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और मन गया शेफाली का जन्मदिन
बरेली
Updated Fri, 21 Aug 2015 01:28 AM IST
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बरेली। भारतीय वायुसेना की महिला पायलट शेफाली चौधरी की शहर को अमर उजाला ने याद दिलाई तो अदम्य साहस का परिचय देते हुए अपना बलिदान देने वाली इस वीरवाला का जन्मदिन मनाने के लिए कई जागरूक लोग आगे आ गए। नगर निगम ने तो पूरी तरह से चुप्पी साधे रखी लेकिन निगम के पार्षद राजेश अग्रवाल और रागिनी अग्रवाल ने बृहस्पतिवार को सुबह से ही अपने खर्चे पर मजदूर लगाकर सर्किट हाउस चौराहा स्थित शेफाली चौधरी कीर्ति स्तंभ पर उगी बड़ी-बड़ी घास और झाड़ी की साफसफाई कराने के बाद रंगाई-पुताई कराई। दोपहर तक कीर्ति स्तंभ का पार्क चमचमाने लगे। शाम को केक काटकर पायलट शेफाली का जन्मदिन मनाया गया। इसमें शहर के कई प्रमुख जागरूक लोग शामिल हुए। सबने न सिर्फ शेफाली के बलिदान को याद किया, बल्कि शहर की इस साहसी बेटी का स्मरण कराने के लिए अमर उजाला की सराहना भी की। शाम को कीर्ति स्तंभ को झालरों से सजाया गया।
24 मार्च 1996 को आसाम में अपनी ड्यूटी के दौरान दो लोगों को बचाने के लिए 23 वर्षीय पायलट शेफाली ने उफनाती भरेली नदी में छलांग लगा दी। इस बहादुर बेटी ने दोनों को तो बचा लिया लेकिन खुद को न बचा सकी। ऐसा करके अपने साहस और बलिदान से शेफाली ने बहादुरी की ऐसी अमिट मिसाल बना दी जिसकी वजह से उसको तत्कालीन राष्ट्रपति ने मरणोपरांत सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक से सम्मानित किया। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी समेत तब पूरे देश ने इस बेटी के बलिदान को सदैव याद रखने का संकल्प लिया। इसी कड़ी में शहर के सर्किट हाउस चौराहा पर कीर्ति स्तंभ बनाया गया और शहर से छावनी को जाने वाले मार्ग का नामकरण भी शेफाली के नाम पर किया गया लेकिन कुछ वर्षों बाद ही 20 अगस्त को हर साल आने वाला शेफाली का जन्मदिन यह शहर भूल गया था, जिसे अमर उजाला ने बृहस्पतिवार को याद दिलाया। मेयर डॉ. आईएस तोमर ने कीर्ति स्तंभ पर जाने की बात तो कही थी लेकिन वह गए नहीं और न ही नगर निगम ने स्तंभ की साफसफाई की कोई जहमत उठाई लेकिन राजेश और रागिनी अग्रवाल के प्रयास से चमके इस स्तंभ पर शेफाली का जन्मदिन मनाने के लिए रजनी अग्रवाल, कर्नल दीदी शर्मा, सुमन उपाध्याय, आलोक ऐरन, तुषार चंद्रा, राजेश साहनी, अवधेश शर्मा, संजय कंडारी, सुरजीत सिंह, भरत अग्रवाल, पीसी पाठक और धैर्य सिंह यादव जुटे। इन्होंने हर साल जन्मदिन और बलिदान दिवस मनाने का संकल्प लिया। पार्षद राजेश अग्रवाल ने कहा कि वह पार्क का जीर्णोद्धार कराएंगे। वसुंधरा जनकल्याण समिति की अध्यक्ष सुमन उपाध्याय ने अपनी समिति की ओर से हर साल एक साहसी कार्य करने वाली लड़की को पायलट शेफाली स्मृति सम्मान देने का ऐलान किया।
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24 मार्च 1996 को आसाम में अपनी ड्यूटी के दौरान दो लोगों को बचाने के लिए 23 वर्षीय पायलट शेफाली ने उफनाती भरेली नदी में छलांग लगा दी। इस बहादुर बेटी ने दोनों को तो बचा लिया लेकिन खुद को न बचा सकी। ऐसा करके अपने साहस और बलिदान से शेफाली ने बहादुरी की ऐसी अमिट मिसाल बना दी जिसकी वजह से उसको तत्कालीन राष्ट्रपति ने मरणोपरांत सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक से सम्मानित किया। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी समेत तब पूरे देश ने इस बेटी के बलिदान को सदैव याद रखने का संकल्प लिया। इसी कड़ी में शहर के सर्किट हाउस चौराहा पर कीर्ति स्तंभ बनाया गया और शहर से छावनी को जाने वाले मार्ग का नामकरण भी शेफाली के नाम पर किया गया लेकिन कुछ वर्षों बाद ही 20 अगस्त को हर साल आने वाला शेफाली का जन्मदिन यह शहर भूल गया था, जिसे अमर उजाला ने बृहस्पतिवार को याद दिलाया। मेयर डॉ. आईएस तोमर ने कीर्ति स्तंभ पर जाने की बात तो कही थी लेकिन वह गए नहीं और न ही नगर निगम ने स्तंभ की साफसफाई की कोई जहमत उठाई लेकिन राजेश और रागिनी अग्रवाल के प्रयास से चमके इस स्तंभ पर शेफाली का जन्मदिन मनाने के लिए रजनी अग्रवाल, कर्नल दीदी शर्मा, सुमन उपाध्याय, आलोक ऐरन, तुषार चंद्रा, राजेश साहनी, अवधेश शर्मा, संजय कंडारी, सुरजीत सिंह, भरत अग्रवाल, पीसी पाठक और धैर्य सिंह यादव जुटे। इन्होंने हर साल जन्मदिन और बलिदान दिवस मनाने का संकल्प लिया। पार्षद राजेश अग्रवाल ने कहा कि वह पार्क का जीर्णोद्धार कराएंगे। वसुंधरा जनकल्याण समिति की अध्यक्ष सुमन उपाध्याय ने अपनी समिति की ओर से हर साल एक साहसी कार्य करने वाली लड़की को पायलट शेफाली स्मृति सम्मान देने का ऐलान किया।
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