{"_id":"5d8a7b09e264139ecc290fd1ba99d71e","slug":"shama-and-his-son-get-right-and-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शमा और उनके बेटे का मिलेगा हक और खर्चा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शमा और उनके बेटे का मिलेगा हक और खर्चा
बरेली
Updated Fri, 04 Dec 2015 01:28 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। शमा की कहानी अमर उजाला में पढ़ कर न सिर्फ आम आदमी पसीजा है बल्कि शमा के पति सुलेमान बेग और उनके परिवार का मन भी बदला है। शमा की कहानी बृहस्पतिवार को शहर में चर्चा का विषय रही। धार्मिक कायदे जानने वालों में भी इस पर बहस हुई। शाम को सुलेमान बेग के भाई डॉ अनीस बेग ने इस बारे में दरगाह जाकर भी मशवरा लिया। खुद सुलेमान बेग मान रहे हैं कि बेटे की परवरिश और शमा के खर्चे की जिम्मेदारी उनकी है। मामला चूंकि पुलिस तक पहुंच चुका है इसलिए वह 10 तारीख को प्रस्तावित बैठक में होने वाले समझौते की हर शर्त मानने की बात कर रहे हैं।
इधर दिन भर परिवार इस मसले को लेकर परेशान रहा। शमा के मुताबिक सुलह के लिए उन्हें एक सभासद के घर बुलाया गया था लेकिन वह नहीं गई। उन्हें आशंका थी कि इससे बात का बतंगड़ बन सकता था। सुलेमान वहां गए थे लेकिन बाद में उन्हें वापस लौटना पड़ा।
इस मामले में पहले विधायक सुल्तान बेग ने रुचि ली लेकिन वह अपने भाई की दलीलों पर ही चल रहे थे। बृहस्पतिवार को उनके छोटे भाई डा अनीस बेग आगे आए। उन्होंने शाम को दरगाह आला हजरत जाकर शहर काजी मौलाना असजद रजा खां कादरी के सामने मसला रखा और उनसे राय मांगी। वहां से लौट कर उन्होंने अमर उजाला कार्यालय आकर बताया कि उनके भाई ने शमा बेग को घर से नहीं निकाला है, घर उनका है और उनका रहेगा । कुरान और शरियत के अनुसार जो हक वाजिब है वह शमा को दिया जा रहा है और देते रहेंगे। आपसी मनमुटाव की वजह से शेरान की फीस जमा नहीं हो सकी थी जो शुक्रवार को जमा हो जाएगी। यह हमारे परिवार का आपसी मामला है, मिल बैठकर सुलझा लेंगे। किसी बाहरी को हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं है।
विज्ञापन
शमा ने पारिवारिक मामले को थाना पुलिस के साथ मध्यस्थता केंद्र तक पहुंचा दिया है।अब दस दिसंबर को लगी तारीख पर मध्यस्थता केंद्र में ही उससे बात करेंगे। मैं और मेरा परिवार बेटे शेरान को अपनाने को तैयार हैं। फीस और खर्चे मैं अदा करूंगा। मध्यस्थता केंद्र में शमा के खर्चे और उसके हक को लेकर जो समझौता होगा, उस पर पूरी तरह अमल करूंगा।
- सुलेमान बेग
विज्ञापन
इधर दिन भर परिवार इस मसले को लेकर परेशान रहा। शमा के मुताबिक सुलह के लिए उन्हें एक सभासद के घर बुलाया गया था लेकिन वह नहीं गई। उन्हें आशंका थी कि इससे बात का बतंगड़ बन सकता था। सुलेमान वहां गए थे लेकिन बाद में उन्हें वापस लौटना पड़ा।
विज्ञापन
इस मामले में पहले विधायक सुल्तान बेग ने रुचि ली लेकिन वह अपने भाई की दलीलों पर ही चल रहे थे। बृहस्पतिवार को उनके छोटे भाई डा अनीस बेग आगे आए। उन्होंने शाम को दरगाह आला हजरत जाकर शहर काजी मौलाना असजद रजा खां कादरी के सामने मसला रखा और उनसे राय मांगी। वहां से लौट कर उन्होंने अमर उजाला कार्यालय आकर बताया कि उनके भाई ने शमा बेग को घर से नहीं निकाला है, घर उनका है और उनका रहेगा । कुरान और शरियत के अनुसार जो हक वाजिब है वह शमा को दिया जा रहा है और देते रहेंगे। आपसी मनमुटाव की वजह से शेरान की फीस जमा नहीं हो सकी थी जो शुक्रवार को जमा हो जाएगी। यह हमारे परिवार का आपसी मामला है, मिल बैठकर सुलझा लेंगे। किसी बाहरी को हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं है।
विज्ञापन
शमा ने पारिवारिक मामले को थाना पुलिस के साथ मध्यस्थता केंद्र तक पहुंचा दिया है।अब दस दिसंबर को लगी तारीख पर मध्यस्थता केंद्र में ही उससे बात करेंगे। मैं और मेरा परिवार बेटे शेरान को अपनाने को तैयार हैं। फीस और खर्चे मैं अदा करूंगा। मध्यस्थता केंद्र में शमा के खर्चे और उसके हक को लेकर जो समझौता होगा, उस पर पूरी तरह अमल करूंगा।
- सुलेमान बेग