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रजिस्ट्री विभाग ने ब्योरा ही नहीं दिया तो कैसे फ्रीज कर दी दुकान
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बरेली। फतेहगंज पश्चिमी के कुख्यात स्मैक तस्कर नन्हे लंगड़ा की फ्रीज की गई दुकान की रजिस्ट्री हो जाने के मामले में पुलिस की सफाई पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि स्मैक तस्कर ने जिस दुकान को बेचा है, रजिस्ट्री विभाग ने उसका ब्योरा ही पुलिस को नहीं दिया। सवाल उठ रहा है कि अगर पुलिस को इस दुकान का ब्योरा ही नहीं मिला तो उसे फ्रीज कर उस पर नोटिस कैसे लगा दिया गया।
पिछले दिनों पुलिस ने स्मैक तस्करों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की थी। करीब सौ करोड़ रुपये की संपत्ति फ्रीज की गई और इससे ज्यादा की संपत्ति पर बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया गया। इस दौरान फतेहगंज पश्चिमी के मोहल्ला सराय में रहने वाले स्मैक तस्कर रियासत उर्फ नन्हे लंगड़ा और उसके बेटे यूसुफ की करीब 7.84 करोड़ रुपये की आवासीय और कृषि भूमि, आलीशान कोठी और कस्बे के मुख्य बाजार में स्थित दोमंजिला दुकान फ्रीज की गई थी। मगर 15 जुलाई को कस्बे में फ्रीज की गई हाईवे स्थित उसकी दुकान रिछा में रहने वाले तंजीम अहमद को बेच दी गई। इस दुकान का बैनामा नन्हे लंगड़ा के बेटे यूसुफ, यूनुस और पत्नी शकीना आदि ने रिछा में रहने वाले तंजीम अहमद के नाम किया।
मामला खुलने के बाद पुलिस और रजिस्ट्री विभाग एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ने में लगे हैं। रजिस्ट्री विभाग का दावा है कि पुलिस ने इस दुकान को फ्रीज करने की रिपोर्ट ही उसे नहीं भेजी गई थी। पुलिस का कहना है कि नन्हे लंगड़ा और उसके परिवार की संपत्ति का ब्योरा रजिस्ट्री विभाग से ही लिया गया था। इसमें इस दुकान का ब्योरा नहीं था। पुलिस के दावे पर सवाल उठ रहा है कि जब दुकान का ब्योरा ही नहीं था तो उसे फ्रीज करके उस पर सफेमा का नोटिस क्यों लगा दिया गया।
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रजिस्ट्री विभाग में तलाशे जा रहे दस्तावेज
नन्हे लंगड़ा की एक दुकान बिकने के बाद रजिस्ट्री विभाग में अब उसकी सारी संपत्ति के रिकॉर्ड की फिर से जांच पड़ताल शुरू हो गई है। यह देखा जा रहा है कि उसकी संपत्ति के दस्तावेजों पर फ्रीज होने संबंधी सफेमा का आदेश दर्ज है या नहीं।
पुलिस रिकॉर्ड में फरार, फिर भी कस्बे में घूम रहे हैं कई तस्कर
पुलिस रिकॉर्ड में फरार बताए गए फतेहगंज पश्चिमी के कई स्मैक तस्करों के कस्बे में ही होने की चर्चा भी कई दिनों से आम है। इन स्मैक तस्करों में सबसे प्रमुख नाम सोनू कालिया का है, जिसका कुछ समय पहले सिपाही अमरदीप से बातचीत का एक ऑडियो भी वायरल हुआ था। इस ऑडियो में सिपाही बड़े साहब का नाम लेते हुए 40 लाख रुपये की मांग कर रहा था। ऑडियो वायरल होने के बाद सिपाही को तो जेल भेज दिया गया था लेकिन सोनू कालिया हाथ नहीं आया। अब बताया जा रहा है कि कुछ समय तक अंडरग्राउंड रहने के बाद पुलिस की सांठगांठ से सोनू कालिया फिर कस्बे में लौट आया है। कुछ और स्मैक तस्करों ने कस्बे में सक्रिय होकर अपना धंधा जमाना शुरू कर दिया है।
