{"_id":"6312650a4f5b4f0840554944","slug":"smack-smuggling-business-started-again-in-fatehganj-west-bareilly-news-bly4963777124","type":"story","status":"publish","title_hn":"फतेहगंज पश्चिमी में फिर खड़ा होने लगा स्मैक तस्करी का कारोबार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फतेहगंज पश्चिमी में फिर खड़ा होने लगा स्मैक तस्करी का कारोबार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। फतेहगंज पश्चिमी में प्रदेश सरकार के अभियान के तहत तमाम स्मैक तस्करों को जेल भेजे जाने और उनकी संपत्तियों को नेस्तनाबूद करने के बाद पुलिस की ही सांठगांठ से स्मैक का कारोबार नए सिरे से खड़ा होने लगा है। पुलिस की शह पर कस्बे के कुख्यात सट्टेबाज ने स्मैक के साम्राज्य पर कब्जा करना शुरू कर दिया है। इसी शख्स का दूसरे स्मैक तस्करों से टकराव होने के बाद हाल ही में पुलिस चौकी में पंचायत कराई गई थी।
सट्टेबाज से स्मैक तस्कर बने अनवर लंगड़ा की पुलिस की पहले से नजदीकियां बताई जाती हैं। पिछले साल जब कस्बे के बड़े तस्करों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के बाद स्मैक कारोबार में जगह बनी तो अनवर लंगड़ा ने सट्टे के साथ यहां भी पैर फैलाने शुरू कर दिए। इस दौरान पुलिस एक तरफ प्रदेश सरकार के निर्देश पर स्मैक तस्करों के खिलाफ अभियान चला रही थी तो दूसरी तरफ उगाही के साथ स्मैक कारोबार का एक हाथ से दूसरे हाथ में शिफ्ट कराने की कोशिश में भी जुटी हुई थी। इसका खुलासा एक सिपाही का स्मैक तस्कर से बातचीत का ऑडियो वायरल होने के बाद हुआ जो ‘साहब’ के नाम पर केस से बचाने के लिए दस लाख रुपये मांग रहा था। इस सिपाही को बाद में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
चंद दिनों में अनवर लंगड़ा फतेहगंज पश्चिमी में स्मैक तस्करी का सबसे बड़ा नाम बन चुका है। जेल गए जिन स्मैक तस्करों के गुर्गे उनका कारोबार संभालने में जुटे हुए हैं, उनसे अनवर लंगड़ा के झगड़े-झंझट भी शुरू हो गए हैं। पिछले दिनों ऐसे ही एक विवाद के बाद कस्बे की पुलिस चौकी में स्मैक तस्करों की पंचायत कराई गई थी। कस्बे के एक पत्रकार का नाम भी पुलिस और स्मैक तस्करों के बीच की कड़ी के तौर पर अक्सर आता रहता है।
विज्ञापन
स्थिति यह है कि महीनों तक बड़े पैमाने पर कार्रवाई किए जाने के बावजूद फतेहगंज पश्चिमी में स्मैक तस्करी का कारोबार न बंद हुआ है न कमजोर पड़ा है। यूपी और यूपी से बाहर तमाम शहरों में फतेहगंज पश्चिमी से सप्लाई होने वाली स्मैक अब भी पकड़ी जा रही है। करोड़ों की संपत्तियां खड़ी करने वाले स्मैक तस्कर कस्बे के तमाम बेरोजगार युवाओं को भी लुभा रहे हैं। तमाम युवा मोटी कमाई के चक्कर में स्मैक के सप्लायर बन रहे हैं। (संवाद)
हल्द्वानी पुलिस को जिस स्मैक तस्कर की तलाश
फतेहगंज की पुलिस अच्छी तरह जानती है उसे
