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सपा के दफ्तर का मिजाज ही बदल गया

Fri, 20 Jan 2017 01:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली Updated Fri, 20 Jan 2017 01:01 AM IST
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SP's office changed the mood
SP's office changed the mood - फोटो : बरेली, अमर उजाला
सियासत भी अजीब चीज है। सब कुछ कितनी जल्दी बदल जाता है। नए अध्यक्ष के आने से पहले ही पुरानी तख्तियां गायब कर दी गईं। बरेली में समाजवादी पार्टी का दफ्तर कभी वीरपाल और उनके समर्थकों की भीड़ से गुलजार रहता था। एकछत्र राज। बृहस्पतिवार को दफ्तर का नजारा बदला था। अंदर से बाहर तक खचाखच भीड़ थी कई पुराने चेहरे नदारद थे। जो दो चार नजर भी आ रहे थे, वह वक्त के साथ बदले हुए थे। बाकी युवा चेहरे और जोश उत्साह में शुभलेश यादव जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे। एक बात तो थी कि पुराने अध्यक्ष के प्रति जो नाराजगी थी उसे बहुत प्रकट नहीं किया गया। नई टीम के आने से पहले जरूर कुछ लोग अति उत्साह में नजर आ रहे थे लेकिन उनके आते ही काफी संयम बरता गया।
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जिलाध्यक्ष बनने का संकेत पाकर शुभलेश यादव एक दिन पहले ही लखनऊ चले गए थे। वहां सुबह नौ बजे मनोनयन पत्र लेकर बरेली लौटे।  प्रमोद विष्ट और सत्येंद्र यादव भी उनके साथ ही थे। मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ पोटो खिंचवा कर तीनों बरेली लौट आए। शिवपाल सिंह के प्रदेश अध्यक्ष बनते ही अखिलेश समर्थक प्रमोद विष्ट को जिला महासचिव पद से हटा दिया गया था। सत्येंद्र यादव भी अखिलेश समर्थक होने की वजह से वीरपाल की अगुवाई वाली जिला कार्यकारिणी में किनारे लगा दिए गए थे। नए जिलाध्यक्ष को सप्ताह भर के अंदर जिला कार्यकारिणी के गठन के निर्देश दिए गए हैं।  
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1992 में जब से मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी बनाई। बरेली में इस पार्टी के क्षत्रप वीरपाल ही रहे। दो दशक से भी ज्यादा समय तक जिलाध्यक्षी उनके हाथ में रही। सपा के दफ्तर में वही फटक पाया जिसने वीरपाल का समर्थन किया। वीरपाल विरोधी सपा नेता दफ्तर के आस-पास भी दिखाई नहीं देते थे। 13 तारीख को चुनाव आयोग के फैसले के बाद जब समाजवादी पार्टी और चुनाव चिह्न अखिलेश यादव को मिल गया तो वीरपाल और उनके समर्थक भी अपने युग का अवसान समझ गए थे। 19 जनवरी को शुभलेश यादव के जिलाध्यक्ष पद पर मनोनीत होते ही सपा के दफ्तर का नजारा भी पूरी तरह बदल गया। कभी वीरपाल के नजदीकी रहे जफर बेग अखिलेश खेमे होकर अपनी कुर्सी पर विराजमान थे। अखिलेश सरकार में दर्जा मंत्री साधना मिश्रा की वीरपाल से कभी नहीं बनी। वह दफ्तर में भी नहीं दिखती थीं। शुभलेश के जिलाध्यक्ष बनते ही साधना मिश्रा के अलावा सपा महिला मोर्चा की वीरपाल समर्थक जिलाध्यक्ष रेहाना बी, पूर्व जिलाध्यक्ष की नाराजगी की वजह से जिलाध्यक्ष पद से हटाई गईं भारती चौहान समेत तमाम वो चेहरे मौजूद थे जो मुख्यधारा से कटे रहते थे। वीरपाल के साथ वाले चेहरे भी भीड़ में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर अखिलेशवादी नजर आ रहे थे। युवाओं की भीड़ से लग रहा था कि दफ्तर भले ही पुराना हो लेकिन सपा अब नई हो चुकी है। 
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शुभलेश यादव का राजनीतिक सफर
सदर तहसील के परतासपुर गांव के रहने वाले सपा के नए जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव ने अपने राजनीतिक सफर की शुरूआत 1985 में रुहेलखंड विश्वविद्यालय  छात्रसंघ से की थी। कानून में स्नातक शुभलेश 1995 में सपा छात्रसभा के जिलाध्यक्ष, 1999 में सपा युवजन सभा के जिलाध्यक्ष, 2006 में सपा के जिला सचिव और इसके बाद सपा के जिला महासचिव और जिला उपाध्यक्ष रहे। 2010 में तत्कालीन जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव से मतभेदों की वजह से सपा की जिला कार्यकारिणी से हटा दिए गए। अपने राजनीतिक गुरु वीरपाल सिंह यादव से मतभेदों की वजह से सात साल तक उनको संगठन में कोई पद नहीं मिला। अखिलेश यादव के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते ही शुभलेश ने अपने गुरु की कुर्सी पर ही कब्जा कर लिया। 
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