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46 साल से फिजियोथेरेपिस्ट नहीं, कैसे हो उपचार
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स्पोर्ट्स स्टेडियम में खिलाड़ियों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे अधिकारी
अफसरों का दावा- लिखा जा रहा है सीएमओ को पत्र, लेकिन सुनवाई नहीं
बरेली। स्पोर्ट्स स्टेडियम में खेल के साथ खिलवाड़ के मामले प्रकाश में आते रहे हैं, लेकिन अब खिलाड़ियों की सेहत से खिलवाड़ का मामला प्रकाश में आया है। खेल के दौरान खिलाड़ियों के चोटिल होने पर उन्हें प्राथमिक उपचार की सुविधा मुहैया कराने तक की व्यवस्था नहीं है। वहीं खेल निदेशालय के निर्देश के बावजूद पिछले करीब 46 साल से स्टेडियम में फिजियोथेरेपिस्ट की तैनाती न होना अफसरों की खिलाड़ियों को सेहतमंद बनाने की मंशा पर सवालिया निशान लगा रहा है।
खेल निदेशालय ने स्टेडियम में खिलाड़ियों को निशुल्क चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के साथ ही, फिजियोथेरेपिस्ट की तैनाती भी अनिवार्य की हुई है। बरेली के स्पोर्ट्स स्टेडियम में फिजियोथेरेपिस्ट की तैनाती तो दूर घायल होने पर खिलाड़ियों को स्ट्रेचर या फर्स्ट एड तक की सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। बताया जाता है कि पिछले दिनों बॉक्सिंग प्रैक्टिस के दौरान एक महिला खिलाड़ी गश खाकर गिर पड़ी थी। इस घटना की जानकारी अफसरों को घंटे भर बाद मिली तो आनन फानन में उसे पास के ही एक निजी अस्पताल में भर्ती कराकर उपचार कराया गया।
सात सौ खिलाड़ी हैं रजिस्टर्ड
स्पोर्ट्स स्टेडियम में क्रिकेट, फुटबाल, वॉलीबॉल, एथलेटिक्स, हॉकी, बैडमिंटन, तैराकी, वेट लिफ्टिंग, बास्केटबाल, हैंडबाल आदि खेलोें में करीब सात सौ खिलाड़ी पंजीकृत हैं। सूत्रों के मुताबिक प्रतिदिन सुबह और शाम की पालियों में 70 फीसदी खिलाड़ी प्रैक्टिस के लिए पहुंचते हैं। स्टेडियम के पास स्थित एक निजी अस्पताल के डॉक्टर के मुताबिक प्रतिदिन छह से आठ खिलाड़ी चोटिल होने पर उनके यहां इलाज कराने पहुंचे हैं। वहीं कई पीठ दर्द, मसल्स पेन आदि की समस्याएं भी लेकर आते हैं।
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स्टेडियम में खिलाड़ियों को प्राथमिक चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने की फिलहाल व्यवस्था नहीं है। जरूरत पड़ने पर निजी अस्पताल में इलाज कराया जाता है। फिजियोथेरेपिस्ट की तैनाती की जिम्मेदारी सीएमओ की है।
- विजय कुमार, आरएसओ
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अफसरों का दावा- लिखा जा रहा है सीएमओ को पत्र, लेकिन सुनवाई नहीं
बरेली। स्पोर्ट्स स्टेडियम में खेल के साथ खिलवाड़ के मामले प्रकाश में आते रहे हैं, लेकिन अब खिलाड़ियों की सेहत से खिलवाड़ का मामला प्रकाश में आया है। खेल के दौरान खिलाड़ियों के चोटिल होने पर उन्हें प्राथमिक उपचार की सुविधा मुहैया कराने तक की व्यवस्था नहीं है। वहीं खेल निदेशालय के निर्देश के बावजूद पिछले करीब 46 साल से स्टेडियम में फिजियोथेरेपिस्ट की तैनाती न होना अफसरों की खिलाड़ियों को सेहतमंद बनाने की मंशा पर सवालिया निशान लगा रहा है।
खेल निदेशालय ने स्टेडियम में खिलाड़ियों को निशुल्क चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के साथ ही, फिजियोथेरेपिस्ट की तैनाती भी अनिवार्य की हुई है। बरेली के स्पोर्ट्स स्टेडियम में फिजियोथेरेपिस्ट की तैनाती तो दूर घायल होने पर खिलाड़ियों को स्ट्रेचर या फर्स्ट एड तक की सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। बताया जाता है कि पिछले दिनों बॉक्सिंग प्रैक्टिस के दौरान एक महिला खिलाड़ी गश खाकर गिर पड़ी थी। इस घटना की जानकारी अफसरों को घंटे भर बाद मिली तो आनन फानन में उसे पास के ही एक निजी अस्पताल में भर्ती कराकर उपचार कराया गया।
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सात सौ खिलाड़ी हैं रजिस्टर्ड
स्पोर्ट्स स्टेडियम में क्रिकेट, फुटबाल, वॉलीबॉल, एथलेटिक्स, हॉकी, बैडमिंटन, तैराकी, वेट लिफ्टिंग, बास्केटबाल, हैंडबाल आदि खेलोें में करीब सात सौ खिलाड़ी पंजीकृत हैं। सूत्रों के मुताबिक प्रतिदिन सुबह और शाम की पालियों में 70 फीसदी खिलाड़ी प्रैक्टिस के लिए पहुंचते हैं। स्टेडियम के पास स्थित एक निजी अस्पताल के डॉक्टर के मुताबिक प्रतिदिन छह से आठ खिलाड़ी चोटिल होने पर उनके यहां इलाज कराने पहुंचे हैं। वहीं कई पीठ दर्द, मसल्स पेन आदि की समस्याएं भी लेकर आते हैं।
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स्टेडियम में खिलाड़ियों को प्राथमिक चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने की फिलहाल व्यवस्था नहीं है। जरूरत पड़ने पर निजी अस्पताल में इलाज कराया जाता है। फिजियोथेरेपिस्ट की तैनाती की जिम्मेदारी सीएमओ की है।
- विजय कुमार, आरएसओ