फतेहगंज पश्चिमी से बड़े पैमाने पर स्मैक हल्द्वानी समेत उत्तराखंड के तमाम शहरों में भी पहुंचती है। कुछ समय पहले हल्द्वानी पुलिस ने स्मैक की खेप के साथ शारिक अली और शाहिद नाम के दो युवकों को गिरफ्तार किया था जिन्होंने मीरगंज के तस्कर असद का नाम पुलिस को बताया था। आठ महीने से हल्द्वानी पुलिस असद को तलाश कर रही है, मीरगंज और फतेहगंज पुलिस से भी दरियाफ्त कर चुकी है लेकिन असद के बारे में उसे कोई जानकारी नहीं मिली है। दरअसल, असद कुख्यात स्मैक तस्कर शराफत अंसारी का बेटा है। उसका ठिकाना फतेहगंज पश्चिमी है जहां वह अवैध रूप से मेडिकल प्रैक्टिस भी करता है लेकिन वह स्मैक की सप्लाई मीरगंज से करता है ताकि कहीं बाहर की पुलिस के हाथ उस तक आसानी से न पहुंच सकें। दिलचस्प यह है कि असद को एक बार उत्तराखंड पुलिस भी एनडीपीएस एक्ट में जेल भेज चुकी है। फतेहगंज पुलिस के लिए भी वह परिचित नाम है लेकिन फिर भी हल्द्वानी पुलिस की आठ महीने से उसकी तलाश पूरी होने में नहीं आ रही है।
फहीम भी फतेहगंज का स्मैक तस्कर
हल्द्वानी पुलिस फतेहगंज पश्चिमी के ही स्मैक तस्कर फहीम अंसारी को भी तलाश नहीं कर पा रही है। फहीम के पिता पहले रबर फैक्टरी में बतौर टेलर नौकरी करते थे। फैक्टरी बंद होने के बाद माली हालत खराब हुई तो फहीम पढ़ाई छोड़कर स्मैक तस्करी के धंधे में उतर गया। कुछ ही समय में वह करोड़ों की हस्ती बन गया।
भाजपा नेता ने की थी कल्लू डॉन की
सिफारिश, वायरल हुआ था ऑडियो
फतेहगंज पश्चिमी में स्मैक तस्करी का कारोबार तस्करों के साथ पुलिस और नेताओं के गठजोड़ का नतीजा है। हाल ही में जिस कुख्यात तस्कर कल्लू डॉन की इमारत में चल रहा भाजपा नेता का शोरूम पुलिस ने सील किया है, उसने चार साल पहले तत्कालीन थाना प्रभारी से कल्लू डॉन पर कार्रवाई न करने की एवज ने चार लाख रुपये देने की पेशकश की थी। यह ऑडियो वायरल हो गया था।
विज्ञापन
सट्टेबाज से स्मैक तस्कर बने अनवर लंगड़ा की पुलिस की पहले से नजदीकियां बताई जाती हैं। पिछले साल जब कस्बे के बड़े तस्करों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के बाद स्मैक कारोबार में जगह बनी तो अनवर लंगड़ा ने सट्टे के साथ यहां भी पैर फैलाने शुरू कर दिए। इस दौरान पुलिस एक तरफ प्रदेश सरकार के निर्देश पर स्मैक तस्करों के खिलाफ अभियान चला रही थी तो दूसरी तरफ उगाही के साथ स्मैक कारोबार का एक हाथ से दूसरे हाथ में शिफ्ट कराने की कोशिश में भी जुटी हुई थी। इसका खुलासा एक सिपाही का स्मैक तस्कर से बातचीत का ऑडियो वायरल होने के बाद हुआ जो ‘साहब’ के नाम पर केस से बचाने के लिए दस लाख रुपये मांग रहा था। इस सिपाही को बाद में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
विज्ञापन
