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Bareilly News: जरूरतभर नहीं मिल रहा गन्ना, सत्र के बीच चीनी मिल बंद
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बरेली। जिले की चीनी मिलों को जरूरतभर गन्ना ही नहीं मिल पाया और वह बीच सत्र में ही बंद हो गईं। पिछले पांच वर्षों में सबसे कम गन्ने की आपूर्ति इस सत्र में हुई है। आकड़ों के अनुसार 2022 के मुताबिक 2024 के पेराई सत्र में चीनी मिलों को 1.55 करोड़ क्विंटल गन्ना कम मिला है। यही कारण है कि पूरे पेराई सत्र (160 दिन) चीनी मिलें चल नहीं पा रही हैं। नवाबगंज की चीनी मिल तो 79 दिन ही चल पाई। वैसे, विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो गन्ना किसानों की संख्या बढ़ी है। हां, रकबे में जरूर उतार-चढ़ाव रहा है।
जाहिर है कि गन्ने का उत्पादन घटा है। पिछली बार गन्ने की नई फसल केवल 57,501 हेक्टेयर में थी, जबकि इस बार क्षेत्रफल में और गिरावट के आसार हैं। विभाग ने 43,040 हेक्टेयर में ही गन्ना पौध की बोआई अनुमानित की है। ऐसे में पिछले वर्षों की अपेक्षा इस बार और अधिक गन्ने का क्षेत्रफल कम होना स्वाभाविक हो गया है।
रेड रॉट का उपचार नहीं, विभागीय आंकड़ों में हकीकत का अभाव
मीरगंज के करनपुर के गन्ना किसान जबर पाल सिंह विभाग के आंकड़ों पर सवाल उठाते हैं। कहते हैं कि जो रकबा और किसान संख्या विभाग बता रहा है, इसमें सच्चाई कितनी है? इसमें वे लोग भी जुड़े हैं जो फर्जी सट्टा बनवाकर गन्ना खरीदकर मिल को देते हैं। उनका कहना है कि 0238 प्रजाति के गन्ने में रेड रॉट (लाल सड़न) रोग लगने के बाद से किसानों का इस फसल से मोहभंग हुआ। फिर विभाग इस रोग का तोड़ खोज नहीं पाया और इस प्रजाति की फसल की बोआई पर रोक लगा दी। जबकि, इस प्रजाति के गन्ने उत्पादन बढि़या था।
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अब विभाग व चीनी मिल सीओ 15023, सीओ 0118, कोसर 14201 प्रजाति के गन्ने पर जो दे रहा है, जो किसानों को पसंद नहीं है। विभाग हो या चीनी मिलें, ये लोग गन्ने के बीज पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। गन्ने की बोआई कम होने का कारण मूल्य का कम होना भी है।
चीनी मिल भी वर्तमान हाल देखकर चिंतित
मीरगंज चीनी मिल के जीएम सरबजीत सिंह का कहना है कि क्षमता के मुताबिक गन्ना न मिलना चिंता बढ़ा रहा है। तीन साल पहले 1.40 करोड़ क्विंटल गन्ने की पेराई की थी, फिर 94 लाख ही रह गया और इस बार 80 लाख क्विंटल ही गन्ना मिल पाया। ये सही है कि अन्य प्रजातियों की अपेक्षा 0238 प्रजाति के गन्ने का उत्पादन बढि़या है। इसमें रोग लग गया। इस बार किसान गन्ने की फसल अच्छी बता रहे हैं। संवाद
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पिछले एक-दो वर्षों में चीनी मिलों की क्षमता बढ़ी है। उनको क्षमता के हिसाब में गन्ने की जरूरत है। पिछले वर्ष बारिश अधिक होने से फसल प्रभावित हुई थी। रेड रॉट भी लग गया था। उत्पादन घटने की यही वजह रहीं। अब 0238 प्रजाति पर रोक है, इसमें रेड रॉट अधिक प्रभाव डाल रहा है। उपचार संभव नहीं हो सका।
- यशवंत सिंह, जिला गन्ना अधिकारी
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पांच वर्षों में सबसे कम गन्ना 2024 में मिला
चीनी मिल - गन्ने की जरूरत-- -- मिला गन्ना
फरीदपुर - 120.00-- 76.14
बेहड़ी - 115.20-- 59.46
मीरगंज - 144.00-- 80.51
नवाबगंज - 44.80-- 10.69
सेमीखेड़ा - 38.00-- 23.21
