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सेटेलाइट पुलः बजट मिलने के बाद भी लटका दिया एचटी लाइन हटाने का काम
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सेटेलाइट पुल के ऊपर से होकर गुजरती हाईटेंशन लाइन।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
हाईटेंशन लाइन शिफ्ट हो तो बने पुल की सड़क और लगें स्ट्रीट लाइट के पोल
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बरेली। सेटेलाइट पुल के ऊपर से एचटी (हाईटेंशन) लाइन हटाने को बजट मिलने के बावजूद अब तक काम शुरू नहीं किया गया है। सेतु निगम तो अपने हिस्से का 90 फीसदी काम पूरा कर चुका है, पावर कॉरपोरेशन की ट्रांसमिशन विंग अब जब लाइन हटा देगी तो बाकी दस प्रतिशत काम हो सकेगा।
सेटेलाइट पुल शुरू होने में अब एचटी लाइन हटाने के लिए पावर कॉरपोरेशन बाधा बन रहा है। कई दिन पहले सेतु निगम की ओर से बिजली विभाग को एचटी लाइन शिफ्ट करने के लिए भुगतान किया जा चुका है। लेकिन शिफ्टिंग का काम नहीं शुरू किया गया है। करंट का खतरा होने के कारण पुल पर सड़क बनाने व स्ट्रीट लाइट के पोल लगाने का काम इसी वजह से नहीं हो पा रहा है।
बता दें कि 2018 में सेटेलाइट तिराहे पर करीब 597 मीटर लंबे फ्लाईओवर के निर्माण की मंजूरी मिली थी। निर्माण के लिए 26.78 करोड़ रुपये का बजट भी आवंटित किया गया। इस वर्ष अक्तूबर तक पुल का निर्माण पूरा करने का समय निर्धारित किया गया था। शुरूआत में वन विभाग ने आपत्ति लगाई। इसके बाद पावर कॉरपोरेशन ने पोल हटाने के लिए करीब 68 लाख रुपये मांग लिए थे। इधर लॉकडाउन में करीब तीन महीने काम बंद रहा। इसके बाद पुल के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन पुल निर्माण में रोड़ा बनी। इसे हटाने के लिए ट्रांसमिशन विंग ने 5.85 करोड़ रुपये का एस्टीमेट सेतु निगम को दिया था। सेेतु निगम डीपीएम वीके सेन ने बताया कि लाइन शिफ्ट करने की प्रक्रिया पावर कॉरपोरेशन की ओर से कहां तक पहुंची, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। कॉरपोरेशन को हालांकि जल्दी ही बिजली लाइन हटाने को उन्होंने कहा है।
सेटेलाइट पुल शुरू होने में अब एचटी लाइन हटाने के लिए पावर कॉरपोरेशन बाधा बन रहा है। कई दिन पहले सेतु निगम की ओर से बिजली विभाग को एचटी लाइन शिफ्ट करने के लिए भुगतान किया जा चुका है। लेकिन शिफ्टिंग का काम नहीं शुरू किया गया है। करंट का खतरा होने के कारण पुल पर सड़क बनाने व स्ट्रीट लाइट के पोल लगाने का काम इसी वजह से नहीं हो पा रहा है।
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बता दें कि 2018 में सेटेलाइट तिराहे पर करीब 597 मीटर लंबे फ्लाईओवर के निर्माण की मंजूरी मिली थी। निर्माण के लिए 26.78 करोड़ रुपये का बजट भी आवंटित किया गया। इस वर्ष अक्तूबर तक पुल का निर्माण पूरा करने का समय निर्धारित किया गया था। शुरूआत में वन विभाग ने आपत्ति लगाई। इसके बाद पावर कॉरपोरेशन ने पोल हटाने के लिए करीब 68 लाख रुपये मांग लिए थे। इधर लॉकडाउन में करीब तीन महीने काम बंद रहा। इसके बाद पुल के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन पुल निर्माण में रोड़ा बनी। इसे हटाने के लिए ट्रांसमिशन विंग ने 5.85 करोड़ रुपये का एस्टीमेट सेतु निगम को दिया था। सेेतु निगम डीपीएम वीके सेन ने बताया कि लाइन शिफ्ट करने की प्रक्रिया पावर कॉरपोरेशन की ओर से कहां तक पहुंची, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। कॉरपोरेशन को हालांकि जल्दी ही बिजली लाइन हटाने को उन्होंने कहा है।
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