चंद दिनों में अनवर लंगड़ा फतेहगंज पश्चिमी में स्मैक तस्करी का सबसे बड़ा नाम बन चुका है। जेल गए जिन स्मैक तस्करों के गुर्गे उनका कारोबार संभालने में जुटे हुए हैं, उनसे अनवर लंगड़ा के झगड़े-झंझट भी शुरू हो गए हैं। पिछले दिनों ऐसे ही एक विवाद के बाद कस्बे की पुलिस चौकी में स्मैक तस्करों की पंचायत कराई गई थी। कस्बे के एक पत्रकार का नाम भी पुलिस और स्मैक तस्करों के बीच की कड़ी के तौर पर अक्सर आता रहता है।
विज्ञापन
स्थिति यह है कि महीनों तक बड़े पैमाने पर कार्रवाई किए जाने के बावजूद फतेहगंज पश्चिमी में स्मैक तस्करी का कारोबार न बंद हुआ है न कमजोर पड़ा है। यूपी और यूपी से बाहर तमाम शहरों में फतेहगंज पश्चिमी से सप्लाई होने वाली स्मैक अब भी पकड़ी जा रही है। करोड़ों की संपत्तियां खड़ी करने वाले स्मैक तस्कर कस्बे के तमाम बेरोजगार युवाओं को भी लुभा रहे हैं। तमाम युवा मोटी कमाई के चक्कर में स्मैक के सप्लायर बन रहे हैं। (संवाद)
हल्द्वानी पुलिस को जिस स्मैक तस्कर की तलाश
फतेहगंज की पुलिस अच्छी तरह जानती है उसे
फतेहगंज पश्चिमी से बड़े पैमाने पर स्मैक हल्द्वानी समेत उत्तराखंड के तमाम शहरों में भी पहुंचती है। कुछ समय पहले हल्द्वानी पुलिस ने स्मैक की खेप के साथ शारिक अली और शाहिद नाम के दो युवकों को गिरफ्तार किया था जिन्होंने मीरगंज के तस्कर असद का नाम पुलिस को बताया था। आठ महीने से हल्द्वानी पुलिस असद को तलाश कर रही है, मीरगंज और फतेहगंज पुलिस से भी दरियाफ्त कर चुकी है लेकिन असद के बारे में उसे कोई जानकारी नहीं मिली है। दरअसल, असद कुख्यात स्मैक तस्कर शराफत अंसारी का बेटा है। उसका ठिकाना फतेहगंज पश्चिमी है जहां वह अवैध रूप से मेडिकल प्रैक्टिस भी करता है लेकिन वह स्मैक की सप्लाई मीरगंज से करता है ताकि कहीं बाहर की पुलिस के हाथ उस तक आसानी से न पहुंच सकें। दिलचस्प यह है कि असद को एक बार उत्तराखंड पुलिस भी एनडीपीएस एक्ट में जेल भेज चुकी है। फतेहगंज पुलिस के लिए भी वह परिचित नाम है लेकिन फिर भी हल्द्वानी पुलिस की आठ महीने से उसकी तलाश पूरी होने में नहीं आ रही है।
फहीम भी फतेहगंज का स्मैक तस्कर
हल्द्वानी पुलिस फतेहगंज पश्चिमी के ही स्मैक तस्कर फहीम अंसारी को भी तलाश नहीं कर पा रही है। फहीम के पिता पहले रबर फैक्टरी में बतौर टेलर नौकरी करते थे। फैक्टरी बंद होने के बाद माली हालत खराब हुई तो फहीम पढ़ाई छोड़कर स्मैक तस्करी के धंधे में उतर गया। कुछ ही समय में वह करोड़ों की हस्ती बन गया।
भाजपा नेता ने की थी कल्लू डॉन की
सिफारिश, वायरल हुआ था ऑडियो
फतेहगंज पश्चिमी में स्मैक तस्करी का कारोबार तस्करों के साथ पुलिस और नेताओं के गठजोड़ का नतीजा है। हाल ही में जिस कुख्यात तस्कर कल्लू डॉन की इमारत में चल रहा भाजपा नेता का शोरूम पुलिस ने सील किया है, उसने चार साल पहले तत्कालीन थाना प्रभारी से कल्लू डॉन पर कार्रवाई न करने की एवज ने चार लाख रुपये देने की पेशकश की थी। यह ऑडियो वायरल हो गया था।