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कुछ डॉक्टरों ने तो लिखनी शुरू कर दीं जेनेरिक दवाएं 

Wed, 26 Apr 2017 01:54 AM IST
बरेली।  
बरेली।   Updated Wed, 26 Apr 2017 01:54 AM IST
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Some doctors write Started generic medicines
Some doctors write Started generic medicines - फोटो : बरेली, अमर उजाला
जेनेरिक दवाआें पर मचे घमासान के बीच एक राहत की खबर आई है। शहर के कुछ डॉक्टरों ने मरीजों की मांग पर जेनेरिक दवाएं लिखनी शुरू कर दी हैं। हालांकि इनकी उपलब्धता सिर्फ गिने चुने मेडिकल स्टोर्स पर ही है। वहीं, कालीबाड़ी स्थित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र में पिछले दो दिनाें में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। 
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सूचना मिल रही है कि रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज के डॉ. ओपी अग्रवाल, डॉ. बीके अरोरा, एसआरएमएस के डॉ. अमरेश कुमार अग्रवाल, सर्जन और फिजिशियन डॉ. सुशील टंडन, ईएनटी विशेष डॉ. संदीप कुमार और डॉ. अजय खन्ना ने जेनेरिक दवाएं लिखकर मरीजों में एक आस जगाई है। इनके पर्चे सोमवार को जारी हुए हैं, जिसमें जेनेरिक दवा अंग्रेजी के कैपिटल अक्षराें में लिखी हुई है। 
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अमर उजाला ने जब इसकी तस्दीक करने के लिए प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र का दौरा किया तो पाया कि यहां रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज के डॉ. ओपी अग्रवाल, डॉ. बीके अरोरा और एसआरएमएस के डॉ. अमरेश कुमार के पर्चे पर दवाएं ली गई हैं। मरीजों ने औषधि केंद्र में बैठे विक्रेता विवेक को बताया कि उन्हाेंने खुद डॉक्टराें से बात कर दवाएं लिखवाई हैं। डॉक्टर खुद से भी जेनेरिक दवा लिख रहे हैं। 
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दो दिन में बढ़ गई औषधि केंद्र में भीड़
कालीबाड़ी के जन औषधि केंद्र में इस समय 400 से अधिक जेनेरिक दवाएं मौजूद हैं। विक्रेता विवेक ने बताया कि शनिवार के बाद जबसे आदेश लागू हुआ है तब से फुर्सत नहीं मिल रही है। एक तो लोग ब्रांड की दवा लिखकर लाते हैं तो उनका सॉल्ट नाम ढूंढना पड़ता है, ऐसे में भीड़ लग ही जाती है। दवा खरीदाराें की संख्या रविवार के बाद से ही डबल हो गई है। यहां दवा खरीदने आए सेंथल के आशीष मैसी ने बताया कि वे अपने पिता की बीपी और शुगर की दवा अभी तक 3000 रुपये में लेते आए हैं, लेकिन यहां एक माह की यही दवा 300 में ले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे हम जैसे प्राइवेट नौकरी करने वालों की जेब का भार काफी कम हुआ है। डेलापीर के अरविंद भी बीपी की दवा लेने आए थे। बोले, 95 रुपये में अब तक गोलियां ली हैं, यहां यही पत्ता चार रुपये में हैं। 


केमिस्ट बोले, जेनेरिक से अच्छा डीपीसीओ में लाएं दवाएं 
केमिस्ट एसोसिएशन के महानगर अध्यक्ष दुर्गेश खटवानी का कहना है कि जेनेरिक दवाआें को लागू करना अच्छा फैसला है, लेकिन सरकार को दवाआें को डीपीसीओ (ड्रग प्राइस कंट्रोल आर्डर) में लाना चाहिए। ताकि सभी दवाआें का एक दाम फिक्स हो जाए और पूरे देश में कोई भी दवा को ऊंचे दाम पर न बेच पाए। इससे ब्रांड की दवा तो बिक सकेगी, लेकिन ऊंचे दाम पर नहीं। उन्होंने बताया कि आज जो आईवी सेट 190 रुपये में अस्पतालों में मिलता है उसकी असली कीमत मात्र नौ रुपए है। ऐसे में कहां तक आम आदमी अपने पैसे इलाज में लुटाएगा। 
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