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सुधीर विद्यार्थी को साहित्य भूषण और मोनिका को श्रीधर पाठक पुरस्कार

Sat, 02 Oct 2021 01:52 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 02 Oct 2021 01:52 AM IST
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Sahitya Bhushan to Sudhir Vidyarthi and Shridhar Pathak Award to Monika
सुधीर विद्यार्थी और डॉ. मोनिका अग्रवाल।

साठ से ज्यादा पुस्तकें लिख चुके हैं विद्यार्थी, मोनिका को काव्य संग्रह ‘गौरेया का ट्वीट’ पर मिला पुरस्कार

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बरेली। उप्र हिंदी संस्थान ने प्रदेश के 20 साहित्यकारों को साहित्य भूषण सम्मान प्रदान किया है जिनमें बरेली के सुधीर विद्यार्थी भी शामिल हैं। इसके अलावा बरेली की ही डॉ. मोनिका को उनके काव्य संग्रह ‘गौरेया का ट्वीट’ श्रीधर पाठक पुरस्कार से नवाजा गया है।
सुधीर विद्यार्थी ने 60 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं। कुछ महीनों में उनकी रुहेलखंड के इतिहास पर लिखी पुस्तक भी प्रकाशित होगी। वह स्वतंत्र लेखन करते हैं। समाचार पत्रों में भी उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। उन्होंने अशफाक उल्ला खां और उनका युग, आमादेर विप्लवी, उत्सर्ग, शहीद भगत सिंह, मेरे हिस्से का शहर, शहर के भीतर शहर समेत कई किताबें लिखी हैं। उनकी पुस्तक अशफाक उल्ला खां और उनका युग पर आधारित नाटक भी डीडी-1 पर प्रसारित हो चुका है।
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सुधीर विद्यार्थी की साहित्य मंजूषा, क्रांति की प्रतिमूर्ति और दुर्गा भाभी को एनसीआरटी की कक्षा 11 की किताबों में शामिल किया गया है। इसके अलावा कक्षा पांच की पुस्तक में शहीद रोशन सिंह को शामिल कर बच्चों को पढ़ाया गया। वह कर्मचारियों, मजदूरों के हक को लेकर आंदोलन भी करते रहे हैं। सुधीर विद्यार्थी मूल रूप से शाहजहांपुर के खुदागंज कस्बे के रहने वाले हैं लेकिन काफी वक्त से यहां पवन विहार कॉलोनी में रह रहे हैं।
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एकतानगर में रहने वाली डॉ. मोनिका अग्रवाल को जिस काव्य संग्रह ‘गौरेया का ट्वीट’ पर पुरस्कार मिला है, वह उनका चौथा संग्रह है। इससे पहले ‘शब्द में गंध’ और ‘मन की नील नदी’ प्रकाशित हो चुके हैं। 2018 में उन्हें कहानी संग्रह ‘पिघलती बर्फ’ के लिए सम्मानित किया गया था। ‘गौरेया का ट्वीट’ उन्हाेंने कोविड काल में लिखा। डॉ. मोनिका कहती हैं कि लॉकडाउन में सभी ने देखा कि बरेली से पहाड़ दिखने लगे थे। लोगों ने लंबे अरसे बाद आंगन में गौरेया देखी। इसी अनुभव को उन्हाेंने शब्दाें में पिरोते हुए कविता संग्रह तैयार किया।
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