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शांतिपूर्ण समझौता हो, न किसी की हार हो और न किसी की जीत: श्री श्री  

Tue, 06 Mar 2018 07:57 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली Updated Tue, 06 Mar 2018 07:57 PM IST
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Sri Sri wants peaceful end in Ayodhya temple issue
Sri Sri Ravi Shankar - फोटो : अमर उजाला
श्री श्री रविशंकर ने विशेष वार्ता में राम मंदिर मामले में मध्यस्थता की पहल के संबंध में विस्तार से अपनी राय रखी। बोले, हमने मध्यस्थता की पहल अपने मन की आवाज पर शुरू की है। इसमें कोई व्यक्तिगत हित नहीं है। श्री श्री से विशेष मुलाकात शाम चार बजे वीर सावरकर नगर स्थित आर्ट ऑफ लिविंग के एक कार्यकर्ता के आवास पर हुई। यहां श्री श्री ने दो घंटे विश्राम किया। 
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प्रश्न: सौहार्द से राम मंदिर और उससे कुछ दूरी पर मस्जिद बनवाने की बात कह रहे हैं, क्या इसके लिए मुस्लिमों को सहमत करा पाएंगे?   
  कुरान शरीफ के अनुसार विवादित स्थान पर नमाज पढ़ना अल्लाह स्वीकार नहीं करता। यह सबसे ज्यादा विवादित स्थल है, यहां मस्जिद बनकर भी वह महत्व नहीं रहेगा। हम ऐसे तकनीकी धार्मिक इंजेक्शन का इस्तेमाल करके समझाएंगे। हम यह कह रहे हैं जहां रामलला विराजमान हैं, वहां मंदिर बनवा दिया जाए, थोड़ी दूूरी पर जो अविवादित जमीन है वहां मस्जिद बने। 
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प्रश्न : ‘जहां मस्जिद रही हो वहां फर्श से अर्श तक का हिस्सा मस्जिद का ही माना जाता है।’ ऐसी आस्था वालों को किस तरह संतुष्ट करेंगे?
सऊदी अरब, ईराक, टर्की और हिंदुस्तान में भी मस्जिद शिफ्ट करके सड़कें बनी हैं। जब उलमा और कई मौलाना कह रहे हैं कि मस्जिद को शिफ्ट किया जा सकता है। इसके लिए प्रोविजन है तो फिर इस तरह की फिजूल बात लेकर क्यों बैठें। अच्छा मान भी लें कि वह अल्लाह की ही जमीन है तो आप तो अपना हक छोड़ो न, अल्लाह तो राम के रूप में वहीं विराजमान रहेंगे। 
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प्रश्न: अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला मुसलमानों के पक्ष में आया तो क्या हिंदू पक्ष उसे स्वीकार करेगा?
हिंदू पक्ष कहां तक कोर्ट के ऐसे फैसले को स्वीकार करेगा, यह खुद में प्रश्न है। किसी एक पक्ष की जीत होती है तो दूसरे पक्ष को आघात तो पहुंचता ही है। मुस्लिम जीते तो मुसलमानों के प्रति हिंदुओं का प्रेम खत्म हो जाएगा, हिंदु जीते तो मुस्लिमों में उनके प्रति द्वेष बढ़ेगा। हमसे हिंदू पक्ष कह रहा है कि हम तो जीत रहे हैं, फिर आप हमारे जतन पर पानी क्यों फेर रहे हैं? पर मैं चाहता हूं कि ऐसा द्वेष दोनों समुदायों में न पैदा हो, इसलिए यह कैंपेन शुरू किया है, नहीं तो मुझे यह सब करने की क्या जरूरत, राम मंदिर तो है ही अभी वहां पर। 

प्रश्न: आप तौकीर रजा में कितना पोटेंशियल देखते हैं, वह मुसलमानों को मस्जिद शिफ्ट करने के लिए सहमत करा लेंगे?
देखिए समझौते की पहल में अलग-अलग लोग जुड़ें, चाहे वे किसी भी धार्मिक और राजनीतिक विचार धारा के क्यों न हों। देश में अमन और शांति ही हमारा उद्देश्य है। 

प्रश्न: आला हजरत दरगाह के मुरीदों की तादाद बहुत है, ऐसे में आप मंदिर मामले में सुलह का पैगाम लेकर दरगाह प्रमुख से क्यों नहीं मिले?
देखिए मैं पहली बार यहां आया हूं। दरगाह पर चादर चढ़ाने गया था, वहां कुछ लोगों ने स्वागत किया था। सबसे मिल रहा हूं। मैं तो समझता हूं कि इस बात पर सबकी सहमति है। शांतिपूर्ण समझौता हो, किसी की हार न हो, किसी की जीत न हो। 


प्रश्न: राम मंदिर न बनने पर हिंदुस्तान में सीरिया जैसे हालात पैदा होने के आपके बयान को लोग भय के रूप में ले रहे हैं?
मैंने आज एक ट्वीट किया- ‘जो व्यक्ति भयग्रस्त है वह सावधानी या चेतावनी को भी धमकी की तरह लेते हैं, हाथ मिलाने जाओ तो कहते हैं हमला कर दिया।’ यह गलत है न। देखिए बात को घुमाकर पेश किया जा रहा है। 
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