Bareilly News: निलंबित लेखपाल के गिरोह पर कसेगा शिकंजा, जांच के लिए एसपी सिटी के नेतृत्व में एसआईटी गठित
बरेली में विवादित भूखंडों पर कब्जा करने वाले निलंबित लेखपाल सावन कुमार जायसवाल और उसके गिरोह पर पुलिस ने शिकंजा कस दिया है। गिरोह के कारनामों की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है।
विस्तार
बरेली में निलंबित चकबंदी लेखपाल सावन कुमार जायसवाल के भूमाफिया गिरोह की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है। एसएसपी ने एसपी सिटी के नेतृत्व में छह सदस्यों की टीम बनाई है, जो विभिन्न बिंदुओं पर जांच करेगी।
लेखपाल और उसके दो साथियों को जेल भेजने के साथ ही बारादरी थाने में तीन मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। इसके अलावा कैंट थाने में हिम्मत सिंह कोल्ड स्टोर की बेशकीमती जमीन का भी यही गिरोह काफी पहले बैनामा कर चुका है।
वहां जमीन की असली मालकिन बताई जा रही विम्मी मदान से जुड़े तीन मुकदमों की विवेचना कैंट थाने में चल रही है। गिरोह शरीफ और कमजोर तबके के लोगों की जमीन को फर्जी बैनामा और वसीयत के आधार पर कब्जाने का काम करता था।
भूमाफिया गिरोह पर कसेगा शिकंजा
एसपी सिटी मानुष पारीक ने गिरोह का खुलासा किया तो रोज नई जानकारी सामने आ रही हैं। अब एसएसपी अनुराग आर्य ने इस गिरोह की कमर तोड़ने और निष्पक्ष विवेचना के लिए एसपी सिटी के नेतृत्व में एसआईटी (विशेष जांच टीम) बना दी है।
बारादरी थाने के इंस्पेक्टर क्राइम अरविंद सिंह थाने में दर्ज तीन मुकदमों की विवेचना पहले से कर रहे थे। अब कैंट थाने के तीन और मुकदमों की विवेचना भी उनको सौंपकर मुख्य विवेचक बनाया गया है।
उनकी मदद को एसआईटी में बारादरी थाने के एसएसआई रोहित शर्मा, भोजीपुरा थाने के दरोगा रितेश देओल, कैंट थाने के दरोगा सचिन और नितिन राना व सर्विलांस सेल के हेड कांस्टेबल लोकेन्द्र राणा को शामिल किया गया है। एसएसपी ने टीम को बिंदुवार समीक्षा कर आरोपियों की स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।
ट्रांसपोर्टर की भूमिका का होगा खुलासा
सूत्रों के मुताबिक इस गिरोह में लेखपाल भी केवल मोहरा है। शहर का एक बड़ा ट्रांसपोर्टर और कुछ प्रॉपर्टी डीलर पर्दे के पीछे से गिरोह को संचालित कर रहे थे। पीड़ितों के बयानों और प्राथमिक जांच में कई चीजें सामने आ चुकी हैं। अब एसआईटी की जांच में असली खिलाड़ियों का राजफाश होना तय माना जा रहा है।
एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि लेखपाल के गिरोह ने बड़े पैमाने पर जमीन कब्जाने का काम किया है। इसमें पर्दे के पीछे कुछ और लोग भी हो सकते हैं। सच्चाई सामने लाने के लिए एसआईटी का गठन किया गया है।