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माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ी पूजा : सुधांशु महाराज
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बरेली। विश्व जागृति मिशन की ओर से मनोहर भूषण इंटर कॉलेज में आयोजित सत्संग के अंतिम दिन शनिवार को सुधांशु महाराज ने लोगों को ईश्वर स्वरूप माता-पिता का सम्मान करने के लिए प्रेरित किया। इसको सबसे बड़ी पूजा बताया।
उन्होंने कहा, हमें भूलकर भी माता-पिता का अपमान नहीं करना चाहिए, क्योंकि उनका अपमान सीधे तौर पर ईश्वर का अपमान है। उनका अपमान करने वाले बच्चे जीवन में सुखी नहीं रहते हैं। रोजाना माता-पिता के चरण छूकर आशीर्वाद लेना चाहिए, यह ईश्वर के वरदान की तरह है। उनके खुश रहने पर देवता प्रसन्न रहते हैं।
सुधांशु महाराज ने श्रीकृष्ण-अर्जुन के संवाद को भी समझाया। बताया कि मनुष्य सिद्धि प्राप्त करने के लिए प्रयास करता है। उनमें से कोई एक श्रीकृष्ण ठीक से जान पाता है। श्रीकृष्ण कहते हैं, हे अर्जुन, मुझे चार प्रकार के लोग भजते हैं, दुखिया, जिज्ञासु, ऐश्वर्य की कामना करने वाले और ज्ञानी। ज्ञानी भक्त मुझे प्रिय हैं। वह जानता है कि मेरे अलावा इस सृष्टि में कुछ भी सत्य नहीं है। इसीलिए तू केवल मेरा ध्यान कर, मेरी पूजा और आराधना कर, क्योंकि मेरे सिवाय इस संसार में कुछ भी नहीं है।
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कहा कि संसार में मृत्यु के अलग-अलग स्वरूप होते हैं। किसी की आर्थिक मृत्यु, किसी की सांसारिक मृत्यु, तो किसी के यश की मृत्यु हो जाती है। इसके अलावा, गुणों या संतान की मृत्यु होना भी मनुष्य की मृत्यु के समान ही है। हर सोमवार को, महामृत्युंजय मंत्र या मृत संजीवनी मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए।
महादेव के साथ-साथ माता काली की आराधना भी करनी चाहिए, जिससे माता और पिता दोनों की कृपा हम पर सदैव बनी रहे। कार्यक्रम में अनिल अग्रवाल, पंकज अग्रवाल, देवेंद्र खंडेलवाल, पवन अरोड़ा, संजय गर्ग, संदीप मेहरा, सुशील दीक्षित, अनूप अग्रवाल, डॉ. जितेंद्र शर्मा, देवेंद्र सक्सेना, सुनील दीक्षित, रवि पांडे, श्रीकांत आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा, हमें भूलकर भी माता-पिता का अपमान नहीं करना चाहिए, क्योंकि उनका अपमान सीधे तौर पर ईश्वर का अपमान है। उनका अपमान करने वाले बच्चे जीवन में सुखी नहीं रहते हैं। रोजाना माता-पिता के चरण छूकर आशीर्वाद लेना चाहिए, यह ईश्वर के वरदान की तरह है। उनके खुश रहने पर देवता प्रसन्न रहते हैं।
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सुधांशु महाराज ने श्रीकृष्ण-अर्जुन के संवाद को भी समझाया। बताया कि मनुष्य सिद्धि प्राप्त करने के लिए प्रयास करता है। उनमें से कोई एक श्रीकृष्ण ठीक से जान पाता है। श्रीकृष्ण कहते हैं, हे अर्जुन, मुझे चार प्रकार के लोग भजते हैं, दुखिया, जिज्ञासु, ऐश्वर्य की कामना करने वाले और ज्ञानी। ज्ञानी भक्त मुझे प्रिय हैं। वह जानता है कि मेरे अलावा इस सृष्टि में कुछ भी सत्य नहीं है। इसीलिए तू केवल मेरा ध्यान कर, मेरी पूजा और आराधना कर, क्योंकि मेरे सिवाय इस संसार में कुछ भी नहीं है।
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कहा कि संसार में मृत्यु के अलग-अलग स्वरूप होते हैं। किसी की आर्थिक मृत्यु, किसी की सांसारिक मृत्यु, तो किसी के यश की मृत्यु हो जाती है। इसके अलावा, गुणों या संतान की मृत्यु होना भी मनुष्य की मृत्यु के समान ही है। हर सोमवार को, महामृत्युंजय मंत्र या मृत संजीवनी मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए।
महादेव के साथ-साथ माता काली की आराधना भी करनी चाहिए, जिससे माता और पिता दोनों की कृपा हम पर सदैव बनी रहे। कार्यक्रम में अनिल अग्रवाल, पंकज अग्रवाल, देवेंद्र खंडेलवाल, पवन अरोड़ा, संजय गर्ग, संदीप मेहरा, सुशील दीक्षित, अनूप अग्रवाल, डॉ. जितेंद्र शर्मा, देवेंद्र सक्सेना, सुनील दीक्षित, रवि पांडे, श्रीकांत आदि मौजूद रहे।