नन्हे लंगड़ा की सारी संपत्ति का ब्योरा रजिस्ट्री विभाग से ही मांगा गया था। मगर जिस दुकान की बिक्री हुई है, उसका ब्योरा उस रिकॉर्ड में नहीं था। यह रजिस्ट्री विभाग वाले ही बता सकते हैं कि उस दुकान का ब्योरा उसमें क्यों नहीं था। - राजकुमार अग्रवाल, एसपी देहात
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पिछले दिनों पुलिस ने स्मैक तस्करों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की थी। करीब सौ करोड़ रुपये की संपत्ति फ्रीज की गई और इससे ज्यादा की संपत्ति पर बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया गया। इस दौरान फतेहगंज पश्चिमी के मोहल्ला सराय में रहने वाले स्मैक तस्कर रियासत उर्फ नन्हे लंगड़ा और उसके बेटे यूसुफ की करीब 7.84 करोड़ रुपये की आवासीय और कृषि भूमि, आलीशान कोठी और कस्बे के मुख्य बाजार में स्थित दोमंजिला दुकान फ्रीज की गई थी। मगर 15 जुलाई को कस्बे में फ्रीज की गई हाईवे स्थित उसकी दुकान रिछा में रहने वाले तंजीम अहमद को बेच दी गई। इस दुकान का बैनामा नन्हे लंगड़ा के बेटे यूसुफ, यूनुस और पत्नी शकीना आदि ने रिछा में रहने वाले तंजीम अहमद के नाम किया।
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मामला खुलने के बाद पुलिस और रजिस्ट्री विभाग एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ने में लगे हैं। रजिस्ट्री विभाग का दावा है कि पुलिस ने इस दुकान को फ्रीज करने की रिपोर्ट ही उसे नहीं भेजी गई थी। पुलिस का कहना है कि नन्हे लंगड़ा और उसके परिवार की संपत्ति का ब्योरा रजिस्ट्री विभाग से ही लिया गया था। इसमें इस दुकान का ब्योरा नहीं था। पुलिस के दावे पर सवाल उठ रहा है कि जब दुकान का ब्योरा ही नहीं था तो उसे फ्रीज करके उस पर सफेमा का नोटिस क्यों लगा दिया गया।
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रजिस्ट्री विभाग में तलाशे जा रहे दस्तावेज
नन्हे लंगड़ा की एक दुकान बिकने के बाद रजिस्ट्री विभाग में अब उसकी सारी संपत्ति के रिकॉर्ड की फिर से जांच पड़ताल शुरू हो गई है। यह देखा जा रहा है कि उसकी संपत्ति के दस्तावेजों पर फ्रीज होने संबंधी सफेमा का आदेश दर्ज है या नहीं।
पुलिस रिकॉर्ड में फरार, फिर भी कस्बे में घूम रहे हैं कई तस्कर
पुलिस रिकॉर्ड में फरार बताए गए फतेहगंज पश्चिमी के कई स्मैक तस्करों के कस्बे में ही होने की चर्चा भी कई दिनों से आम है। इन स्मैक तस्करों में सबसे प्रमुख नाम सोनू कालिया का है, जिसका कुछ समय पहले सिपाही अमरदीप से बातचीत का एक ऑडियो भी वायरल हुआ था। इस ऑडियो में सिपाही बड़े साहब का नाम लेते हुए 40 लाख रुपये की मांग कर रहा था। ऑडियो वायरल होने के बाद सिपाही को तो जेल भेज दिया गया था लेकिन सोनू कालिया हाथ नहीं आया। अब बताया जा रहा है कि कुछ समय तक अंडरग्राउंड रहने के बाद पुलिस की सांठगांठ से सोनू कालिया फिर कस्बे में लौट आया है। कुछ और स्मैक तस्करों ने कस्बे में सक्रिय होकर अपना धंधा जमाना शुरू कर दिया है।
नन्हे लंगड़ा की सारी संपत्ति का ब्योरा रजिस्ट्री विभाग से ही मांगा गया था। मगर जिस दुकान की बिक्री हुई है, उसका ब्योरा उस रिकॉर्ड में नहीं था। यह रजिस्ट्री विभाग वाले ही बता सकते हैं कि उस दुकान का ब्योरा उसमें क्यों नहीं था। - राजकुमार अग्रवाल, एसपी देहात