गरीबों के अनाज में हेराफेरी से बाज नहीं आ रहे घोटालेबाज

Bareily Bureauबरेली ब्यूरो Updated Tue, 02 Jun 2020 01:43 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : AITMC

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जांच के नाम पर पूर्ति विभाग की खानापूरी से सामने नहीं आ पा रहे असली चेहरे

बरेली। सरकारी सिस्टम कोरोना महामारी से निपटने में जुटा है तो इसकी फायदा उठाकर अनाज माफिया सैकड़ों क्विंटल अनाज की हेराफेरी करने में लगे हैं। चूंकि इस समय गरीबों की मदद के नाम पर सरकार दोनों हाथों से सस्ता राशन बांट रही है तो घोटालेबाजों को खेल करने का पूरा मौका मिल रहा है। हर महीने माफिया गरीबों का हजारों क्विंटल राशन गटक कर जा रहे हैं। जांच के नाम पर आपूर्ति विभाग खानापूर्ति कर रहा है। इस वजह से इस खेल के पीछे असली गुनहगार सामने नहीं आ पा रहे। सीबीगंज के बाद हजियापुर और अब क्यारा में सैकड़ों क्विंटल अनाज बरामद होने के बाद मामलों को जिस तरह छुपाने की कोशिश हुई है उससे ऊपर से नीचे तक मिलीभगत सामने आ रही है।
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रविवार को कैंट पुलिस ने क्यारा के एक आढ़ती का करीब 220 क्विंटल गेहूं-चावल पकड़ा था। व्यापारी यह राशन गुपचुप तरीके से ले जा रहा था। हालांकि इसके सरकारी अनाज होने की पुष्टि नहीं है, वहीं शक के दायरे में आए कोटेदार का राशन का स्टॉक भी जांच में पूरा मिला। इससे पहले हॉटस्पॉट रहे हजियापुर में एक व्यक्ति के यहां से बड़ी मात्रा में सरकारी अनाज बरामद हुआ था। बाद में यह कहते हुए कोटेदारों को क्लीन चिट दे दी गई कि जिस व्यक्ति के यहां से राशन बरामद हुआ उसने कार्डधारकों से ही अनाज खरीदा था। बाद में वह उसे बाजार में बेच देता था। पूर्ति विभाग के अफसरों ने इस पूरे मामले की तह तक जाने की कोशिश नहीं की और सारा मामला ऐसे ही रफादफा हो गया है।
लॉकडाउन के दौरान ही मार्च में सीबीगंज में एक और कोटेदार के यहां से सैकड़ों क्विंटल अनाज स्टॉक में कम मिला था। कई दिन तक वह दुकान से गायब भी रहा था, बाद में दुकान ही सील कर दी गई थी। इसलिए कोटेदार गायब राशन दोबारा नहीं रख सका। बाद में कहीं से कोटेदार ने जुगाड़ से इकट्ठा किए राशन का पास ही में दूसरी जगह स्टॉक दिखाकर बचने की कोशिश की। इन मामलों से साबित है कि हजारों क्विंटल अनाज घोटाले का यह खेल केवल कोटेदार या छुटभैय्यों के भरोसे नहीं चल रहा।

राशन सरकारी नहीं.. तो क्विंटलों अनाज और ट्रैक्टर-ट्रॉली छोड़कर आढ़ती क्यो भागा

रविवार को पुलिस ने क्यारा के एक व्यापारी की ट्रैक्टर-ट्रॉली से 200 क्विंटल गेेहूं और करीब 20 क्विंटल चावल बरामद किया। पूर्ति निरीक्षक ललित श्रीवास्तव ने जांच के बाद बरामद अनाज को कोटे की दुकान का न होने की पुष्टि कर दी है। ग्रामीणों के हवाले से उनका कहना है कि यह अनाज जिस व्यापारी का है कि वह क्यारा के पास एक बाजार में आढ़त का काम करता है। सप्लाई इंस्पेक्टर का कहना है कि क्यारा के पास एक कोटेदार का संदेह के आधार पर स्टॉक भी जांचा गया था, लेकिन वहां कोई गड़बड़ी नहीं मिली। अब सवाल यह है कि यह अनाज जब व्यापारी ने किसानों से खरीदा है तो वह जांच और कागज दिखाने के लिए सामने आने के बजाय लापता क्यों है? अफसरों के पास इसका कोई जवाब नहीं। हालांकि शाम को सप्लाई इंस्पेक्टर ने इस मामले की रिपोर्ट एसडीएम सदर ईशान प्रताप सिंह को सौंप दी।

लॉकडाउन में महीने में दो बार मिल रहे राशन से बढ़ा भ्रष्टाचार

जिले में करीब एक लाख अंत्योदय और पात्र गृहस्थी मिलाकर कुल आठ लाख कार्डधारक हैं। अप्रैल से इन्हें महीने में दो बार सस्ता राशन दिया जा रहा है। इसमें अंत्योदय और श्रमिक व मनरेगा कार्डधारकों को फ्री राशन दिया जा रहा है, जिसके चलते कोटेदारों को महीने में दो बार कई लाख क्विंटल अनाज का आवंटन हो रहा है। इसमें फर्जी कार्डों पर भी जमकर आवंटन दिखाकर घोटाला हो रहा है।

कैंट में जो अनाज पकड़ा गया है उसकी जांच कराई जा रही है। मंडी से भी यह पुष्टि कराई जाएगी कि इसका शुल्क जमा हुआ था या नहीं। आरोपी आढ़ती जब तक अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं करेगा तब तक उसका अनाज और ट्रैक्टर-ट्रॉली पुलिस के पास ही रहेगी। - ईशान प्रसाद सिंह, एसडीएम सदर

गड़बड़ी के जो भी मामले सामने आ रहे हैं उनकी जांच कराई जा रही है। आरोपियों के खिलाफ उचित कार्रवाई के आदेश भी दिए गए हैं। - सीमा त्रिपाठी, जिला पूर्ति अधिकारी

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