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Bareilly News: लाइटें लगवाएगा सेतु निगम, संचालन संभालेगा नगर निगम
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बरेली। लाल फाटक पर रात में अंधेरे का डीएम ने संज्ञान लिया। उन्होंने सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक (डीपीएम) और लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता से बातचीत की। सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक को लाइटें लगवाने के आदेश दिए और कहा कि संचालन की जिम्मेदारी नगर निगम निभाएगा।
900 मीटर लंबे लाल फाटक पर पुल के निर्माण में 95 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो गए। पुल की पहली लेन 7 दिसंबर 2022 और दूसरी लेन 2 अप्रैल 2023 को चालू हो गई है, लेकिन 900 मीटर लंबे लाल फाटक पुल की दोनों लेन पर रात में अंधेरा रहता है। रोशनी का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। सेतु निगम को ही रोशनी की व्यवस्था करानी है। संचालन स्थानीय निकाय की जिम्मेदारी होती है, लेकिन लाइटें लगने के बाद रखरखाव कौन करेगा। यह तय नहीं हो सका था। इसलिए लाइटें ही नहीं लगाईं गईं। जब अमर उजाला ने यह मुद्दा उठाया तो डीएम ने संज्ञान लिया। उन्होंने कहा कि सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक प्रोजेक्ट के मुताबिक लाइटिंग कराएं। बाद में नगर निगम संचालन अपने हाथ में रखेगा।
लाल फाटक का पुल जिस स्थान पर है। वह कैंट क्षेत्र में आता है। कैंट बोर्ड ने लाल फाटक बनाने के लिए सेतु निगम को एमओयू के बाद जमीन दी थी। एमओयू में उल्लेख है कि जमीन देने के बाद कैंट बोर्ड पुल को लेकर कोई जिम्मेदारी नहीं निभाएगा। सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक ने जब कैंट बोर्ड से आग्रह किया तो उसने ठुकरा दिया था। इसीलिए डीएम ने प्रकरण का संज्ञान लिया है।
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लाल फाटक पुल पर रोशनी की व्यवस्था को लेकर स्थिति साफ है। सेतु निगम जल्दी से जल्दी लाइटिंग करेगा। नगर निगम उसकी देखरेख करेगा। - शिवाकांत द्विवेदी, डीएम
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900 मीटर लंबे लाल फाटक पर पुल के निर्माण में 95 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो गए। पुल की पहली लेन 7 दिसंबर 2022 और दूसरी लेन 2 अप्रैल 2023 को चालू हो गई है, लेकिन 900 मीटर लंबे लाल फाटक पुल की दोनों लेन पर रात में अंधेरा रहता है। रोशनी का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। सेतु निगम को ही रोशनी की व्यवस्था करानी है। संचालन स्थानीय निकाय की जिम्मेदारी होती है, लेकिन लाइटें लगने के बाद रखरखाव कौन करेगा। यह तय नहीं हो सका था। इसलिए लाइटें ही नहीं लगाईं गईं। जब अमर उजाला ने यह मुद्दा उठाया तो डीएम ने संज्ञान लिया। उन्होंने कहा कि सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक प्रोजेक्ट के मुताबिक लाइटिंग कराएं। बाद में नगर निगम संचालन अपने हाथ में रखेगा।
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लाल फाटक का पुल जिस स्थान पर है। वह कैंट क्षेत्र में आता है। कैंट बोर्ड ने लाल फाटक बनाने के लिए सेतु निगम को एमओयू के बाद जमीन दी थी। एमओयू में उल्लेख है कि जमीन देने के बाद कैंट बोर्ड पुल को लेकर कोई जिम्मेदारी नहीं निभाएगा। सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक ने जब कैंट बोर्ड से आग्रह किया तो उसने ठुकरा दिया था। इसीलिए डीएम ने प्रकरण का संज्ञान लिया है।
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लाल फाटक पुल पर रोशनी की व्यवस्था को लेकर स्थिति साफ है। सेतु निगम जल्दी से जल्दी लाइटिंग करेगा। नगर निगम उसकी देखरेख करेगा। - शिवाकांत द्विवेदी, डीएम