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गन्ना शोध परिषद में भर्ती घोटाले की विभागीय जांच में पुष्टि
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शाहजहांपुर। उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद में करीब चार साल पहले वैज्ञानिकों के विभिन्न पदों पर हुई भर्ती में धांधली की त्रिस्तरीय विभागीय जांच में पुष्टि हो गई है। तीनों जांचों की रिपोर्ट के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है। कार्रवाई करने से पहले संयुक्त सचिव की ओर से शोध परिषद के तत्कालीन प्रभारी निदेशक डॉ. बीएल शर्मा को आरोप पत्र जारी किया गया है, जिससे वह अपना पक्ष रख सकें।
वर्ष 2015 में यहां लोधीपुर चौराहे के पास स्थित उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद में वरिष्ठ वैज्ञानकि अधिकारी, वैज्ञानिक अधिकारी, प्रसार अधिकारी, सांख्यिकी अधिकारी और वरिष्ठ पुस्कालयाध्यक्ष के पदों पर भर्ती हुई थी। इन पदों के लिए बड़ी संख्या में आवेदन किए गए थे। आवेदन करने वालों में परिषद में विभिन्न पदों पर कार्यरत वैज्ञानिक भी शामिल थे। चयन के लिए साक्षात्कार 13 जून 2015 को हुआ था। आवेदन पत्रों की जांच के लिए तीन सदस्यीय स्क्रीनिंग कमेटी गठित की गई थी। स्क्रीनिक कमेटी का काम ऐसे आवेदको की छंटनी करना था, जो पद के लिहाज से पात्र नहीं हैं। बस यहीं पर खेल कर दिया गया। बड़ी संख्या में आवेदकों को अयोग्य बताकर सूची से बाहर कर दिया गया था। वहीं चहेतों को नौकरी देने के लिए एक पद पर एक ही आवेदक का नाम फाइनल किया गया, जो पूरी तरह गलत था। वैज्ञानिकों की भर्ती में घपलेबाजी का पता लगने पर डॉ. अशोक कुमार वर्मा और जनप्रतिनिधियों ने इसकी शिकायत शासन में की थी। शुरूआत में इस मामले की जांच अपर गन्ना आयुक्त (शोध एवं समन्वय) को दी गई थी। इसके बाद सहारनपुर मंडलायुक्त की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी। इस कमेटी ने विस्तार से जांच की तो आरोप सही पाए गए। इस कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद तीसरी बार जांच चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग विकास विभाग के विशेष सचिव राकेश कुमार मिश्र को दी गई थी। उनकी जांच में भी शोध परिषद में भर्ती प्रक्रिया में हुई धांधली की पुष्टि हुई। शासन ने कार्रवाई से पहले शोध परिषद के तत्कालीन प्रभारी निदेशक डॉ. बीएल शर्मा को अपना पक्ष रखने का मौका दिया है।
ये लगे आरोप
1. आरोप है कि चयन प्रक्रिया में स्क्रीनिंग कमेटी की संस्तुतियों को दरकिनार कर अभ्यर्थियों की पात्रता स्पष्ट न होने के बावजूद अत्यंत कम अंक पाए अभ्यर्थियों को अवैधानिक रूप से नियुक्ति दे दी गई।
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2. अभ्यर्थियों को वांछित अनुभव न होने के बावजूद उन्हें साक्षात्कार हेतु न सिर्फ बुलाया गया, बल्कि अभ्यर्थियों की सूची में उनका अनुभव अंकित कर जालसाजी से अपात्रों की नियुक्ति भी कर ली गई।
3. निर्धारित आयु सीमा पार कर चुके अभ्यर्थी का साक्षात्कार को बुलाकर नियुक्त दे दी गई।
4. विज्ञापन के अनसार निर्धारित शैक्षिक योग्यता न रखने वाले मात्र एक अभ्यर्थी को साक्षात्कार हेतु बुलाकर चयन करना लिया गया।
5. निर्धारित अनुभव न रखने वाले अभ्यर्थियों को साक्षात्कार हेतु बलाकर चयन कर नियुक्त कर लिया गया।
6. निर्धारित शैक्षिक योग्यता न रखने वाले अभ्यर्थियों को मनमाने ढंग से साक्षात्कार हेतु बुलाकर चयन कर लिया गया।
7. विभिन्न विषयों के पदों हेतु प्रत्येक पद के सापेत्र साक्षात्कार को बुलाए जाने वाले अभ्यर्थियों के अनुपात संबंधी शासनादेश का उल्लंघन करना और विज्ञापन निरस्त कर रिक्तियों को पुनर्विज्ञापित कराए जाने का प्रस्ताव अध्यक्ष, गवर्निंग बाडी को प्रस्तुत न करना।
8. साक्षात्कार समिति के गठन में परिषदीय सेवा नियमावली के प्रावधानों की अनदेखी करना।
9. अभ्यर्थियों की योग्यता के आधार पर प्राप्त अंकों की अनदेखी कर मनमाने ढंग से चयन करना।
10. अपर गन्ना आयुक्त (शोध एवं समन्वय) को प्रकरण की जांच में सहयोग न करना।
यह पूरा मामला प्रमुख सचिव संजय भूस रेडी के पास है। यहां जो भी लेखाजोखा था करीब डेढ़ साल पहले शासन को भेज दिया गया था। इस मामले में निर्णय भी शासन को लेना है। - जे सिंह, निदेशक गन्ना शोध परिषद