नोट- उक्त आंकड़े लाख क्विंटल में है।
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2024 में सबसे कम दिनों चलीं मिलें
चीनी मिल-- पेराई दिवस
फरीदपुर - 111
बेहड़ी - 108
मीरगंज - 112
नवाबगंज - 81
सेमीखेड़ा - 115
नोट : 160 दिवस का एक पेराई सत्र होता है।
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पांच वर्ष में चीनी मिलों को मिला गन्ना
वर्ष-- -- -- -- प्राप्त गन्ना (लाख क्विंटल)
2020-21 - 391.05
2021-22-- 403.74
2022-23-- 404.97
2023-24-- 329.37
2024-25-- 250.01
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जाहिर है कि गन्ने का उत्पादन घटा है। पिछली बार गन्ने की नई फसल केवल 57,501 हेक्टेयर में थी, जबकि इस बार क्षेत्रफल में और गिरावट के आसार हैं। विभाग ने 43,040 हेक्टेयर में ही गन्ना पौध की बोआई अनुमानित की है। ऐसे में पिछले वर्षों की अपेक्षा इस बार और अधिक गन्ने का क्षेत्रफल कम होना स्वाभाविक हो गया है।
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रेड रॉट का उपचार नहीं, विभागीय आंकड़ों में हकीकत का अभाव
मीरगंज के करनपुर के गन्ना किसान जबर पाल सिंह विभाग के आंकड़ों पर सवाल उठाते हैं। कहते हैं कि जो रकबा और किसान संख्या विभाग बता रहा है, इसमें सच्चाई कितनी है? इसमें वे लोग भी जुड़े हैं जो फर्जी सट्टा बनवाकर गन्ना खरीदकर मिल को देते हैं। उनका कहना है कि 0238 प्रजाति के गन्ने में रेड रॉट (लाल सड़न) रोग लगने के बाद से किसानों का इस फसल से मोहभंग हुआ। फिर विभाग इस रोग का तोड़ खोज नहीं पाया और इस प्रजाति की फसल की बोआई पर रोक लगा दी। जबकि, इस प्रजाति के गन्ने उत्पादन बढि़या था।
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अब विभाग व चीनी मिल सीओ 15023, सीओ 0118, कोसर 14201 प्रजाति के गन्ने पर जो दे रहा है, जो किसानों को पसंद नहीं है। विभाग हो या चीनी मिलें, ये लोग गन्ने के बीज पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। गन्ने की बोआई कम होने का कारण मूल्य का कम होना भी है।
चीनी मिल भी वर्तमान हाल देखकर चिंतित
मीरगंज चीनी मिल के जीएम सरबजीत सिंह का कहना है कि क्षमता के मुताबिक गन्ना न मिलना चिंता बढ़ा रहा है। तीन साल पहले 1.40 करोड़ क्विंटल गन्ने की पेराई की थी, फिर 94 लाख ही रह गया और इस बार 80 लाख क्विंटल ही गन्ना मिल पाया। ये सही है कि अन्य प्रजातियों की अपेक्षा 0238 प्रजाति के गन्ने का उत्पादन बढि़या है। इसमें रोग लग गया। इस बार किसान गन्ने की फसल अच्छी बता रहे हैं। संवाद
पिछले एक-दो वर्षों में चीनी मिलों की क्षमता बढ़ी है। उनको क्षमता के हिसाब में गन्ने की जरूरत है। पिछले वर्ष बारिश अधिक होने से फसल प्रभावित हुई थी। रेड रॉट भी लग गया था। उत्पादन घटने की यही वजह रहीं। अब 0238 प्रजाति पर रोक है, इसमें रेड रॉट अधिक प्रभाव डाल रहा है। उपचार संभव नहीं हो सका।
- यशवंत सिंह, जिला गन्ना अधिकारी
पांच वर्षों में सबसे कम गन्ना 2024 में मिला
चीनी मिल - गन्ने की जरूरत
फरीदपुर - 120.00
बेहड़ी - 115.20
मीरगंज - 144.00
नवाबगंज - 44.80
सेमीखेड़ा - 38.00
नोट- उक्त आंकड़े लाख क्विंटल में है।
2024 में सबसे कम दिनों चलीं मिलें
चीनी मिल
फरीदपुर - 111
बेहड़ी - 108
मीरगंज - 112
नवाबगंज - 81
सेमीखेड़ा - 115
नोट : 160 दिवस का एक पेराई सत्र होता है।
पांच वर्ष में चीनी मिलों को मिला गन्ना
वर्ष
2020-21 - 391.05
2021-22
2022-23
2023-24
2024-25