरण करा सकता है। जब दोषपूर्ण जीन बच्चों में आ जाता है, तो बच्चा बीमारी का शिकार होता है। थ्राम्बोप्लास्टिक में खून को शीघ्र थक्का कर देने की क्षमता होती है। खून में इसके न होने से खून का बहना बंद नहीं होता। बरेली मंडल में ज्यादातर फैक्टर आठ के मरीज हैं। यह बीमारी अनुवांशिक है। महिलाएं कैरियर होती हैं।
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लखनऊ में होती है जांच
हीमोफीलिया की जांच फिलहाल जिला अस्पताल में नहीं होती। संदिग्ध मरीज का सैंपल लखनऊ भेजा जाता है। मरीजों को क्षमता बरकरार रखने के लिए डॉक्टर से नियमित परामर्श लेते रहना चाहिए। मांस पेशियों और हडिडयों की मजबूती के लिए व्यायाम करने, खेलते समय हेलमेट पहनने, एल्बो और जूते पहनने का सुझाव दिया है, ताकि चोट से रक्तस्राव की संभावना कम रहे।
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