-- प्रमुख शिकायतकर्ता डॉ. अशोक कुमार वर्मा ने शासन में शिकायत करने के साथ इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय में सुनवाई के बाद उनकी याचिका गुण दोष के आधार पर बलहीन होने के कारण खारिज कर दी थी। उन्हीं कथित अनियमितताओं के संबंध में दोबारा जांच किया जाना विधि विरुद्ध है।
डॉ. बीएल शर्मा, तत्कालीन प्रभारी निदेशक गन्ना शोध परिषद
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वर्ष 2015 में यहां लोधीपुर चौराहे के पास स्थित उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद में वरिष्ठ वैज्ञानकि अधिकारी, वैज्ञानिक अधिकारी, प्रसार अधिकारी, सांख्यिकी अधिकारी और वरिष्ठ पुस्कालयाध्यक्ष के पदों पर भर्ती हुई थी। इन पदों के लिए बड़ी संख्या में आवेदन किए गए थे। आवेदन करने वालों में परिषद में विभिन्न पदों पर कार्यरत वैज्ञानिक भी शामिल थे। चयन के लिए साक्षात्कार 13 जून 2015 को हुआ था। आवेदन पत्रों की जांच के लिए तीन सदस्यीय स्क्रीनिंग कमेटी गठित की गई थी। स्क्रीनिक कमेटी का काम ऐसे आवेदको की छंटनी करना था, जो पद के लिहाज से पात्र नहीं हैं। बस यहीं पर खेल कर दिया गया। बड़ी संख्या में आवेदकों को अयोग्य बताकर सूची से बाहर कर दिया गया था। वहीं चहेतों को नौकरी देने के लिए एक पद पर एक ही आवेदक का नाम फाइनल किया गया, जो पूरी तरह गलत था। वैज्ञानिकों की भर्ती में घपलेबाजी का पता लगने पर डॉ. अशोक कुमार वर्मा और जनप्रतिनिधियों ने इसकी शिकायत शासन में की थी। शुरूआत में इस मामले की जांच अपर गन्ना आयुक्त (शोध एवं समन्वय) को दी गई थी। इसके बाद सहारनपुर मंडलायुक्त की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी। इस कमेटी ने विस्तार से जांच की तो आरोप सही पाए गए। इस कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद तीसरी बार जांच चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग विकास विभाग के विशेष सचिव राकेश कुमार मिश्र को दी गई थी। उनकी जांच में भी शोध परिषद में भर्ती प्रक्रिया में हुई धांधली की पुष्टि हुई। शासन ने कार्रवाई से पहले शोध परिषद के तत्कालीन प्रभारी निदेशक डॉ. बीएल शर्मा को अपना पक्ष रखने का मौका दिया है।
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ये लगे आरोप
1. आरोप है कि चयन प्रक्रिया में स्क्रीनिंग कमेटी की संस्तुतियों को दरकिनार कर अभ्यर्थियों की पात्रता स्पष्ट न होने के बावजूद अत्यंत कम अंक पाए अभ्यर्थियों को अवैधानिक रूप से नियुक्ति दे दी गई।
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2. अभ्यर्थियों को वांछित अनुभव न होने के बावजूद उन्हें साक्षात्कार हेतु न सिर्फ बुलाया गया, बल्कि अभ्यर्थियों की सूची में उनका अनुभव अंकित कर जालसाजी से अपात्रों की नियुक्ति भी कर ली गई।
3. निर्धारित आयु सीमा पार कर चुके अभ्यर्थी का साक्षात्कार को बुलाकर नियुक्त दे दी गई।
4. विज्ञापन के अनसार निर्धारित शैक्षिक योग्यता न रखने वाले मात्र एक अभ्यर्थी को साक्षात्कार हेतु बुलाकर चयन करना लिया गया।
5. निर्धारित अनुभव न रखने वाले अभ्यर्थियों को साक्षात्कार हेतु बलाकर चयन कर नियुक्त कर लिया गया।
6. निर्धारित शैक्षिक योग्यता न रखने वाले अभ्यर्थियों को मनमाने ढंग से साक्षात्कार हेतु बुलाकर चयन कर लिया गया।
7. विभिन्न विषयों के पदों हेतु प्रत्येक पद के सापेत्र साक्षात्कार को बुलाए जाने वाले अभ्यर्थियों के अनुपात संबंधी शासनादेश का उल्लंघन करना और विज्ञापन निरस्त कर रिक्तियों को पुनर्विज्ञापित कराए जाने का प्रस्ताव अध्यक्ष, गवर्निंग बाडी को प्रस्तुत न करना।
8. साक्षात्कार समिति के गठन में परिषदीय सेवा नियमावली के प्रावधानों की अनदेखी करना।
9. अभ्यर्थियों की योग्यता के आधार पर प्राप्त अंकों की अनदेखी कर मनमाने ढंग से चयन करना।
10. अपर गन्ना आयुक्त (शोध एवं समन्वय) को प्रकरण की जांच में सहयोग न करना।
यह पूरा मामला प्रमुख सचिव संजय भूस रेडी के पास है। यहां जो भी लेखाजोखा था करीब डेढ़ साल पहले शासन को भेज दिया गया था। इस मामले में निर्णय भी शासन को लेना है। - जे सिंह, निदेशक गन्ना शोध परिषद
-- प्रमुख शिकायतकर्ता डॉ. अशोक कुमार वर्मा ने शासन में शिकायत करने के साथ इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय में सुनवाई के बाद उनकी याचिका गुण दोष के आधार पर बलहीन होने के कारण खारिज कर दी थी। उन्हीं कथित अनियमितताओं के संबंध में दोबारा जांच किया जाना विधि विरुद्ध है।
डॉ. बीएल शर्मा, तत्कालीन प्रभारी निदेशक गन्ना शोध परिषद