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हटाए गए स्मार्ट सिटी के घोटालेबाज मिशन मैनेजर

Wed, 18 Dec 2019 01:59 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 18 Dec 2019 01:59 AM IST
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सेवाएं समाप्त कर बंगले का आवंटन भी हुआ रद्द
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बरेली। बरेली स्मार्ट सिटी प्राइवेट लिमिटेड में पूर्व पीसीएस अफसर को नियुक्त कर सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराने के मामले में आखिरकार कमिश्नर और डीएम ने कार्रवाई कर दी है। कमिश्नर रणवीर प्रसाद के आदेश पर स्मार्ट सिटी के घोटालेबाज मिशन मैनेजर सतीश कुमार को हटा दिया है। नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. ने उनकी सेवाएं समाप्त करने की पुष्टि की है। इसके अलावा डीएम ने सतीश कुमार को एडीएम कंपाउंड में सरकारी आवास के आवंटन को भी निरस्त कर दिया है।
यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) में 126 करोड़ रुपये के घोटाले में शामिल पूर्व पीसीएस अफसर को स्मार्ट सिटी में मिशन मैनेजर पद पर नियुक्ति कर दी गई थी। इस खुलासे के बाद स्मार्ट सिटी बनाने में जुटे अफसरों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए थे। डीएम नितीश कुमार और नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. का कहना था कि वह घोटालेबाज सतीश कुमार से जुड़े इस मामले से अनभिज्ञ थे। हालांकि सतीश कुमार की सच्चाई आने के बाद कमिश्नर रणवीर प्रसाद के आदेश पर नगर आयुक्त एवं स्मार्ट सिटी के सीईओ सैमुअल पॉल एन. ने घोटालेबाज सतीश कुमार की स्मार्ट सिटी के मिशन मैनेजर पद से सेवाएं समाप्त कर दी गई है। अब स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट के लिए नए मिशन मैनेजर की नियुक्ति की तैयारी चल रही है। इधर डीएम नितीश कुमार ने भी एडीएम कंपाउंड में सतीश कुमार के नाम से आवास आवंटन को निरस्त कर दिया है।
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पूर्व पीसीएस अफसर सतीश कुमार के खिलाफ जो कार्रवाई होगी, वह तो जांच के बाद शासन ही तय करेगा लेकिन उनके सरकारी आवास के आवंटन को रद्द कर दिया है। - नितीश कुमार, जिलाधिकारी
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मेयर ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र उच्च स्तरीय कमेटी से हो जांच
बरेली। स्मार्ट सिटी में घोटालेबाज पूर्व पीसीएस सतीश कुमार की नियुक्ति का अमर उजाला ने खुलासा किया तो नगर निगम में हड़कंप मचा है। मेयर उमेश गौतम ने इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय कमेटी से जांच कराने की मांग की है। मेयर का कहना है कि यह सामने आना जरूरी है कि जिस सतीश कुमार की पुलिस एक साल से तलाश कर रही थी, 22 सौ करोड़ से अधिक के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में उसे रखने की क्या जरूरत पड़ी। इसके पीछे मकसद क्या था। उन्होंने कहा कि नगर आयुक्त कह रहे हैं कि आरोप साबित नहीं हुआ लेकिन क्या साफ छवि के व्यक्ति को नियुक्त नहीं किया जा सकता था। यह एक गंभीर विषय है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। यह भी पता लगना चाहिए कि प्रशासन में वे कौन से अधिकारी हैं, जिनकी विशेष कृपा से सतीश कुमार सर्किट में ठहरे थे।
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