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Bareilly News: टूरिस्ट परमिट पर फुटकर सवारियां लेकर गैर प्रांतों तक दौड़ रहीं स्लीपर बसें

Sun, 27 Sep 2026 01:28 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 27 Sep 2026 01:28 AM IST
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Sleeper buses operating on tourist permits are ferrying individual passengers to other states.
सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर किया जा रहा संचालन, माहभर में 119 बसों के खिलाफ हो चुकी कार्रवाई
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बरेली। गौतमबुद्ध नगर में चलती स्लीपर बस में आग से नौ यात्रियों की मौत के बाद बरेली होकर देश के कई राज्यों की बीच संचालित स्लीपर बसों की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं। ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट (एआईटीपी) के तहत संचालित होने वाली इन बसों में लोकल बसों की तरह सवारियों को बैठाया और उतारा जा रहा है। माहभर में बरेली मंडल में 119 स्लीपर और टूरिस्ट बसों पर परिवहन विभाग की कार्रवाई इसका प्रमाण है।
परिवहन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, जिन बसों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, वे नगालैंड, मिजोरम, मणिपुर, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड आदि राज्यों में पंजीकृत हैं। इनमें से कई के परमिट की मियाद खत्म हो चुकी थी। कुछ के पास फिटनेस प्रमाण पत्र नहीं था। चार मॉडिफाइड बसों को भी पकड़ा गया। इन बसों में सुरक्षा की अनदेखी आम बात है। कई बसों में आग बुझाने की व्यवस्था तक नहीं होती।
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रोडवेज बसों में भी सुरक्षा नियमों पर सवाल उठते रहते हैं। वर्ष 2023 में रुहेलखंड डिपो की बरेली-कानपुर के बीच चलने वाली एसी बस में शाहजहांपुर के मदनापुर के पास आग लग चुकी है। इस बस में भी अग्निश्मन यंत्र नहीं थे। इस मामले में तत्कालीन एआरएम को निलंबित किया गया था।
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मंडल में 52 स्लीपर बसें, 45 का हो रहा संचालन
परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मंडल में कुल 52 स्लीपर बसें हैं। इनके पास ऑल यूपी और एआईटीपी परमिट भी हैं। इनमें शाहजहांपुर में सबसे ज्यादा 26, बरेली में 21 और बदायूं में पांच स्लीपर बसें पंजीकृत हैं। बरेली से पांच, बदायूं से 17 और शाहजहांपुर से 23 बसाें का संचालन हो रहा है। पीलीभीत में कोई स्लीपर बस पंजीकृत नहीं है और न ही वहां से ऐसी बसों का संचालन हो रहा है।
एक हजार से ज्यादा ट्रैवल एजेंसियां, कई अपंजीकृत
बरेली जिले में एक हजार से ज्यादा ट्रैवल एजेंसियां हैं। इनमें से कई बिना पंजीकरण के ही काम कर रही हैं। कई बड़ी ट्रैवल एजेंसियों के बरेली में कार्यालय भी हैं। ये एजेंसिया देश-विदेश का टूर कराती हैं। कई ट्रैवल एजेंसियों के पास अपने वाहन तक नहीं हैं। इनके पास एआईटीपी भी नहीं है। इसके बावजूद ये एजेंसिया पंजीकृत एजेंसियों से सांठगांठ कर बिचौलिया के रूप में चल रही हैं। संवाद

ये हैं नियम
- एआईटीपी पर संचालित बसों के चालक-परिचालक को यात्रियों की लिखित या ऑनलाइन सूची रखना अनिवार्य होता है। इसके बिना यात्रियों को बैठाना वर्जित है।
- टूरिस्ट वाहनों और बसों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी) और पैनिक बटन लगाना अनिवार्य है।
- एआईटीपी पूरे भारत में मान्य होता है। इसे कम से कम तीन महीने या एक साल के लिए लिए ऑनलाइन लिया जा सकता है।
- एआईटीपी का इस्तेमाल देशभर में पर्यटकों और उनके सामान को एक से दूसरे राज्य ले जाने के लिए किया जाता है।
- इन वाहनों को लोकल रूट पर आम बस सेवा की तरह चलाने की अनुमति नहीं होती है।
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पिछले माह मंडलभर में अभियान चलाकर 119 अवैध रूप से संचालित बसों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। चारों जिलों के एआरटीओ को अवैध रूप से संचालित स्लीपर व अन्य बसों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। - प्रणव झा, आरटीओ प्रवर्तन
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