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Bareilly News: घर के करीब सरकारी नौकरी की चाहत में चली गई शिवम की जान

Sun, 20 Sep 2026 06:03 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 20 Sep 2026 06:03 AM IST
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Shivam lost his life in pursuit of a government job closer to home.
बरेली। मुरादाबाद में होमगार्ड भर्ती की दौड़ में जान गंवाने वाले बरेली निवासी शिवम का पूरा परिवार उच्च शिक्षित है। घर के करीब सरकारी नौकरी की चाहत में शिवम की जान चली गई। जवान बेटे की मौत से आहत उसके पिता व परिवार से अमर उजाला टीम ने बात की। पता लगा कि शिवम के दादा की मौत भी सरकारी नौकरी में प्रशिक्षण के दौरान हुई थी।
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शिवम के पिता विनोद यादव, पत्नी कोमल समेत पूरा परिवार शनिवार को घर में बैठा अफसोस जता रहा था। विनोद ने बताया कि वह राजपुर कलां गांव के निवासी हैं और कई साल से शहर से सटे बंशी नगला में घर बनाकर परिवार के साथ रह रहे हैं। विनोद बरेली बार एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष भी रह चुके हैं।
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उन्होंने बताया कि उनके पिता राजेंद्र सिंह ने भी इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया था। उनकी नौकरी भी रेलवे में लगी थी। टूंडला में प्रशिक्षण के दौरान वह एक पुल से गिर गए थे और उनकी मौत हो गई थी। विनोद यादव ने बताया कि शिवम मेधावी छात्र था। उसने राजकीय इंटर कॉलेज से 2014 में हाईस्कूल में 85 और इंटर की परीक्षा 90 फीसदी अंकों से उत्तीर्ण की थी।
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उसने 2019 में राजश्री कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया था। उसका प्लेसमेंट सितारगंज की एक निजी कंपनी में 20 हजार रुपये प्रतिमाह पर हुआ था। उनको उम्मीद थी कि शिवम इसी नौकरी में तरक्की कर भविष्य संवार लेगा, लेकिन वह घर के करीब सरकारी नौकरी का सपना देख रहा था। उसने एक माह में ही नौकरी छोड़ दी और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुट गया।
शिवम ने मेहनत जारी रखी और रेलवे में लोको पायलट की परीक्षा भी पास कर ली थी। उसका अंतिम रिजल्ट आना बाकी था। पिता ने कई बार उसे समझाया कि वह इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुका है और निजी क्षेत्र में अच्छा भविष्य बना सकता है, लेकिन बेटे ने सरकारी सेवा पाने का लक्ष्य नहीं छोड़ा।
दो माह पहले शिवम ने बचाई थी पिता की जान

विनोद यादव ने बताया कि दो माह पहले रेलवे लोको पायलट की नौकरी के अंतिम चरण में शिवम उनके साथ नोएडा गया था। इस दौरान भारी बारिश में सड़क पर जलभराव हो गया था। सड़क पर खुला मैनहोल उन्हें दिखाई नहीं दिया और वह उसमें गिर गए। जब वह पानी में डूबने लगे तो शिवम ने तुरंत पानी में छलांग लगा दी। वह तैरना जानता था तो पिता को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। विनोद ने अफसोस जताया कि वह होमगार्ड भर्ती दौड़ के दौरान मैदान पर दूर खड़े थे। जब 50 मीटर दौड़ बची तो शिवम की हालत बिगड़ गई। उन्होंने चिल्लाकर उसे रुकने का इशारा दिया। शिवम ने उनकी ओर देखा, लेकिन लक्ष्य पूरा करने के चक्कर में फिर दौड़ने लगा और उसकी जान चली गई।
बेटे को सीपीआर तक नहीं दिया
विनोद यादव ने आरोप लगाया कि मुरादाबाद में भर्ती दौड़ के दौरान दिखावे के लिए एंबुलेंस खड़ी थी, लेकिन डॉक्टरों की टीम उसमें नहीं थी। शिवम को सीपीआर मिल जाता तो शायद वह बच जाता। भर्ती में लगे पुलिसकर्मियों ने उन्हें भी बेटे की मदद के लिए आगे नहीं आने दिया। उन्होंने कहा कि बेटे को खो चुके हैं, लेकिन एक सबक दूसरे युवाओं को देना चाहते हैं। निजी क्षेत्र में नौकरी या व्यवसाय करके भी आप बेहतर जीवन जी सकते हैं। सरकारी नौकरी के लिए जान की बाजी लगाना ठीक नहीं है।
बच्चों को पढ़ाने की खातिर मां ने छोड़ी शिक्षामित्र की नौकरी
शिवम की मां ममता यादव दो दिन से बेसुध हैं। होश आने पर उन्होंने बताया कि वह खुद एमए बीएड हैं। गांव में अंकों के आधार पर उनका चयन शिक्षामित्र पद पर हुआ था। कई साल नौकरी की। फिर बच्चों की पढ़ाई की खातिर नौकरी छोड़कर शहर में रहने आ गईं। उन्होंने भी शिवम को समझाया था कि सरकारी नौकरी अपने परिवार को नहीं फली है, प्राइवेट नौकरी से काम चलाओ। शिवम को उसके पिता का उदाहरण दिया कि वकालत के सहारे ही वह परिवार पाल रहे हैं और सभी बच्चों को पढ़ाकर काबिल बनाया है। शिवम की पत्नी कोमल चौपुला की निवासी हैं और बीकॉम पढ़ी हैं। शिवम की तीन साल की बेटी भी है।



आजकल कुछ युवा अपने प्रदर्शन को बेहतर करने के लिए शाॅर्टकट का प्रयोग करने लगे हैं, जो कि उनके लिए खतरनाक साबित होता है। दवाओं के प्रयोग से समस्या होती है। देखा जाता है कि दौड़ से एक-दो दिन पहले ही अभ्यर्थी दौड़ना शुरु करते हैं जो कि गलत है। करीब दो माह पहले ही अभ्यर्थियों को अभ्यास करना शुरू कर देना चाहिए और धीरे-धीरे अपने प्रदर्शन को सुधारना चाहिए। ऐसे में परीक्षा के समय तक वह प्रदर्शन अच्छा हो जाता है। इसलिए किसी प्रकार की दवा का प्रयोग बिना डॉक्टर की सलाह के न लें। जो घटना हुई वह दुखद है। - अनीता नागर, एथलेटिक्स कोच व डीएसओ
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