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उधार के कोच के सहारे विवि में खेलकूद

Wed, 25 Oct 2017 01:31 AM IST
बरेली।
बरेली। Updated Wed, 25 Oct 2017 01:31 AM IST
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Sports with the help of borrowed coach
ख्‍ाेल मैदान

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एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के खेलकूद उधार के कोच के सहारे चल रहे हैं। कभी स्पोर्ट्स स्टेडियम तो कभी भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के कोच बुलाए जाते हैं। ताजा उदाहरण क्रास कंट्री रेस के कैंप में देखने को मिला। इन दिनों नौ पुरुष और छह महिला खिलाड़ियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ट्रेनिंग का जिम्मा साई के एथलेटिक्स कोच को दिया गया है। सालाना एक करोड़ का बजट होने के बावजूद विश्वविद्यालय अपना कोच तक नियुक्ति नहीं कर सका है। यही कारण है कि अधिकतर खेलों का ठीक से प्रशिक्षण नहीं हो पाता और टीम फिटनेस टेस्ट में ही फेल हो जाती हैं। वॉलीबाल महिला, खो-खो और हैंडबाल की टीमें निरस्त हो चुकी हैं। विश्वविद्यालय के पास इन खेलों के कोच ही नहीं हैं। फिटनेस के लिए एक निजी कॉलेज के फिजिकल टीचर को बुलाया जाता है।
 
कैंप में भी ठीक से प्रशिक्षण नहीं मिल पाता
प्रशिक्षण के लिए वैसे सुबह और शाम का वक्त रखा जाता है। साई या स्टेडियम के कोच यहां वक्त निकालकर जाते जरूर हैं पर चार बजे के बाद वह अपने स्टेडियम लौट जाते हैं। खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही हो पाती है। पिछले साल सेपक टाकरा की टीम ने नार्थ जोन में दो गोल्ड मेडल जीते। इसके अलावा तीन अन्य खेलों में मेडल मिले। बाकी खेलों में विश्वविद्यालय की टीम कुछ खास नहीं कर सकी। अगर खिलाड़ी ठीक से तैयार किए होते तो शायद कुछ और मेडल मिल सकते थे। ठीक से प्रशिक्षण न मिलने के कारण सेपक टाकरा की टीम विश्वविद्यालय छोड़ गई।
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तो कहां जाता खिलाड़ियों से लिया गया पैसा
प्रत्येक छात्र से 150 रुपये खेल फीस ली जाती है। इसमें पचास रुपये विश्वविद्यालय के खाते में आते हैं। हर साल करीब एक करोड़ रुपये खेल कोटे में जमा होता है। इस बजट का तीस फीसदी भी खर्च नहीं हो पाता। विश्वविद्यालय चाहे तो इस बजट से एक कोच रख सकता है। इसका प्रस्ताव सिर्फ कागजों पर होकर रह जाता है। बरेली कॉलेज में ही पिछले साल 67.50 लाख रुपये खेल कोटे की फीस से आए। यहां भी खेलों का एक भी कोच नहीं। 
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फिजियोथैरेपी सेंटर भी खाली
विश्वविद्यालय में लाखों की लागत से फिजियोथैरेपी सेंटर बनाया गया है, लेकिन यहां भी प्रशिक्षण के लिए कोई नहीं है। लाखों रुपये के उपकरणों का खिलाड़ियों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।

वर्जन 
स्थायी कोच के लिए कई बार प्रस्ताव दिया गया, लेकिन हो नहीं पाया। मजबूरन साई या स्पोर्ट्स स्टेडियम से कोच बुलाने पड़ते हैं। 
- प्रोफेसर एके जेटली, क्रीड़ा सचिव
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